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ट्रेड वार /चीन के बाद अमेरिका के निशाने पर भारत, 23 मई के बाद आयात शुल्क से छूट हटाने की धमकी

money bhaskar

May 08,2019 01:30:18 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली

अमेरिका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वार की आंच भारत तक भी पहुंचने वाली है। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने साफ कहा कि उन्हें भारत में हो रहे लोकसभा चुनाव के 23 मई को आने वाले परिणाम इंतजार है। इसके बाद गठित होने वाली भारत की नई सरकार ने यदि अमेरिका की मांग नहीं मानी तो वह भी इंडिया को सामान्य तरजीही दर्जा या जनरलाइज प्रिफरेंस सिस्टम (जीएसपी) के तहत मिली छूट को खत्म कर देंगे। भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर इसका सीधा असर होगा।

भारत दौरे पर आए अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने कहा कि अमेरिका इस महीने के अंत तक जीएसपी पर फैसला ले लेगा। रॉस ने कहा कि भारत अमेरिकी की वाजिब मांगाें को भी नहीं मान रहा है। ऐसे में अमेरिका को सख्त कदम उठाने होंगे। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। दो महीने पहले भारत को जीएसपी खत्म करने का नोटिस भी अमेरिका ने दिया था लेकिन चुनाव की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया था। चीन पर भी ऐसी ही कार्रवाई कर अमेरिका ने चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ा दिया है।




अमेरिका की यह है दो प्रमुख मांग

  1. अमेरिका चाहता है कि उसे भी भारत में ज्यादा कारोबार के मौके मिलें। इसके लिए वह भारत से जीएसपी की तर्ज पर अपने लिए भी आयात शुल्क में छूट चाहता है। रॉस ने भारत पर यह भी आरोप लगाया कि भारत ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, कृषि उत्पाद और शराब जैसे सामानों पर बहुत अधिक आयात शुल्क लगाता है। इससे अमेरिकी व्यवसायों को भारत में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। रॉस के मुताबिक भारत की औसत लागू टैरिफ दर 13.8 प्रतिशत है और यह किसी भी प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा है। भारत में ऑटोमोबाइल पर 60 प्रतिशत टैरिफ है, जबकि अमेरिका में 2.5 प्रतिशत है। मोटरसाइकिल पर 50 और मादक पेय पर 150 प्रतिशत तक टैरिफ दर है। कृषि उत्पादों पर अविश्वसनीय रूप से औसत 113.5 प्रतिशत और कुछ में 300 प्रतिशत तक है। अमेरिका इन दरों को कम करना चाहता है।

  1. अमेरिकन कंपनियां अमेजन, उबर, फेसबुक व गूगल के हितों की रक्षा भी करना चाहता है। अमेजन के लिए अमेरिका भारत से ई कामर्स के नियम बदलने का दवाब डाल रहा है। भारत ने ई कामर्स कंपनियों के लिए नए नियमों में देशी कंपनियों को बढ़ावा देने की नीति रखी है। इसी तरह फेसबुक और गूगल की मांग डेटा को भारत की बजाय अमेरिका में रखने की है। उनका तर्क है कि भारत में डेटा रखने से सर्विसेस महंगी हो जाएगी।

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अमेरिकी मांग मानने से हमें यह नुकसान

  1. अमेरिका की पहली मांग यानी आयात शुल्क को कमी करने की बात भारत मानता है तो कृषि क्षेत्र में गंभीर असर पड़ेगा। कृषि उत्पादों की कीमत गिरने पर किसानों को नुकसान होगा। इसी तरह मोटरसाइिक आदि सामानों के आयात शुल्क में कमी करने से भारत का मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित होगा।

  2. अमेरिका ऐसे कृषि उत्पाद भारत को निर्यात करना चाहता है जिससे कि सांस्कृतिक गतिरोध उत्पन्न हो सकता है। अमेरिका में गाय को मांसाहारी चारा दिया जाता है। इससे बने उत्पाद को भारत में भेजने से लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा।

  3. डेटा को भारत में ही सुरक्षित करने की शर्त दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है। कोई भी घटना होने पर यह कंपनियां डेटा देने पर हाथ खड़े कर देती हैं। पेमेंट गेटवे पर भारत सरकार का नियम है कि कंपनियों को डेटा भारत में ही सुरक्षित रखना होगा। जबकि अमेरिकन कंपनी इसके लिए तैयार नहीं है।


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चीन पर की गई इस कार्रवाई का डर दिखा रहा है अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से अमेरिका में आने वाले 200 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अमेरिका टैरिफ दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने जा रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा है कि जल्द ही चीन से अमेरिका में आने वाले 325 अरब डॉलर के सामान पर भी लगने वाली टैरिफ दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा।

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जीएसपी खत्म होने से भारत को यह नुकसान

GSP यानी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज। अमेरिका ने GSP की शुरुआत 1976 में विकासशील में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए की थी। इसके तहत चुनिंदा गुड्स के ड्यूटी-फ्री या मामूली टैरिफ पर इम्पोर्ट की अनुमति दी जाती है। GSP के तहत केमिकल्स और इंजिनियरिंग जैसे सेक्टरों के करीब 1900 भारतीय प्रॉडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में ड्यूटी फ्री पहुंच हासिल है।भारत ने 2017-18 में अमेरिका को 48 अरब डॉलर (3,39,811 करोड़ रुपये) मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया था। इनमें से सिर्फ 5.6 अरब डॉलर यानी करीब 39,645 करोड़ रुपये का निर्यात GSP रूट के जरिए हुआ। इससे भारत को सालाना 19 करोड़ डॉलर (करीब 1,345 करोड़ रुपये) का ड्यूटी बेनिफिट मिलता है। जो कि अब खत्म हो जाएगा। जीएसपी के तहत मुख्य तौर पर ऐनिमल हस्बैंड्री, मीट, मछली और हस्तशिल्प जैसे कृषि उत्पादों को शामिल किया गया है। इन उत्पादों को आम तौर पर विकासशील देशों के उत्पाद के तौर पर देखा जाता है।

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