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15 रुपए के निवेश को बना दिया 5.4 करोड़, अब डूबने का है खतरा

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के सेंट्रल बैक क्रिप्‍टो करंसी को मान्‍याता देने के मूड में नहीं हैं...

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नई दिल्‍ली. हाल के कुछ साल के दौरान क्रिप्‍टोकरंसी को लेकर लोगों का रुझान तेजी के साथ बढ़ा है।  इसका सबसे बड़ा कारण है इस करंसी में निवेश पर मिलने वाला लाखों गुना का मुनाफा है। क्रिप्‍टोकरंसी आम तौर पर वर्चुअल या डिजिटल करंसी है। बिटक्‍वॉइन और इथर इसके 2 सबसे बड़े उदाहरण है। हालांकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब भी इसे मान्‍यता देने से पीछे हट रहे हैं। भारत सरकार ने भी इस करंसी को अवैध घोषित कर रखा है। सरकार और आरबीआई दोंनों की ओर से बिटक्‍वॉइन को लेकर बयान आ चुका है। 

 

ब्‍लूमबर्ग में छपे एक कॉलम की मानें तो यह कंरसी अब भी अपने लिए भविष्‍य की बेहतर जमीन नहीं तैयार कर पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के द्वारा अब भी क्रिप्‍टोकरंसी से दूरी बनाई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक दरअसल अब भी इसे लेकर आशंकित हैं और उन्‍हें अपनी बदनामी का डर सता रहा है। दअरसल कोई भी करंसी लेने देन का काम करती है, लेकिन क्रिप्‍टोकरंसी में लेनदेन कम और ट्रेडिंग ही ज्‍यादा हो रही है। पूरे सिनारियो को देखते हुए यह सवाल अब भी बना हुआ है कि बिना दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के यह करंसी भविष्‍य में कितने दिनों तक खुद को बचा पाएगी। इसके भविष्‍य को लेकर सवाल जारी है।     

 

आगे पढ़ें- 15 रुपए को बनाया 5.4 करोड़ 

 

 

 

15 रुपए बन गए 5.4 करोड़ 
 जिस क्रिप्‍टोकरंसी ने दुनिया भर में धूम मचाई उसमें बिटक्‍वॉइन का नाम सबसे आगे आता है। 7 साल पहले जब बिटक्‍वॉइन लॉन्‍च हुआ था, जब यह 15 पैसे का था। मौजूदा समय में यह 5.4 लाख रुपए के भाव में ट्रेड हो रहा है। मतलब अगर 7 साल पहले किसी ने बिटक्‍वॉइन में 15 रुपए का भी निवेश किया होता तो आज वह 5.4 करोड़ रुपए का मालिक होता। भारत में भी जिन लोगों ने बिटक्वॉइन में निवेश किया था, उन्हें जमकर मुनाफा हुआ है। मौजूदा समय में बिटक्‍वॉइन ऑल टाइम हाई पर है। वहीं एक और क्रिप्‍टोकरंसी ईथर क बात करें कि तो हाल में इसने बिटक्‍वॉइन को भी वैल्‍यू के मामले में पीछे छोड़ दिया था। 

अमीरों में इसे खरीदने की होड़

सबसे महंगे करंसी की बात करें तो यह डॉलर और पाउंड से आगे है। खास बात यह है कि दुनिया भर के अमीरों में इसे खरीदने की होड़ रहती है। इसका नाम है बिटक्वाइन। यह डिजिटल करंसी है जो लोगों को बिना क्रेडिट, क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता या अन्य थर्ड पार्टी के सामान और सेवाओं को खरीदने और मुद्रा का आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है। बिटकॉइन से होने वाले कुल व्यापार में 40 प्रतिशत हिस्सा जापान का है।

सरकार का कोई नियंत्रण नहीं​ 

यह एक ऐसी करंसी है, जिस पर किसी देश की सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। रुपए या डॉलर की तरह इसकी छपाई नहीं की जाती। इसकी कंप्यूटर के जरिए खोज की जाती है। एक पहेली को ऑनलाइन हल करने से बिटक्वाइन मिलते हैं, साथ ही पैसे देकर भी इसे खरीद जा सकता है।

न्यूज एजेंसी में छपी हाल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजाना ढाई हजार से ज्यादा लोग बिटक्वॉइन में पैसा लगा रहे हैं। ऐसा रिजर्व बैंक की चेतावनी के बाद भी हो रहा है। बिटक्वॉइन डिजिटल करेंसी का प्लेटफॉर्म है। ऐप आधारित घरेलू बिटक्वॉइन एक्सचेंज जेबपे के अनुसार एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम पर इसे डाउनलोड करने वालों की संख्या 5 लाख पहुंच गई है।

फंड ट्रांसफर, इंटरनेट पर सीधे लेनदेन में इस्तेमाल

फंड ट्रांसफर, इंटरनेट पर सीधे लेनदेन, सामान खरीदने और गैरकानूनी खरीद-बिक्री में इसका इस्तेमाल होता है।  हालांकि, इसको लेकर सवाल भी खड़े होते रहे हैं, जैसे- इसके दाम में अक्सर उतार-चढ़ाव दिखता रहा है। बिटक्वाइन करंसी किसी सेंट्रल बैंक के कंट्रोल में नहीं है और बिटक्वाइन का सौदा किससे हुआ ये पता लगा पाना मुश्किल है।

सरकार को इस बात का डर

सरकार को इस बात का डर भारत में कुछ ऑपरेटर बिटक्वाइन ऑनलाइन मुहैया करा रहे हैं। विनिमय सेवा, रुपए या किसी अन्य मुद्रा के बदले बिटक्वाइन की पेशकश की जाती है। डिजिटल मुद्रा 'बिटक्वाइन' की बढ़ती लोकप्रियता ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है। सरकार ने वर्चुअल करंसी को लेकर एक कमिटी का गठन भी कर चुकी है। नियामक यह भी आशंका जता रहे हैं कि धोखाधड़ी करने वाले लोग बिटक्वाइन का दुरुपयोग कर भोले-भाले निवेशकों को 'ई-पोंजी' स्कीमों में धन लगाने का लालच दे सकते हैं। जिससे लोगों को पैसे डूब सकते हैं। साथ ही डिजिटल वर्ल्ड में फिरौती का नया मॉडल भी खड़ा हो सकता है। जिसे बिना रेग्युलेशन के संभालना मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि रैनसमवेयर के जरिए दुनिया भर में हुए साइबर अटैक के बाद फिरौती भी बिटक्वॉइन में मांगी गई थी।

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