व्यापार /चीन और अमेरिका के बीच फिर से ट्रेड वार शुरू, भारतीय कारोबारियों को अमेरिका से व्यापार बढ़ाने का और अधिक मौका

  • भारतीय निर्यातकों का मानना है कि इससे अमेरिका में होने वाले भारतीय निर्यात में इजाफा होगा।

Money Bhaskar

May 06,2019 12:45:00 PM IST

मनी भास्कर। नई दिल्ली

दुनिया के दो दिग्गज देशों के बीच फिर से ट्रेड वार शुरू हो गया है। लेकिन इस ट्रेड वार को भारतीय कारोबारियों के लिए एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय निर्यातकों का मानना है कि इससे अमेरिका में होने वाले भारतीय निर्यात में इजाफा होगा। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से अमेरिका में आने वाले 200 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अमेरिका टैरिफ दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने जा रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा है कि जल्द ही चीन से अमेरिका में आने वाले 325 अरब डॉलर के सामान पर भी लगने वाली टैरिफ दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा।

भारत को होगा फायदा

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के पूर्व अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने मनी भास्कर को बताया कि अमेरिका एवं चीन के बीच होने वाली इस कारोबारी लड़ाई से निश्चित रूप से भारत को फायदा होने जा रहा है। क्योंकि अमेरिका के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश भारत ही है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच चलने वाले ट्रेड वार की वजह से ही भारत से अमेरिका होने वाले निर्यात में पिछले महीने 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रल्हन ने बताया कि अमेरिका चीन के साथ अपने व्यापार संतुलन को ठीक कर रहा है और इसके तहत ही अमेरिका इस प्रकार के फैसले ले रहा है।

चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट कम करना चाहते हैं ट्रंप

पिछले साल से दोनों देशों ने एक-दूसरे से किए जाने वाले आयात पर शुल्क लगाया था। इस ट्रेड वॉर से दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने के बाद दोनों देश के नेताओं ने दिसंबर में तय किया कि इस ट्रेड वॉर को खत्म किया जाए। ट्रंप का कहना है कि वे चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करना चाहते हैं। 2018 में दोनों देशों के बीच ट्रेड डेफिसिट 378.73 अरब डॉलर था। ट्रंप ने जिनपिंग के सामने शर्त रखी है कि अमेरिकी सामान के लिए चीनी बाजार को खोला जाए और चीन अमेरिकी कंपनियों को अपनी तकनीक शेयर करने के लिए मजबूर करना बंद करे।

भारत के लिए फायदेमंद रहा है चीन-अमेरिका का ट्रेड वॉर

भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले 10 साल से चला आ रहा है। मतलब चीन ज्यादा मात्रा में भारत को वस्तुएं निर्यात करता था, जबकि भारत उस मात्र में चीन को प्रोडक्ट एक्सपोर्ट नहीं कर पाता था। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के बाद से चीन ने जरूरी वस्तुओं के निर्यात के लिए अमेरिका की बजाय भारत का रुख किया है। मौजूदा वक्त में भारत ने चीन के साथ अपने ट्रेड डेफिसिट (चालू खाता घाटा) को कम कर लिया है, जो कि करीब एक दशक के बाद संभव हो सका है। 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत का चीन को एक्सपोर्ट 31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17 बिलियन डॉलर पहुंच गया। हालांकि अभी भी भारत और चीन के बीच करीब 53 बिलियन डॉलर ट्रेड डेफिसिट है, जिसमें 10 बिलियन डॉलर की कटौती हुई है।

चीन को एक्पोर्ट होने वाली वस्तुएं

चीन ने अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के बाद भारत के लिए अपना बाजार खोला है। साथ ही नियमों को उदार बनाय है। इसके चलते भारत बासमती चावस और सोयाबीन तेल की चीन में बिक्री का रास्ता साफ हो सका है। साथ ही भारत से चीन को शुगर, अंगूर, रॉ कॉटन, फॉर्मास्यूटिकल, फिश मील, फिश ऑयल, मीट, तंबाकू और प्लास्टिक रॉ मैटेरियल का एक्सपोर्ट किया जा सका है। इनमें से सोयाबीन मील, अनार, केला और मकाई जैसे आइटम की फरवरी-अप्रैल माह के एक्पोर्ट में 346 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह लगातार दूसरा साल है, जब नई दिल्ली से चीन को भेजे जाने वाले शिपमेंट में लगातार दूसरे साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। भारत ने चीन से आयात में कमी की है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले साल भारत का राजकोषीय घाटा कम हुआ है, जो 76 बिलियन डॉलर से कम होकर 70 बिलियन डॉलर हो गया है।

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