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    भारत से ज्‍यादा खुश हैं पाकिस्‍तानी, हैप्पीनेस रिपोर्ट में नार्वे नंबर वन

    भारत से ज्‍यादा खुश हैं पाकिस्‍तानी, हैप्पीनेस रिपोर्ट में नार्वे नंबर वन
    नई दिल्ली. यूनाइटेड नेशंस की वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट 2017 में नॉर्वे को दुनिया का सबसे खुश देश माना गया है। पिछले साल यह चौथे स्‍‍थान पर था। इस बार यह डेनमार्क को पीछे छोड़ नंबर वन बन गया है। वहीं, 155 देशों की लिस्ट में चीन 79वें, पाकिस्तान 80वें और भारत 122वें नंबर पर है। इस सूची के अनुसार भारतीयों से ज्यादा पाकिस्तानी खुश रहते हैं। पिछली बार भारत इस लिस्ट में 118वें नंबर पर था। इस बार वह रैंक में चार पायदान और पीछे हो गया है।
     
    क्या हैं हैप्पीनेस के मायने?
     
    वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2017 तैयार करने वाले सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन नेटवर्क (SDSN) के डायरेक्टर जैफरी एस. ने कहा कि खुश देश वो हैं जहां खुशहाली, सोसायटी में आपसी भरोसा, लोगों के बीच बराबरी और सरकार पर भरोसा ज्यादा है और इन सभी के बीच अच्छा बैलेंस है। इस सालाना रिपोर्ट का मकसद सरकारों और सिविल सोसायटी को खुशहाली के बेहतर तरीके बताना हैं।
     
    किन 6 पैमानों पर आंका गया?
     
    देशों के हैप्पीनेस इंडेक्स को वहां प्रति व्यक्ति जीडीपी, अच्छी लाइफ एक्सपेंटेंसी, फ्रीडम, सोशल सपोर्ट, उदारता और सरकार या बिजनेस में जीरो करप्शन के पैमाने पर आंका गया।
     
    नॉर्वे कैसे बना नंबर 1?
     
    2012 से हर साल आ रही इस रिपोर्ट में 2016 में डेनमार्क नंबर वन और नॉर्वे नंबर 4 पर था। इस बार वह नंबर-1 हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्वे ने अपने देश में तेल की कम कीमतों के बावजूद नंबर-1 रैंक हासिल की है। यह देश सिर्फ ऑयल वैल्थ के चलते सबसे ज्यादा हैप्पी नहीं है। वह ऑयल को काफी धीरे-धीरे प्रोड्यूस कर रहा है। मौजूदा दौर की बजाय फ्यूचर की चीजों पर ज्यादा इन्वेस्ट कर रहा है।
     
     
    सूची में देशों की रैंकिंग
     
    1 नॉर्वे
    2 डेनमार्क
    3 आईसलैंड
    4 स्विट्जरलैंड
    5 फिनलैंड
    6 नीदरलैंड
    7 कैनेडा
    8 न्यूजीलैंड
    9 ऑस्ट्रेलिया
    10 स्वीडन
    79 चीन
    80 पाकिस्तान
    122 भारत
     
    चीन और अमेरिका के लोग अब उतने खुश नहीं
     
    रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में 25 साल पहले लोग सबसे ज्यादा खुश थे। 1990 से 2005 के बीच चीन के लोगों में हैप्पिनेस में कमी आई है। इसकी वजह यह है कि यहां बेरोजगारी बढ़ी है। सरकार का सोशल सेफ्टी फंड कम हुआ है और सरकार के बकायादार बढ़े हैं। वहीं 2007 में ऑयल प्रोड्यूसिंग देशों के हैप्पीनेस इंडेक्स में यूएसए तीसरी रैंक पर था। इस साल वह 14वीं रैंक पर है।
     

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