आयात की बजाय मेक इन इंडिया हो तो छोटे उद्योगों में पांच साल में एक करोड़ नौकरियां संभव

बढ़ती बेरोजगारी के बीच एक अच्छी खबर है। देश में अगले पांच साल में एक करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं, बशर्ते कि देश में कुछ वस्तुओं का आयात कम उनका उत्पादन किया जाए। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनआरआई कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस) ने यह अनुमान अपनी एक रिपोर्ट में जताया है।

money bhaskar

Apr 10,2019 01:12:00 PM IST

नई दिल्ली. बढ़ती बेरोजगारी के बीच एक अच्छी खबर है। देश में अगले पांच साल में एक करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं, बशर्ते कि देश में कुछ वस्तुओं का आयात कम उनका उत्पादन किया जाए। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनआरआई कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस) ने यह अनुमान अपनी एक रिपोर्ट में जताया है।

कृषि क्षेत्र से आने वाले लोगों को देना होगा रोजगार

रिपोर्ट के मुताबिक एमएसएमई सेक्टर में 4-5 साल में 75 लाख से एक करोड़ नौकरियां पैदा करने की ताकत है। इसमें कहा गया है कि आने वाले समय में देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी। रिपोर्ट सुझाव देती है कि कृषि क्षेत्र से आने वाले लोगों को रोजगार देना होगा और कामगारों की बढ़ती आबादी को भी नौकरी के अवसर देने होंगे।

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अकेले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 70 फीसदी नौकरियां


एमएसएमई मंत्रालय की 2017-18 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक यह क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विभिन्न क्लस्टर में करीब 3.6 करोड़ (70%) नौकरियों का योगदान करता है। इन क्लस्टर में आर्टिफिशियल ज्वैलरी, स्पोर्ट्स गुड्स, साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स, टैक्सटाइल मशीनरी, बिजली के पंखे, रबड़, प्लास्टिक, चमड़े और इससे बने उत्पाद आदि शामिल हैं। यदि इन क्षेत्रों में एमएसएमई के विकास पर पूरी तरह ध्यान दिया जाए तो और नौकरियां पैदा हो सकती हैं।

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