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क्लिंटन फेलोशिप के लिए जुटाए गए 3 लाख डॉलर, भारतीयों के आएंगे काम

AIF की वेबसाइट पर उपलब्‍ध जानकारी के मुताबिक, AIF भारत में 31 लाख से ज्‍यादा लोगों की जिंदगी बदल रही है।

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वाशिंगटन. अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) ने भारत में अपनी विलियम जे क्लिंटन फेलोशिप को सहयोग देने के लिए 3 लाख डॉलर जुटाए हैं। फंड जुटाने के लिए वाशिंगटन के मैरीलैंड में एक आयोजन किया गया था। इसमें अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सरना समेत कई अन्‍य लोगों ने भाग लिया। 
 
क्‍या करती है यह फेलोशिप 
AIF ने बयान में कहा कि विलियम जे क्लिंटन फेलोशिप के सर्विस प्रोग्राम के तहत अमेरिका के युवा प्रोफेशनल्‍स को शिक्षा, रोजगार, टेक्‍नोलॉजी और पब्लिक हेल्‍थ के क्षेत्रों में डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट्स पर भारत में 10 महीने काम करने का मौका मिलता है। यह फेलोशिप लीडर्स की नई जनरेशन को निर्मित करने में मदद करती है, जो सोशल और इकोनॉमिक बदलाव लाने में मदद कर सके। इसके तहत युवा प्रोफेशनल्‍स स्‍केलेबिलिटी के महत्‍वपूर्ण वक्‍त में ऑर्गेनाइजेशंस को सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और स्किल शेयरिंग के जरिए मदद करते हैं।   
 
31 लाख से ज्‍यादा भारतीयों की बदली जिंदगी 
AIF क्लिंटन फेलोशिप डेवलपमेंट सेक्‍टर को मजबूत कर और आने वाले सकारात्‍मक सोशल बदलाव के लिए लीडर्स की अगली जनरेशन को तैयार कर अमेरिका और भारत के रिश्‍तों को और मजबूत बना रही है। इसके फेलो और उनके सहयोग वाले ऑर्गेनाइजेशंस भारत में विकास से वंचित समुदायों को सशक्‍त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। AIF की वेबसाइट पर उपलब्‍ध जानकारी के मुताबिक, AIF भारत में 31 लाख से ज्‍यादा लोगों की जिंदगी बदल रही है। 
 
कब हुआ था AIF का गठन 
2001 में गुजरात में आए भूकंप के बाद पैदा हुए हालात को देखते हुए तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक ऐसे सहयोगात्‍म प्‍लेटफॉर्म की जरूरत महसूस की। इसी दिशा में फिर AIF क्लिंटन फेलोशिप की शुरुआत हुई। 
 
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