Home » Economy » Policy2G स्पेक्ट्रम घोटाला - CBI ने ए राजा और कनिमोझी सहित 25 आरोपी बरी किये - Verdict on 2G Scam cases pronounced, all aquitted

2G केस: ए राजा, कनिमोझी समेत सभी आरोपी बरी, सिब्‍बल बोले- माफी मांगे पूर्व कैग विनोद राय

यूपीए-2 के कार्यकाल में हुए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्‍टर ए राजा, डीएमके सां

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नई दिल्ली. यूपीए-2 के कार्यकाल में हुए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्‍टर ए. राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी 35  आरोपियों को बरी कर दिया है। दो मामले सीबीआई के और एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) का था। फैसला सुनाते हुए स्‍पेशल कोर्ट के जज ओपी सैनी ने कहा, ''साक्ष्‍य उपलब्‍ध कराने में विपक्ष विफल रहा। पैसों का लेनदेन साबित नहीं हो सका इसलिए मैं सभी आरोपियों को बरी कर रहा हूं।'' फैसला सुनाए जाते समय राजा और कनिमोझी पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद थे। उधर, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह उनकी नैतिक जीत है। 2010 में कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) रहे विनोद राय की रिपोर्ट में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। 

 

 

खास बात यह है कि कोर्ट ने यह नहीं कहा कि घोटाला नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों के हिसाब से एजेंसियां सबूत पेश करने में नाकाम रहीं। सीबीआई और ED के सूत्रों की ओर से कहा गया है कि फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में बरी हुए सभी आरोपियों को 5-5 लाख रुपए का बेल बॉन्‍ड पेश करना होगा। ऐसा इसलिए किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यदि फैसले को चुनौती दी जाती है तो सभी आरोपी ऊपरी अपीलेट कोर्ट में उपस्थित रहे। कैग के अनुसार, स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी नहीं करने से सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। हालांकि सीबीआई ने नुकसान का आकलन 30,984 करोड़ रुपए किया है।  

 

 

फैसले के खिलाफ अपील करेगा ED

इन्‍फोर्समेंट डायरेक्‍टरेट (ईडी) 2जी मामले में स्‍पेशल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा। जांच एजेंसी 2जी स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन मनी लॉन्ड्रिंग केस में 19 लोगों को कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ यह अपील करेगी। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी कोर्ट के फैसले का अध्‍ययन करेगी और अपने साक्ष्‍यों और जांच के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। 

 

फैसले के बाद क्‍या बोले राजा, कनिमोझी? 

फैसले के बाद ए. राजा ने कहा कि वह इस फैसले से बहुत खुश हैं। वहीं, कनिमोझी ने कहा, ''पिछले साल साल मेरे लिए काफी मुश्किल भरे रहे। आप उस अपराध के लिए आरोपी ठहराए गए, जिसे आपने किया ही नहीं। यह मेरी पार्टी डीएमके के लिए बड़ी राहत है। इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्‍साह बढ़ेगा।'' वहीं, राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा, "किसी भी बड़े मुकदमे में वक्त लगता है लेकिन सच्चाई सामने आ गई। मुकदमा चला तो कोई एविडेंस नहीं दिया गया। क्रिमिनल कोर्ट की अप्रोच के हिसाब से ये मुकदमा नहीं बनता।''


देश से माफी मांगे विनोद राय: सिब्‍बल 

स्‍पेशल कोर्ट के फैसले के बाद कपिल सिब्बल ने कहा, "मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। मैं कभी अपने बयान से नहीं पलटता। हम बेबुनियाद बातें नहीं करते। ये सब बीजेपी करती है। तब विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। विनोद राय  को देश के सामने माफी मांगनी चाहिए।'' वहीं, चिदंबरम ने कहा, "कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि हमारी सरकार पर जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे साबित हुए।''

 

सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया

एस्‍सार ग्रुप के रवि रुई भी बरी हो गए हैं। एस्‍सार के स्‍पोक्‍सपर्सन का कहना है, ''हम इस फैसले के लिए सम्‍मानित कोर्ट के प्रति आभारी हैं। इस फैसले से हमारे पक्ष सही साबित हुआ और कोर्ट ने भी इसकी सराहना की।'' वहीं, स्वान टेलीकॉम के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित करने में नाकाम रहा। सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। लॉस दिखाया गया था लेकिन असल में कोई नुकसान हुआ ही नहीं। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

 

तीन मामलों पर हुई सुनवाई

1. सीबीआई ने पहला केस राजा, कनिमोझी, पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके चंदोलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के गौतम दोषी, सुरेंद्र पीपरा और हरि नायर पर दायर किया था। सीबीआई ने कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजी अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी को भी आरोपी बनाया था। इसमें सीबीआई ने 3 फर्म्स स्वान टेलीकॉम प्रा. लि., रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिकॉम वायरलेस (तमिलनाडु) लि. को भी केस में आरोपी बनाया।

2. सीबीआई के दूसरे मामले में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि-अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास श्राफ शामिल हैं। चार्जशीट में लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप इंडिया मोबाइल लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग लिमिटेड कंपनियां भी आरोपी थीं।

3. तीसरे मामले में ईडी ने अप्रैल 2014 में ए राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, विनोद गोयनका, करीम मोरानी और शरद कुमार समेत 19 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। ईडी ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल को भी शामिल किया था। आरोप था कि स्वान टेलीकॉम से 200 करोड़ डीएमक के कलाइगनार टीवी को दिए गए। ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।

 

6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था ट्रायल

2जी मामले में ट्रायल 6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था। सीबीआई द्वारा दायर किए गए इस मामले ने कोर्ट ने 17 आरोपियों के चार्ज तय किए थे। सीबीआई ने पहला केस राजा, कनिमोझी, पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके चंदोलिया, स्वान के टेलीकॉम प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के गौतसभी दोषी, सुरेंद्र पीपरा और हरि नायर पर दायर किया था। सीबीआई ने कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजी अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी को भी आरोपी बनाया था। बता दें कि सीबीआई ने 3 फर्म्स स्वान टेलीकॉम प्रा. लि., रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिकॉम वायरलेस (तमिलनाडु) लि. को भी केस में आरोपी बनाया है।

 

इस घोटाले मनमोहन सरकार को हिला दिया था 
यूपीए सरकार के दूसरे टेन्योर के दौरान 2जी घोटाले ने मनमोहन सिंह की सरकार को बुरी तरह हिला कर रख दिया था। कोर्ट ने इस घोटाले से जुड़े सभी आरोपियों को फैसला सुनाए जाते वक्त मौजूद रहने का आदेश दिया है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में स्पेशल सीबीआई के जज ओपी सैनी फैसला सुनाने वाले हैं।

 
आरोपियों के खिलाफ लगी हैं ये धाराएं 
30 अप्रैल 2011 को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में राजा और अन्य पर 30,984 करोड़ के नुकसान का आरोप लगाया। कोर्ट ने अक्टूबर 2011 में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत फेक फर्जी डॉक्युमेंट्स से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने का चार्ज लगाया।

 

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?
2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में आवंटित किए गए 2जी स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर इसे बांटा गया था। इससे सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान (रेवेन्‍यू लॉस) हुआ था। कैग का कहना था कि नीलामी के जरिए यदि यह स्‍पेक्‍ट्रम आवंटित किए जाते तो यह रकम सरकारी खजाने में जाती। 
इस आवंटत के तहत 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 टेलिकॉम कंपनियों को दिए गए सभी 122 लाइसेंस 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया।

दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। 
2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी। इस घोटाले से जुड़े केस में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रविकांत रुइया, अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम की प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास सराफ भी आरोपी हैं।

 

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