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WTO बैठक /भारत ने US पर साधा निशाना, कहा-कुछ देशों के कारण WTO का डिसप्यूट सिस्टम हुआ ठप

  • भारत ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संरक्षणवादी नीतियों पर किया तगड़ा हमला
  • भारत ने WTO के 22 सदस्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के पहले दिन उठाया मामला 

moneybhaskar

May 13,2019 02:42:27 PM IST

नई दिल्ली. भारत ने डब्ल्यूटीओ (WTO) मीटिंग में बिना नाम लिए अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संरक्षणवादी नीतियों पर तगड़ा हमला किया। भारत ने कहा कि डब्ल्यूटीओ (WTO) के डिसप्यूट सेटलमेंट सिस्टम के ठप होने और कुछ विकसित देशों द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे रिफॉर्म के एजेंड से विकासशील देशों के हितों को नुकसान हो सकता है। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 22 सदस्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के पहले दिन यह मामला उठाया।

वैश्विक व्यापार के लिए पैदा हुईं चुनौतियां

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान ने कहा कि एकतरफा कदमों और कुछ देशों द्वारा जवाबी कदमों के कारण बहुपक्षीय नियमों पर आधारित व्यापार प्रणाली के अस्तित्व के लिए चुनौतियां पैदा हो गई हैं। इसके अलावा प्रमुख विषयों पर बातचीत में अवरोध और डब्ल्यूटीओ की अपीली बॉडी में सदस्यों की नियुक्ति में गतिरोध से कई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
एक आधिकारिक बयान में सचिव के हवाले से कहा गया, ‘अपीली बॉडी में इस तरह के गतिरोध से डब्ल्यूटीओ के डिसप्यूट सेटलमेंट मैकेनिज्म और संगठन के कामकाज के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा हो गई है।’

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भारत ने संरक्षणवादी उपायों पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि संरक्षणवादी उपायों के बढ़ने से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य लगातार बिगड़ रहा है और यह ‘स्थिति विकासशील के साथ ही अल्प विकसित देशों (एलडीसी) के लिए अच्छी नहीं है।’ वाधवान ने कहा कि एलडीसी देश और भारत जैसे विकासशील देशों को डब्ल्यूटीओ की अपीली बॉडी में सदस्यों की नियुक्ति में गतिरोध का ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा, जो ट्रेड डिसप्यूट सेटलमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा है।

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अपीली बॉडी में सदस्यों की नियुक्ति को बाधित कर रहा अमेरिका

उन्होंने कहा, ‘व्यवस्था को बचाने के लिए सकारात्मक रुख अपनाना और समस्या का रचनात्मक समाधान पेश करना बेहद जरूरी हो गया है।’ अपीली बॉडी में सदस्यों की नियुक्ति में देरी से उसके कामकाज पर असर पड़ेगा। अमेरिका ने इन सदस्यों की नियुक्ति को बाधित कर दिया है। इस बॉडी के कामकाज के लिए जरूरी न्यूनतम कोरम (3) 10 दिसंबर को खत्म हो जाएगा, जिसके बाद यह बॉडी पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूटीओ के हालात में सुधार बेहद जरूरी हो गया है, जिसमें इन दिनों व्यापक असंतुलन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, ‘रिफॉर्म के एजेंडे से विकासशील देशों की चिंताओं का हल नहीं निकलता है।’

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