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Home » Economy » Policy55 percent of Indians still keep physical diaries for their financial records

55 फीसदी भारतीय आज भी अपने फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड के लिए फिजिकल डायरी रखते हैं

जानिए इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें...

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नई दिल्ली। आज आर्थिक ज़िम्मेदारियां कमाई और बचत के दायरे को पार कर चुकी हैं। इन जिम्मेदारियों के साथ कई और पहलु जुड़े हैं जैसे फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड रखना और परिवार को इसके बारे में प्रासंगिक जानकारी देना। हमारे जीवन के कई महत्वपूर्ण आर्थिक पहलुओं पर आज डिजिटलीकरण का महत्व है जैसे बैंकिंग, इनकम टैक्स फाइल करना और रोज़मर्रा के भुगतान। हालांकि जब अपने सभी निवेशों का डिजिटल रिकाॅर्ड रखने की बात आती है तो हम पीछे छूट जाते हैं। 2018 में एक्साईज़ लाईफ इंश्योरेन्स द्वारा जारी मनी हैबिट्स सर्वेक्षण के अनुसार 55 फीसदी लोग आज भी अपने फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड्स के लिए फिज़िकल डायरी रखते हैं। 38 फीसदी लोग इसे एक्सेल फाइल में सेव करते हैंै, जबकि 15 फीसदी लोग इस जानकारी को किसी मोबाइल ऐप पर रखते हैं। सर्वेक्षण किए गए 66 फीसदी लोग अपने लाईफ इंश्योरेन्स पाॅलिसी की फिज़िकल काॅपी रखते हैं, सिर्फ 8 फीसदी लोग ही इसे अपने ई-इंश्योरेन्स अकाउन्ट के साथ लिंक करते हैं।

मार्केटिंग एवं डायरेक्ट चैनल, एक्साईड लाईफ इंश्योरेन्स के डायरेक्टर, मोहित गोयल के अनुसार ये है कुछ महत्वपूर्ण बातें :

 

-- आपके फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड्स हमेशा आपके पास होने चाहिए, ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप और आपके परिवार के सदस्य इनके बारे में जान सकें, इस तथ्य के बावजूद सर्वेक्षण किए गए 38 फीसदी भारतीयों ने बताया कि उनके पास ऐसा कोई रिकाॅर्ड नहीं है जबकि 15 फीसदी लोगों का मानना है कि ऐसे रिकाॅर्ड रखना ज़रूरी नहीं है। सर्वेक्षण किए गए भारतीय इस बात को नहीं समझते कि उनके परिवार के लिए फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड के बारे में जानना कितना ज़रूरी है; वहीं 37 फीसदी भारतीयों ने बताया कि उन्होंने अपनी फाइनेन्शियल जानकारी अपने परिवार को नहीं दी है।

 

-- इस डिजिटल सर्वेक्षण में महानगरों और दूसरे शहरों सहित 12 शहरों को कवर किया गया। एक्साईड लाईफ इंश्योरेन्स ने इस सर्वेक्षण के माध्यम से जानने की कोशिश की है कि लाईफ इंश्योरेन्स लेने वाले लोग अपने फाइनेन्शियल रिकाॅर्ड्स को कितना महत्व देते हैं। हालांकि वे अपने जीवन के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाते हैं, वे कितनी अच्छी तरह अपने परिवार को सुरक्षित कर रहे है। वर्तमान में उनके पास कितना लाईफ इंश्योरेन्स है और वे कितना रखने के बारे में सोच रहे हैं।


 

-- आर्थिक जिम्मेदारी अपने आप में जटिल प्रक्रिया है, जिसमें लगातार बदलाव भी आते रहते हैं। आर्थिक ज़िम्मेदारी के साथ लाईफ इंश्योरेन्स कवर के ज़रिए परिवार की सुरक्षा भी जुड़ी है। भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2018 के अनुसार वर्तमान में भारत में लाईफ इंश्योरेन्स की पहुंच 3 फीसदी से भी कम है। जो अन्य विकासशील देशों की तुलना में बहुत कम है। 2018 मनी हैबिट्स सर्वेक्षण से भी कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए हैं जिसके अनुसार सर्वेक्षण किए गए 30 फीसदी मामलों के साथ व्यक्तिगत जीवन बीमा आज भी अनिश्चित स्थिति में है। भारत सरकार एवं बीमा उद्योग द्वारा लगातार जानकारी दिए जाने के बावजूद लोग नहीं समझ पाते कि उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा के लिए किस स्तर का इंश्योरेन्स लेना चाहिए। सर्वेक्षण किए गए 46 फीसदी भारतीयों को मानना है कि उनका जीवन बीमा उनकी सालाना आय का कम से कम 10 फीसदी होना चाहिए जबकि सिर्फ 29 फीसदी लोगों के पास ही ऐसा लाईफ कवर है।

 

-- भारतीयों के लिए जीवन बीमा अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फाइनेन्शियल साधन होता है। जीवन बीमा उनके जीवन के मुख्य लक्ष्यों में से एक हैं जिनमें घर बनाना (43 फीसदी), बच्चों की शिक्षा (38 फीसदी), सेवानिवृत्ति (49 फीसदी) और विरासत सृजन (50 फीसदी) शामिल हैं। बच्चों की शादी की योजना की बात करें तो वे जीवन बीमा के अलावा फिक्स्ड डिपोज़िट पर ध्यान देते हैं। 30 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें बिल्कुल जानकारी नहीं है कि उनके पास कितना लाईफ इंश्योरेन्स कवर होना चाहिए।

 

 

 

-- जहां एक ओर भारतीय लोग कमाने, बचत करने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर वे एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, 72 फीसदी लोगों ने अपनी वसीयत नहीं बनाई है। वसीयत का महत्व समझने के बावजूद वे ऐसा नहीं करते हैं। हैरानी की बात है कि 45 साल और अधिक उम्र में भी यह स्तर बेहद कम है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों में आज भी फाइनेंन्शियल मामलों के बारे में जागरुकता की कमी है।

 

     

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