• Home
  • India slips 21 slots on WEF Gender Gap index

ग्‍लोबल जेंडर गैप इंडेक्‍स में भारत 21 पायदान फिसला, इकोनॉमी में महिलाओं की कम हिस्‍सेदारी रही वजह

WEF ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं के इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन को लेकर है। WEF ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं के इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन को लेकर है।

इस गिरावट की वजह इंडियन इकोनॉमी में महिलाओं की कम हिस्‍सेदारी और कम वेतन रहा। इस इंडेक्‍स में भारत बांग्‍लादेश और चीन से भी पीछे है। बांग्‍लादेश की रैंकिंग जहां 47वीं है, वहीं चीन 100वें पायदान पर है। 2006 में जब WEF ने जेंडर गैप को मापना शुरू किया था, उस वक्‍त भारत की रैंकिंग 2017 की रैंकिंग से 10 पायदान ऊपर थी।

money bhaskar

Nov 02,2017 03:25:00 PM IST
जेनेवा/नई दिल्‍ली. वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के ग्‍लोबल जेंडर गैप इंडेक्‍स में भारत की रैंकिंग 21 पायदान फिसल गई है। अब भारत 108वें नंबर पर आ गया है। इस गिरावट की वजह इंडियन इकोनॉमी में महिलाओं की कम हिस्‍सेदारी और कम वेतन रहा। इस इंडेक्‍स में भारत बांग्‍लादेश और चीन से भी पीछे है। बांग्‍लादेश की रैंकिंग जहां 47वीं है, वहीं चीन 100वें पायदान पर है। 2006 में जब WEF ने जेंडर गैप को मापना शुरू किया था, उस वक्‍त भारत की रैंकिंग 2017 की रैंकिंग से 10 पायदान ऊपर थी।

जेंडर इक्‍वलिटी में लगेंगे अभी और 100 साल

WEF हेल्‍थ, एजुकेशन, वर्कप्‍लेस और पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन के आधार पर जेंडर गैप मापता है। इस साल पहली बार पूरे विश्‍व में जेंडर गैप बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले एक दशक से जेंडर गैप के मामले में स्थिति धीरे-धीरे ही सही ले‍किन सुधर रही थी लेकिन 2017 में इस सुधार को झटका लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल ग्‍लोबल जेंडर गैप मामूली रूप से घटकर 68 फीसदी दर्ज किया गया, जबकि 2016 में यह 68.3 फीसदी थी। इस आधार पर ग्‍लोबली जेंडर्स इक्वलिटी में अभी 100 साल लगेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्कप्‍लेस पर जेंडर डिवाइडेशन के मामले में स्थिति और खराब है, वहां समानता स्‍थापित होने में अभी लगभग 217 साल लगेंगे।

आइसलैंड रहा पहले पायदान पर

इंडेक्‍स में भले ही भारत की रैंकिंग फिसली हो लेकिन इस साल सभी 144 देशों में से आधे देशों ने अपने यहां जेंडर गैप के मामले में बेहतरी दर्ज की है। ग्‍लोबल जेंडर गैप इंडेक्‍स में सबसे पहले पायदान पर आइसलैंड है। वहां हेल्‍थ, एजुकेशन, वर्कप्‍लेस और पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन में 100 पुरुषों पर 88 महिलाएं हैं। आइसलैंड पिछले 9 सालों में विश्‍व का सबसे बड़ा जेंडर इक्‍वल देश बन गया है। इंडेक्‍स के अन्‍य टॉप 10 देशों में नॉर्वे दूसरे स्‍थान पर, फिनलैंड तीसरे, रवांडा चौथे, स्‍वीडन पांचवें, निकारागुआ छठे, स्‍लोवेनिया सातवें, आयरलैंड आठवें, न्‍यूजीलैंड नौवें और फिलीपीन्‍स 10वें स्‍थान पर हैं।

महिलाओं का इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन है सबसे बड़ी चुनौती

WEF ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं के इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन को लेकर है। महिलाओं को मिलने वाले अवसरों में भारत की रैंकिंग 139वीं है, वहीं हेल्‍थ व सर्वाइवल आधार पर रैंकिंग 141वीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इंडेक्‍स में भारत की पोजिशन में आई गिरावट पॉलिटिकल इंपावरमेंट, हेल्‍दी लाइफ एक्‍सपेंटेंसी और बुनियादी शिक्षा के मोर्चे पर जेंडर गैप बढ़ने की वजह से भी है। लेजिसलेटर्स, सीनियर अधिकारियों, मैनेजर्स और प्रोफेशनल व टेक्निकल वर्कर्स के मोर्चे पर महिलाओं की हिस्‍सेदारी की स्थिति दर्शाती है कि इकोनॉमिक अपॉर्च्‍युनिटी और पार्टिसिपेशन में बराबरी हासिल करने में अभी और कोशिशों की जरूरत है। भारत के मामले में पॉजिटिव बात यह है कि प्राइमरी व सेकेंडरी एजुकेशन इनरॉलमेंट के मामले में जेंडर गैप लगातार दूसरी साल पूरी तरह खत्‍म दर्ज किया गया, वहीं टर्शियरी (तृतीयक) एजुकेशन में जेंडर गैप पहली बार लगभग खत्‍म दर्ज किया गया। हालांकि हेल्‍थ व सर्वाइवल में भारत की रैंकिंग अभी भी फोर्थ लोअेस्‍ट दर्ज की गई।
X
WEF ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं के इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन को लेकर है।WEF ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं के इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन को लेकर है।

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.