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नोटबंदी की भेंट चढ़े जीएसटी सहि‍त 5 इकोनॉमि‍क बि‍ल, नई नौकरि‍यों और ग्रोथ पर पड़ सकता है असर

 
नई दि‍ल्‍ली। एक महीने तक चला संसद का शीतकालीन सत्र बेहद कम कामकाज के साथ सि‍मट गया। आंकड़ों के हि‍साब से देखें तो बीते 15 सालों में यह सदन का सबसे कम कामकाजी सत्र रहा। लोकसभा के 92 घंटे और राज्‍यसभा के 86 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए। इकोनॉमि‍क रि‍फॉर्म से जुड़े कई महत्‍वपूर्ण बि‍ल पेश करने की सरकार की तैयारी थी, मगर वि‍पक्ष के वि‍रोध के चलते गाड़ी पटरी से उतरी रही। इनके समय से पारि‍त न होने के चलते नई नौकरि‍यों और इकोनॉमिक ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।  इन अहम बिलों को नहीं मिल पाया रास्‍ता  
 
 
- जीएसटी, वेतन के डि‍जि‍टल भुगतान, बंदरगाहों को आजादी देने सहि‍त कारोबार और कर्मचारी कल्‍याण से जुड़े बि‍लों को रास्‍ता ही नहीं मि‍ल पाया।
- जद्दोजहद के बीच सरकार केवल 10 बि‍लों को सदन के सामने रख पाई, जि‍नमें से केवल 4 पास हो पाए।
- पास होने वाले वि‍धेयकों में द टैक्‍सेशन लॉ ( अमेंडमेंट ) बि‍ल शामि‍ल है, जि‍समें प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के तहत अघोषि‍त आय की जानकारी देने का प्रावधान है।
- आइए देखते हैं लटके वि‍धेयकों में ऐसा क्‍या है जो आपसे और हमसे जुड़ता है और उनसे अर्थव्‍यवस्‍था को क्‍या फायदा होता। हालांकि‍ अब इनके लागू होने का नंबर अगले फाइनेंशि‍यल ईयर में ही आता दि‍ख रहा है।   
 
 
ड्राफ्ट जीएसटी(कॉम्‍पेनसेशन टू द स्‍टेट्स फॉर लॉस ऑफ रि‍वेन्‍यू)बि‍ल 2016
 
- राज्‍यों के नुकसान की भरपाई का प्रावधान
 
इस बि‍ल में जीएसटी लागू होने के चलते राज्‍यों को होने वाले नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। जि‍स दि‍न कोई राज्‍य जीएसटी को लागू करता है उस दि‍न से अगले पांच साल तक उस राज्‍य को मदद दी जाएगी। इन पांच सालों के दौरान कि‍सी राज्‍य के राजस्‍व में बढ़ोतरी की दर 14 फीसदी प्रतिवर्ष मानी जाएगी। कि‍सी राज्‍य को कि‍तना मुआवजा दि‍या जाना है इसकी मोटे तौर पर कैलकुलेशन हर ति‍माही के आखि‍र में की जाएगी। इसके बाद सालभर की कैलकुलेशन की जाएगी। राज्‍यों के नुकसान की भरपाई के लि‍ए कुछ सेवाओं और वस्‍तुओं की सप्‍लाई पर जीएसटी कॉम्‍पेंशन सेस लगाने की सि‍फारि‍श भी जीएसटी काउंसि‍ल द्वारा की गई है।
 
ड्राफ्ट आईजीएसटी लॉ 2016
 
- तय होगी केंद्र की कर दर
 
सेंट्रल ब्‍यूरो ऑफ एक्‍साइज एंड कस्‍टम ने मॉडल इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स बि‍ल (आईजीएसटी) को जारी कि‍या। इसमें केंद्र द्वारा आईजीएसटी लगाने का प्रावधान है। आईजीएसटी के टैक्‍स रेट की सि‍फारि‍श जीएसटी काउंसि‍ल करेगी और वह 28 फीसदी से ज्‍यादा नहीं होगा। केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत जो छूट दी गई हैं वो इसमें भी लागू होंगी। इसके तहत जुटाया गया कर केंद्र और संबंधि‍त राज्‍य के बीच बंटेगा।
 
रि‍वाइज्‍ड ड्राफ्ट मॉडल जीएसटी लॉ 2016
 
- टैक्‍स का दायरा बढ़ेगा
 
मॉडल सेंट्रल/स्‍टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स बि‍ल को सेंट्रल ब्‍यूरो ऑफ एक्‍साइज एंड कस्‍टम ने नवंबर 2016 में जारी कि‍या। यह बि‍ल केंद्र और राज्‍य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले जीएसएटी का प्रावधान करता है। इसमें टैक्‍स दर की सि‍फारि‍श जीएसटी काउंसि‍ल द्वारा की जानी है। हालांकि‍ टैक्‍स रेट 14 फीसदी से ज्‍यादा नहीं होगा। इसके अलावा मॉडल बि‍ल में टर्नओवर पर टैक्‍स का प्रावधान है। यह उन करदाताओं के लि‍ए होगा जि‍नका टर्नओवर 50 लाख से कम होगा। इसमें छूट के भी कुछ प्रावधान हैं जि‍नपर फैसला जीएसटी काउंसि‍ल को लेना है। इसमें एक खास प्रावधान ये भी है कि‍ माल और सेवाओं में जुटे हर उस शख्‍स को अपना रजि‍स्‍ट्रेशन करवाना होगा जि‍सका टर्नओवर 20 लाख से ऊपर है। इतना ही नहीं उसे हर उस राज्‍य में रजि‍स्‍ट्रेशन करवाना होगा, जि‍नमें वो बि‍जनेस करता है।
 
क्‍या है तीनों का स्‍टेटस
यह सरकार का बेहद महत्‍वाकांक्षी वि‍धेयक है मगर राज्‍यों की सहमि‍त न बन पाने के चलते यह लटका हुआ है। वि‍त्‍तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि‍ जीएसटी को 1 अप्रैल से लागू हो जाना चाहि‍ए। हालांकि‍ अभी भी इस बि‍ल का भवि‍ष्‍य साफ नहीं है।
 
आगे पढ़ें इन बि‍लों से मि‍लती इकोनॉमी को रफ्तार 
 
 
 

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