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    H1B वीजाः US सीनेट में पेश हुए 6 और बिल, भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को लगेगा झटका

    H1B वीजाः US सीनेट में पेश हुए 6 और बिल, भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को लगेगा झटका
     
    वाशिंगटन.डोनाल्ड ट्रंप सरकार भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को तगड़ा झटका देने की तैयारी में है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने एच-1बी वीजा सुधारों पर गंभीरता से विचार के बीच यूएस हाउस ऑफ रिप्रिजेंटेटिव्स और सीनेट के भीतर कम से कम 6 बिल पेश किए हैं, जिनमें दलील दी गई है कि भारतीय आईटी कंपनियों के बीच लोकप्रिय एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी नौकरियां खा रहा है।
     
     
    डेमोक्रेटिक-रिपब्लिकन मेंबर्स ने रखे ये बिल
     
    ये बिल डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पक्षों के मेंबर्स ने रखे हैं। इनका मानना है कि एच-1बी वर्किंग वीजा अमेरिकी कामगारों को नौकरियों से बेदखल करने वाला है।
    कई स्कॉलर्स, इकोनॉमिस्ट और सिलिकन वैली के एग्जीक्यूटिव्स ने इस दलील के विपरीत राय दी है, लेकिन ये बिल इस पर आधारित हैं कि भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियां अमेरिकी नौकरियां खा रही हैं।
     
     
    पेश हो चुका है वीजा सुधार बिल
     
     
    डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद एक सप्ताह के भीतर रिपब्लिकन सीनेटर चक ग्रैसले और सीनेट में अल्पमत पक्ष के सहायक नेता डिक डर्बिन ने एच-1बी एवं एल-1 वीजा सुधार बिल पेश किया था, ताकि अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता दी जाए और कुशल कामगारों के लिए वीजा कार्यक्रम में निष्पक्षता बहाल की जाए। ग्रैसले सीनेट की न्यायपालिका समिति के प्रमुख हैं।
     
    लॉटरी सिस्टम खत्म करने का प्रस्ताव
     
    एच-1बी सुधार विधेयक में लॉटरी व्यवस्था को खत्म करने और अमेरिका में शिक्षा हासिल करने वाले विदेशी छात्रों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव दिया गया है।
    डेमोक्रेट जोए लोफग्रेन ने द हाई-स्किल्ड इंटीग्रिटी एंड फेयरनेस ऐक्ट-2017 नामक विधेयक पेश किया है। इस बिल में एच-1बी वीजा धारकों के लिए न्यूनतम वेतन 1.30 लाख डॉलर रखने का प्रस्ताव दिया गया है। कुछ अन्य सीनेरटर्स ने भी एच-1बी वीजा कार्यक्रम से संबंधित विधेयक पेश किए हैं।
     
    मिडिल लेवल के कामगार नहीं,पीएचडी होल्डर चाहता है अमेरिका
     
    अमेरिका एक सीनियर सीनेटर ने कहा कि है कि एच-1बी वर्किंग वीजा और रोजगार आधारित कैटेगरीज अक्सर अपने उद्देश्य के अनुकूल नहीं होतीं, क्योंकि इनसे यहां पीएचडी होल्डर और कंप्यूटर वैज्ञानिक नहीं बल्कि सिर्फ मिडिल लेवल के वर्कर आते हैं। अरकांसस से रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ लोगों को नहीं लाती है। ऐसे में इसमें सुधार की जरूरत है और ट्रंप इसी की योजना बना रहे हैं।
     

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