Home »Economy »International» India May Appeal In WTO Against H1B Visa Changes Says Sources

यूएस में एच-1बी वीजा पॉलिसी बदलने पर WTO जा सकता है भारत

नई दिल्ली. अमेरिका में एच1बी वीजा नॉर्म्‍स में बदलाव के खिलाफ भारत WTO  में गुहार लगा सकता है। न्‍यूज एजेंसी कोजेंसिस के अनुसार, सरकार अमेरिका में वीजा नॉर्म्‍स में हो रहे बदलाव पर नजर रहे हुए है। सूत्रों के अनुसार, एच1बी वीजा पॉलिसी में बदलाव होता है तो भारत इसके खिलाफ डब्‍ल्‍यूटीओ में अपील कर सकता है।
 
इससे पहले, अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प ने बुधवार को H-1B वीजा से जुड़े एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर दस्‍तखत कर दिए। भारतीय IT कंपनियों और पेशेवरों के बीच H-1B  सबसे ज्‍यादा पॉपुलर है। माना जा रहा है कि ट्रम्‍प की सिग्‍नेचर के बाद अमेरिका में H-1B  वीजा से जुड़े नियम सख्‍त हो सकते हैं। ट्रम्‍प ने ‘बाई अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ मुहिम के तहत यह कदम उठाया है।  
 
H1B वीजा नॉर्म्‍स में बदलने से हो सकती हैं छंटनी
- इंडस्‍ट्री बॉडी एसोचैम का कहना है कि अमेरिका में वीजा नॉर्म्‍स में सख्ती से भारतीय कंपनियों में छंटनी की नौबत आ सकती है। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटर जगत में 86 फीसदी एच-1बी वीजा भारतीयों को जारी होता रहा है। अब यह 60 फीसदी या उससे भी कम हो सकता है। 
- एसोचैम के जनरल सेक्रेटरी डीएस रावत ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में छंटनी की संभावना है। आईटी इंडस्‍ट्री के टॉप संगठनों तथा सरकार को असामान्य हालात से निपटने के लिए एक ज्‍वाइंट स्‍ट्रैटजी पर काम करने की जरूरत है।’’
- ‘‘पिछले तीन महीनों में, भारतीय करेंसी डॉलर के मुकाबले पांच फीसदी मजबूत हुई है, जिसके कारण निर्यात संबंधित अन्य क्षेत्रों के अलावा सॉफ्टवेयर निर्यात से होने वाले राजस्व में भी कमी आई है।’’
 
इमिग्रेशन सिस्‍टम में खोट, अब बंद होगा: ट्रम्‍प
- एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर साइन करने से पहले अमेरिका के विस्‍कोंसिन में लोगों को संबोधित करते हुए ट्रम्‍प ने कहा कि हमारे इमिग्रेशन सिस्‍टम में एक बड़ी खोट है। थोड़े से कम पैसों के लिए हमारी कंपनियां अमेरिकी कामगारों की जगह विदेशी कामगारों की भर्ती कर ले रही हैं। इस खोट को अब बंद किया जाएगा।
- ट्रम्‍प ने कहा कि मौजूदा समय में लॉटरी सिस्‍टम के तहत सिलेक्‍टेड लोगों को H-1B वीजा दिया जाता है, जो पूरी तरह से गलत है। इसकी जगह टॉप स्किल्‍ड और हाइयस्‍ट पेड अप्‍लीकेंट्स को यह वीजा दिया जाना चाहिए। ट्रम्‍प के मुताबिक, अगर बराबरी का बर्ताव हो तो अमेरिकी कामगारों के सामने कोई भी नहीं टिक सकता है।
- ट्रम्‍प के मुताबिक, अमेरिका में सबसे पहले कोई जॉब किसी अमेरिकी नागरिक हो ऑफर होनी चाहिए और उसके बाद किसी का नंबर आना चाहिए।   
 
रेमिटेंस में आएगी कमी
- वीजा नॉर्म्‍स सख्‍त होने से अमेरिका में भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) में कमी होगी, जिससे भुगतान संतुलन को नुकसान पहुंचेगा।
- वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में सऊदी अरब के बाद सबसे अधिक रेमिटेंस अमेरिका से ही आया। यह 10.96 अरब डॉलर था जो कुल रेमिटेंस का 16 फीसदी था। हालांकि, नए ऑर्डर को पूरी तरह लागू होने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि इसके लिए कई रूल्स बदलने पड़ेंगे।
 
 भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के पास क्‍या होगा ऑप्‍शन
- भारतीय आउटसोर्सिग कंपनियों के पास विकल्‍प के तौर पर अपने प्‍लांट को अमेरिका के निकट स्थापित करना, स्थानीय अमेरिकियों को नौकरी देना और वर्चुअल माध्यम से काम करने की छूट देना शामिल है, जो क्लाउड सर्विसेज को व्यापक तौर पर स्वीकार करने से आसान हो गया है।
- भारतीय कंपनियां एल1ए या ईबी5 वीजा के लिए एप्लीकेशन दे सकती हैं। एल1 वीजा के तहत मैनेजर, एक्जीक्यूटिव या विशेष नॉलेज कैटेगरी वाले विदेशी कर्मचारी को कुछ वक्त के लिए अमेरिका ट्रांसफर किया जा सकता है।
- हाल के दिनों में भारत से ईबी5 वीजा के लिए एप्लीकेशन बढ़ी हैं। यह महंगा पड़ता है। एप्लीकेशन देने वाले को टार्गेटेड एंप्लॉयमेंट एरिया (टीईए) में 5 लाख डॉलर या नॉन-टीईए में 10 लाख डॉलर निवेश करना पड़ता है। निवेश से कम से कम 10 लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए।
- अब एक्सपर्ट्स को ही अब विशेषज्ञ की जरूरत वाले काम के लिए ही एच1बी वीजा लिया जा सकता है। उन्हें कम से कम 1.3 लाख डॉलर (84.5 लाख रु.) सालाना देना होगा। अभी तक न्यूनतम वेतन 60 हजार डॉलर (39 लाख रु.) था।
 
जेटलीUS के सामने उठाएंगे मुद्दा
- फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली बुधवार रात को 5 दिवसीय यूएस दौरे के लिए रवाना हो गए।
- जेटली ने कहा कि आईटी इंडस्‍ट्री और इससे जुड़े मुद्दे यूएस अथॉरिटीज के सामने उठाने लायक हैं। इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
- जेटली ने इंडियन आईटी इंडस्‍ट्री ने इस बदलाव को लेकर चिंता जाहिर की है। यह वीजा प्रोग्राम ज्‍यादातर शॉर्ट टर्म के लिए डोमेस्टिक वर्कर्स द्वारा इस्‍तेमाल किया जाता है।
- जेटली अमेरिका में वर्ल्‍ड बैंक और आईएमएफ की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्‍सा लेंगे। इसके अलावा वह जी20 नेशंस के प्रतिनिधियों की बैठक में भी शामिल होंगे। वॉशिंगटन और न्‍यूयॉर्क में वह अमेरिकी सीईओ के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात करेंगे।

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