Belt and Road /चीन के BRI प्रोजेक्ट पर वर्ल्ड बैंक ने उठाए सवाल, कहा- रिफॉर्म्स और ट्रांसपरेंसी है जरूरी

  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य एशिया से यूरोप और अफ्रीका जोड़ने वाली प्राचीन सिल्क रोड को पुनर्जीवित करना है

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 05:51:23 PM IST

वाशिंगटन. वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने कहा कि चीन के बेल्ड एंड रोड इनीशिएटिव (Belt and Road Initiative) यानी बीआरआई प्रोजेक्ट से दर्जनों विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिल सकता है और गरीबी दर में कमी आ सकती है। हालांकि उसने कहा कि यदि इसमें सुधार नहीं किए जाते हैं तो इससे पर्यावरण को नुकसान, कर्ज और भ्रष्टाचार जैसे जोखिम भी जुड़े हुए हैं।

समुद्र, सड़क, रेल प्रोजेक्ट्स पर अरबों डॉलर निवेश कर रहा है चीन

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य एशिया से यूरोप और अफ्रीका जोड़ने वाली प्राचीन सिल्क रोड को पुनर्जीवित करना है। इसके लिए चीन समुद्र, सड़क और रेल प्रोजेक्ट्स पर अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, जिसके लिए चीनी बैंक फंडिंग कर रहे हैं।

चीन पर लग रहे हैं दुनिया पर प्रभाव बढ़ाने के आरोप

हालांकि आलोचकों का कहना है कि 6 साल पुराने बीआरआई प्रोजेक्ट के माध्यम से चीन दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है और यह चीनी कंपनियों के पक्ष में डील्स हासिल करने की उसकी चाल है। इससे न सिर्फ देश चीनी कर्ज के जाल में फंस जाएंगे, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान होगा।

रिफॉर्म्स के बिना प्रोजेक्ट से जुड़े हैं भ्रष्टाचार जैसे जोखिम

वर्ल्ड बैंक की ‘बेल्ट एंड रोड इकोनॉमिक्स’ रिपोर्ट में कहा गया कि इस प्रोजेक्ट से ‘ट्रेड, विदेशी निवेश और लोगों की जीवन शैली में सुधार की संभावना है’, लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब चीन और इससे जुड़े देश पारदर्शिता बढ़ाने के लिए रिफॉर्म्स पर काम करते हैं। अन्यथा पर्यावरण को लेकर मुकदमेबाजी और भ्रष्टाचार के जोखिम बढ़ेंगे।

असमान ट्रेड पड़ेगा भारी

वर्ल्ड बैंक की वाइस प्रेसिडेंट सेला पजारबासिओग्लू के मुताबिक, इससे ट्रेड तेजी से बढ़ेगा लेकिन रूट में शामिल अर्थव्यवस्थाओं के बीच असमान ट्रेड होता है तो इससे ‘संभावित फायदे बड़े जोखिम’ के साथ आएंगे। इस रिपोर्ट में अनुमान है कि बीआरआई से भागीदार देशों के लिए ट्रेड 2.8 फीसदी से 9.7 फीसदी तक और दुनिया के लिए इसमें 1.7 फीसदी से 6.2 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।

एक-चौथाई देशों पर है भारी कर्ज

हालांकि स्टडी में सामने आया कि इससे जुड़े एक-चौथाई देश भारी कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ भारी जोखिम भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि इनसे भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।
यही वजह है कि अमेरिका, भारत और कुछ यूरोपीय देश इस प्रोजेक्ट को संदेह की नजर से देख रहे हैं।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.