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Mann Ki Baat में PM मोदी: प्‍लास्टिक पॉल्‍युशन कम करें, बचपन के खेलों को जिंदा रखने की जरूरत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 27 मई को 44वीं बार 'मन की बात' कार्यक्रम किया।

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नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 27 मई को 44वीं बार 'मन की बात' कार्यक्रम किया। इस दौरान उन्‍होंने नौ-सेना की 6 महिला कमांडरों की नाविका सागर परिक्रमा, भारतीय फिट इंडिया, खेल, पर्यावरण, योग आदि पर बात की। 

 

 

PM मोदी ने 250 से ज्‍यादा दिन     समुद्र के जरिए INSV तारिणी में पूरी दुनिया की सैर कर लौटीं नौ-सेना की 6 महिला कमांडरों को बधाई दी। उन्‍हांने इसे विश्‍व की ऐसी पहली घटना बताते हुए कहा कि इन महिला कमांडरों ने भारतीय नौसेना की प्रतिष्‍ठा बढ़ाने के साथ पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। 

 

एवरेस्‍ट फतह करने वालों को दी बधाई 

मन की बात के दौरान PM ने एडवेंचर को विकास का जनक करार दिया। उन्‍होंने कहा कि विकास एडवेंचर की गोद में ही जन्‍म लेता है। मानव जाति की विकास यात्रा देखें तो किसी-न-किसी एडवेंचर की वजह से ही हम प्रगति कर पाए। इस बीच उन्‍होंने महाराष्‍ट्र के चंद्रपुर के एक आश्रम-स्कूल के 5 आदिवासी बच्चों द्वारा एवरेस्‍ट की चढ़ाई किए जाने का भी जिक्र किया। पीएम ने मनीषा धुर्वे, प्रमेश आले, उमाकान्त मडवी, कविदास कातमोड़े, विकास सोयाम नाम के इन बच्‍चों को बधाई देते हुए कहा कि इन्‍होंने देश को गौरवान्वित किया है। इसके अलावा PM ने नेपाल की ओर से एवरेस्‍ट फतह करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला शिवांगी पाठक और को भी बधाई दी। पीएम ने युवाओं के साथ-साथ वृद्ध लोगों के मन में एडवेंचर के जज्‍बे की भी प्रशंसा की। साथ ही उन्‍होंने ‘स्वच्छ गंगा अभियान’ के तहत एवरेस्‍ट चढ़ने वाले BSF के एक ग्रुप का भी मन की बात में जिक्र किया और उनकी तारीफ की। यह ग्रुप एवरेस्‍ट से कूड़ा नीचे लेकर आया था। 

 

फिट इंडिया पहल का अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स 

PM ने फिट इंडिया पहल का भी जिक्र अपने संबोधन में किया। पीएम ने कहा कि इस पहल का रिस्‍पॉन्‍स बहुत ही अच्‍छा आया है और देश के हर क्षेत्र से लोग इसके सपोर्ट में सामने आए हैं। मैं मानता हूँ कि जितना हम खेलेंगे, उतना ही देश खेलेगा। फिल्‍म, खेल जगत की हस्तियां, देश के आम लोग, सेना के जवान, स्‍कूल टीचर हर कोई फिट इंडिया अभियान से जुड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्‍टन विराट कोहली द्वारा दिए गए चैलेंज पर पीएम ने कहा कि मुझे खुशी है कि कैप्‍टन कोहली ने मुझे फिट इंडिया चैलेंज दिया है। मैं मानता हूँ कि ये बहुत अच्छी चीज है और इस तरह का चैलेंज हमें फिट रखने और दूसरों को भी फिट रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

 

बचपन के पारंपरिक खेलों को खोने न दें 

PM ने कार्यक्रम के दौरान बचपन के पुराने आउटडोर और इनडोर गेम्‍स को जिंदा रखने की भी अपील की। उन्‍होंने कहा कि जो खेल कभी गली-गली, हर बच्चे के जीवन का हिस्सा होते थे, वे आज कम होते जा रहे हैं। पहले कभी भरी दोपहरी में, तो कभी रात में खाने के बाद बिना किसी चिंता के, बिल्कुल बेफिक्र होकर के बच्चे घंटो-घंटो तक खेला करते थे। कुछ खेल तो ऐसे भी हैं, जो पूरा परिवार साथ में खेला करता था। कंचे, खो-खो हो, लट्टू, गिल्ली-डंडा हर किसी के बचपन का हिस्सा हुआ करते थे। खेल हमें जीवन के मूल्य भी सिखाते हैं। लक्ष्य तय करना, दृढ़ता हासिल करना, टीम स्प्रिट, परस्पर सहयोग आदि खेलों से सीखा जा सकता है। इसलिए आज आवश्‍यकता है कि हमारे बचपन के पारंपरिक खेलों को खोने न दें। स्कूल, मौहल्ले, युवा-मंडल आगे आकर इन खेलों को बढ़ावा दें। 

 

पर्यावरण दिवस पर प्‍लास्टिक पॉल्‍युशन कम करने का उठाएं बीड़ा 

PM ने आने वाले पर्यावरण दिवस का भी जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि इस बार 5 जून को भारत आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस की अगुवाई करेगा। यह भारत के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस बार की थीम 'बीट प्‍लास्टिक पॉल्‍युशन' है। आगे कहा कि मैं सभी से अपील करता हूं कि इस थीम के महत्‍व को समझते हुए हम सब पॉलिथिन और लो ग्रेड प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल न करें और प्‍लास्टिक पॉल्‍युशन को कम करने की कोशिश करें। 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस को लेकर PM ने कहा कि मैं सभी देशवासियों से अपील करता हूँ कि वे योग की अपनी विरासत को आगे बढ़ाएं और एक स्वस्थ, खुशहाल और सद्भावपूर्ण राष्ट्र का निर्माण करें।

 

पंडित नेहरू और वीर सावरकर को किया याद 

PM ने कार्यक्रम के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहुरू और वीर सावरकर को भी याद किया। उन्‍होंने कहा कि आज 27 मई को पंडित नेहुरू की पु‍ण्‍यतिथि है। इस मौके पर मैं उन्‍हें नमन करता हूं। सावरकर को लेकर PM ने कहा कि 1857 में मई माह के दौरान ही भारतीयों ने पहली बार अंग्रेजों से लोहा लिया था और इसी माह में वीर सावरकर का जन्‍म हुआ था। वीर सावरकर को उनकी बहादुरी और ब्रिटिशराज के खिलाफ़ उनके संघर्ष के लिए जानते हैं लेकिन इन सबके अलावा वे एक ओज़स्वी कवि और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने हमेशा सद्भावना और एकता पर बल दिया।

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