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हेग में भारत की बड़ी जीत, दलवीर भंडारी एक बार फिर चुने गए ICJ जज

भंडारी दूसरी बार ICJ के जज चुने गए हैं।

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संयुक्‍त राष्‍ट्र. भारत के दलवीर भंडारी एक बार फिर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में जज चुने गए हैं। लंबी चुनावी प्रक्रिया के बाद भंडारी के प्रतिद्वंदी ब्रिटेन के क्रिस्‍टोफर ग्रीनवुड ने अपनी दावेदारी वापस ले ली, जिससे भंडारी के जज बनने का रास्‍ता साफ हो गया। भ्ंडारी दूसरी बार ICJ के जज चुने गए हैं। वह ICJ में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले भारत के जस्टिस नगेन्‍द्र सिंह भी दो बार ICJ में जज रहे चुके हैं। 

 

कैसे होता है ICJ​ में चुनाव 
ICJ में 15 जजों की बेंच होती है, जिनमें से 5 को हर तीन साल पर नौ सालों की अवधि के लिए चुना जाता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र ने 5 में से 4 जजों को चुन लिया था और बचे हुए एक स्‍थान के लिए भंडारी और ग्रीनवुड के बीच कड़ा मुकाबला था। न्‍यूयार्क में स्थि‍त संयुक्‍त राष्‍ट्र के हेडक्‍वार्टर में भंडारी को जनरल असेंबली में 183-193 और सिक्‍योरिटी काउंसिल में 15 वोट हासिल हुए। 11 राउंड तक चले इलेक्‍शन तक ग्रीनवुड, भंडारी को कड़ी टक्‍कर दे रहे थे लेकिन 12वें राउंड के शुरू होने से पहले संभावित हार को देखते हुए ग्रीनवुड ने अपनी दावेदारी वापस ले ली।  

 

71 सालों में पहली बार ICJ में नहीं होगा ब्रिटिश जज 
ICJ​ का गठन 1945 में हुआ था। ICJ की जिम्‍मेदारी राष्‍ट्रों द्वारा इसमें दर्ज कराए गए कानूनी मसलों को अंतरराष्‍ट्रीय कानून के अनुरूप हल करने की है। 71 सालों में पहली बार ऐसा होगा, जब ICJ में ब्रिटेन का कोई जज नहीं होगा। जस्टिस भंडारी के ICJ में एक बार फिर चुने जाने पर विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने ट्वीट कर खुशी जाहिर की। उन्‍होंने ट्वीट किया, 'वंदेमातरम। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत चुनाव जीत गया है। जय हिंद।' 

 

पहली बार कब जज बने थे भंडारी
- भंडारी ICJ में पहली बार 2012 में जज बने थे। उनका कार्यकाल 18 फरवरी को पूरा हो रहा है।
- पाकिस्‍तान में कैद भारतीय कुलभूषण जाधव को फांसी से बचाने में भंडारी की अहम भूमिका थी। उन्होंने 2008 के भारत-पाक समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि पाक ने ह्यूमन राइट्स का उल्‍लंघन किया है।  
- इसके अलावा भी वह समुद्री विवादों, अंटार्कटिका में हत्या, नरसंहार के अपराध, महाद्वीपीय शेल्फ के परिसीमन, न्यूक्लियर डिसार्मामेंट (परमाणु निरस्त्रीकरण), टेरर फाइनेसिंग, वॉयलेशन ऑफ यूनिवर्सल राइट्स जैसे केसों में अहम भूमिका निभा चुके हैं। 

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