भारतीय आईटी कंपनियों पर दिखा ट्रम्प इफेक्ट, H1-B वीजा अप्‍लीकेशन में की कटौती

Moneybhaskar

Apr 22,2017 01:50:00 PM IST
नई दिल्‍ली. भारतीय आईटी कंपनियों की ओर से H1-B वीजा अप्‍लीकेशन में भारी कटौती देखने को मिली है। इसे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प की ओर से H1-B वीजा के खिलाफ जारी मुहिम के असर के तौर पर देखा जा रहा है। राष्‍ट्रपति ट्रम्‍प लगातार H1-B वीजा से जुड़े नियमों को कड़ा करने की बात करते रह हैं। उन्‍होंने हाल में H1-B वीजा के नियमों को कड़े करने संबधित एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर भी दस्‍तखत कर दिए हैं। इन्‍फोसिस ने दीं सिर्फ 1 हजार अप्‍लीकेशन....
- समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत की दूसरे सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्‍फोसिस की ओर से दींं जाने वाली H1-B वीजा अप्‍लीकेशन में भारी कमी देखने को मिली है।
- आईटी सेक्टर से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने इस साल सिर्फ H1-B वीजा के सिर्फ 1 हजार अप्‍लीकेशन ही दिए हैं। पिछले कुछ सालों की तुलना में यह बेहद कम है।
- सूत्रों के मुताबिक, इन्‍फोसिस ने 2016 में 6500 वीजा के अप्‍लीकेशन दिए थे, जबकि 2015 में यह संख्‍या 9000 हजार थी।
- हालांकि अन्‍य कंपनियों ने डाटा शेयर करने से इनकार कर दिया, लेकिन इन्‍फोसिस के डाटा से साफ जाहिर होता है कि भारतीय कंपनियों के H1-B वीजा अप्‍लीकेशन में भारी कमी आई है।
इन्‍फोसिस बढ़ाएगी लोकल अमेरिकन्‍स की भर्ती
- वीजा की दिक्‍कतों के बाद इन्फोसिस ने तय किया है कि वह अमेरिका में ज्यादा से ज्यादा लोकल लोगों की भर्ती करेगी।
- यही नहीं उन्हें वहीं ट्रेनिंग देने का इंतजाम भी किया जाएगा।
- हालांकि, लोकल लोगों की भर्ती से भारतीय कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्‍ट बढ़ती है।
लगातार सख्‍त हो रहा अमेरिका का रुख
- H1-B वीजा को लेकर अमेरिका का रुख लगातार सख्‍त हो रहा है
- अमेरिकी संसद में H1-B वीजा धारकों का न्‍यूनतम वेतन 60 हजार डॉलर से बढ़ाकर 1.3 लाख डॉलर का प्रस्‍ताव पेश हो चुका है।
- साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने कोडर्स और प्रोग्रामर्स को H1-B वीजा वीजा नहीं देने का फैसला किया है।
- बता दें कि इन दोनों कामों के लिए भारतीय आईटी पेशेवर सबसे जयादा अमेरिका जाते हैं।
- साथ ही ट्रम्‍न ने H1-B वीजा से जुड़े एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर भी सिग्‍नेचर किए हैं।
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