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सर्वे /मेट्रो सिटीज के 79% लोगों ने माना, डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ेगा रोजगार

  • चार महानगरों में यह सर्वेक्षण विवोकी इंडिया, रिसर्च एनालिटिक्स और नॉलेज प्रोसेसिंग स्टार्टअप द्वारा किया गया था।
  • सामाजिक सुरक्षा, बेहतर प्रशासन, GEM 3.0, डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण इंटरनेट भागीदारी पर 'डिजिटल इंडियंस' के विचारों को लेकर बात की गई

Moneybhaskar.com

Jun 10,2019 06:05:00 PM IST

नई दिल्ली। एक व्यक्ति जिन्होंने 'डिजिटल इंडिया' अभियान पर मुहर लगाने के साथ इस अभियान को लागू भी किया, उन्होंने एक बार फिर देश की राजनीति की बागडोर संभाल ली है। उनकी सरकार फिर से बनने के साथ ही डिजिटल स्पेस में चमत्कार होने की आशाओं ने भी गति पकड़ ली है। 79% लोगों का दृढ़ विश्वास है कि वर्तमान सरकार के अगले पांच साल के कार्यकाल के दौरान डिजिटल इंडिया सभी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाकर, बेरोजगारी को कम करने में महत्वलपूर्ण योगदान देगा। यह बात विवोकी इंडिया, रिसर्च एनालिटिक्स और नॉलेज प्रोसेसिंग स्टार्टअप द्वारा महानगरों में रहने वाले 5000 लोगों के बीच किये गये लेटेस्टर सर्वे में सामने आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किये गये आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) को ध्याान में रखते हुए यह आशा अभूतपूर्व है जिसमें रोजगार बाजार में चिंताजनक रुझानों को उजागर करते हुए कहा गया था कि शहर में नौकरी चाहने वालों युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। सर्वेक्षण में सबसे अधिक प्रतिक्रिया सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा के संबंध में आई क्योंकि 82% लोगों ने महसूस किया कि यह दोनों चार्ट में सबसे ऊपर होने चाहिएं।

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भारत ई-गवर्नेंस में दुनिया में 107 वें स्थान पर है


यह सर्वेक्षण डिजिटल इंडिया-युवा-वर्तमान सरकार की मांग और अपेक्षा को उजागर करने के लिए किया गया था। दीपा सयाल, कार्यकारी निदेशक, विवोकी इंडिया और निदेशक और सह-संस्थापक, एडीजी ऑनलाइन सॉल्यूशंस के अनुसार, "ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में सुधार लाने के अथक प्रयास किये जाने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नेंस इंडेक्स के अनुसार, भारत ई-गवर्नेंस में दुनिया में 107 वें स्थान पर है। स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और रोजगार, वाणिज्य, आदि से संबंधित क्षेत्रों में लोगों को सशक्त बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की शुरुआत की दिशा में पूर्व में अनेक पहल की गई हैं। हम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या और बेहतर ई-गवर्नेंस में स्पष्ट रूप से अंतर देख सकते हैं। फिर भी, भारत के कई हिस्सों में डिजिटल इल्लिटरेसी/निरक्षरता कायम है। ‘डिजिटल इंडिया’ तभी एक सफल होगा जब इसका लाभ भारत के प्रत्येक नागरिक को मिलेगा”।

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डिजिटल साक्षरता के माध्यम से रोजगार कम होने के डर को संभाला जा सकता है


इसके अलावा, 74% रेस्पोंडेंट (प्रतिक्रियादाताओं) का मानना है कि यदि वर्तमान सरकार डिजिटल साक्षरता के माध्यम से नागरिकों के सशक्तिकरण और डिजिटल स्किलसेट (कौशल) को सार्वभौमिक पहुंच (यूनिवर्सल एक्सेस) दिलाने का कार्य करती है तो रोजगार कम होने के डर को संभाला जा सकता है। डिजिटल इंडिया, भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने का कार्यक्रम है। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को 1 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। यह अभियान भारत सरकार की अन्य प्रमुख योजनाओं जैसे कि मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया और इस प्रकार की अनेक महत्व पूर्ण योजनाओं के लिए हिताधिकारी और लाभार्थी दोनों है। सत्तर प्रतिशत शहरी रेस्पोंडेंट(प्रतिक्रियादाता) को लगता है कि मौजूदा सरकार को भविष्य में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण इंटरनेट भागीदारी को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए।

रेस्पोंडेंट (प्रतिक्रियादाताओं) ने यह भी महसूस किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में GeM बाज़ार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), एक नेशनल पब्लिक प्रोक्योरमेंट प्लेबटफार्म (राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद मंच) के पहले पिछले साल के अगस्त के आंकड़ों से पता चलता है कि मंच पर $ 8.96 K (INR 6.16 लाख) से अधिक लेन-देन के माध्यम से, सकल मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में $ 1.45 Bn (INR 10,000 Cr) से अधिक है। 63% रेस्पोंडेंट (प्रतिक्रियादाताओं) का मानना था कि GEM ई-मार्केटप्लेस (GEM 3.0) बेंचमार्किंग को भारतीय अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए SMB और SME मार्केटप्लेस के लिए सरकार द्वारा बेहतर रूप से श्रेणीबद्व किया जाना चाहिए।

पीएम मोदी की डिजिटल इंडिया बनाने की सोच देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलने की है


प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया बनाने की सोच देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलने की है, लेकिन जब कैशलेस इकॉनोमी की बात आती है तो रेस्पोंडेंट (प्रतिक्रियादाता) के विचार अलग हो जाते हैं। जब पूछा गया कि 'क्या वर्तमान सरकार को समग्र CAGR में सुधार करने के लिए भारत की इकोनॉमी को कैशलेस बनाने की दिशा में काम करना चाहिए', तो केवल 53% रेस्पोंडेंट/प्रतिक्रियादाताओं ने कैशलेस इकॉनोमी का समर्थन किया जबकि 44% इसके खिलाफ थे। नई सरकार को इसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संबंध में टेली मेडिसिन और मोबाइल हेल्थकेयर सुविधाओं की प्रतिक्रिया भी उदासीन थी क्योंकि केवल 52% उत्तरदाताओं ने हाँ कहा और 38% ने 'नहीं' से सहमति जताई।


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