मनी भास्कर खास /परियोजनाओं को पूरा करने में देरी से पिछले पांच साल में 3.16 लाख करोड़ का नुकसान

  • एमएचआरडी मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेगी एनआईसीपीपी
  • नीति आयोग का प्रस्ताव

 

Moneybhaskar.com

Jun 06,2019 02:45:25 PM IST

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के पहले कार्यकाल के दौरान परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने में देरी की वजह से देश को लगभग 3,16,180.81 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस बात का खुलासा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में किया गया है जिसका जिक्र नीति आयोग ने भी अपनी हाल की एक रिपोर्ट में किया है। नीति आयोग ने यह रिपोर्ट परियोजनाओं को सही समय पर पूरा करने के संबंध में बनाई है जिसकी सिफारिशों पर सरकार आने वाले दिनों में अमल कर सकती है।

परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने में होने वाली देरी की वजह से इनकी लागत बढ़कर 21,33649.81 करोड़ रुपए हो गई

रिपोर्ट में अप्रैल, 2014 से लेकर दिसंबर, 2018 के दौरान 150 करोड़ या इससे ऊपर की लागत वाली परियोजनाओं का ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 1424 परियोजनाओं की लागू करने की मूल (ओरिजनल) लागत 18,17469.76 करोड़ थी, लेकिन परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने में होने वाली देरी की वजह से इनकी लागत बढ़कर 21,33649.81 करोड़ रुपए हो गई जो ओरिजनल लागत का 17.40 फीसदी है। मतलब यह हुआ कि अगर इन 1424 परियोजनाओं को उनके तय समय पर पूरा कर लिया गया होता तो 3,16,180.05 करोड़ रुपए की बचत होती। रिपोर्ट के मुताबिक इन 1424 परियोजनाओं में 384 परियोजनाएं ऐसी हैं जो अपने ओरिजनल निर्धारित समय से देरी से चल रही है। 69 परियोजनाएं ऐसी हैं जो अपने तय समय से काफी अधिक देरी से चल रही है। इन 69 परियोजनाओं में 16 मेगा प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी लागत 1000 करोड़ से अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक निर्धारित समय से देरी से चलने वाली परियोजनाओं में सबसे अधिक रोड ट्रांसपोर्ट एवं हाईवे की 112 परियोजनाएं हैं। इसके अलावा देरी से चलने वाली परियोजनाओं में रेलवे की 94, बिजली क्षेत्र की 56, पेट्रोलियम की 33, कोयले की 36, शहरी विकास की 23 तो स्टील की 9 मुख्य रूप से शामिल हैं।

एनआईसीपीपी मंत्रालय के साथ मिलकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए ग्रेजुएट लेवल का कोर्स तैयार करेगी

परियोजना को सही समय पर पूरा करने एवं देरी से होने वाले नुकसान से बचने के लिए नीति आयोग ने एक रिपोर्ट तैयार की है। नीति आयोग की रिपोर्ट में परियोजनाओं तय समय पर अमली जामा पहनाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड प्रोजेक्ट प्रोफेशनल (एनआईसीपीपी) नामक नोडल एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई है। यह नोडल एजेंसी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेगी। एनआईसीपीपी मंत्रालय के साथ मिलकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए ग्रेजुएट लेवल का कोर्स तैयार करेगी। एनआईसीपीपी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में थींक टैंक का भी काम करेगी। मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों की परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की मदद ली जाएगी।

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