बड़ा दांव /चीन को टक्कर देने की तैयारी में भारत और जापान, श्रीलंका में बना सकते हैं पोर्ट

भारत, जापान और श्रीलंका मिलकर वहां की राजधानी कोलंबो के एक व्यस्त पोर्ट के विकास की संभावनाएं खंगाल रहे हैं

चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव से जुड़ा निवेश श्रीलंका में बन गया था बड़ा चुनावी मुद्दा 

moneybhaskar

May 22,2019 12:34:29 PM IST

टोक्यो/नई दिल्ली. भारत ने श्रीलंका में चीन को टक्कर देने के लिए बड़ा दांव चला है। दरअसल भारत, जापान और श्रीलंका मिलकर वहां की राजधानी कोलंबो के एक व्यस्त पोर्ट के विकास की संभावनाएं खंगाल रहे हैं। यह प्रोजेक्ट इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (Belt and Road Initiative) से जुड़े निवेश को लेकर श्रीलंका की राजनीति में विवाद छिड़े हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर चीन पर श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाने के आरोप भी लगे थे।

तीनों देश कर सकते हैं समझौता

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले महीनों में तीनों देश पोर्ट ऑफ कोलंबो में ईस्ट कंटेनर टर्मिनल के निर्माण के लिए एक समझौता कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट होने के बाद टर्मिनल के लिए भारत और जापान निवेश करेंगे और सस्ता कर्ज मुहैया कराएंगे।

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भारत-जापान को मिल सकती है 49 फीसदी हिस्सेदारी

इस प्रोजेक्ट में श्रीलंका के पास 51 फीसदी हिस्सेदारी होगी और बाकी 49 फीसदी हिस्सेदारी भारत और जापान के पास रहेगी। सूत्रों ने कहा कि श्रीलंका के दक्षिणी हिस्से में चीन के स्वामित्व वाले हंबनटोटा पोर्ट की तुलना में यह वेंचर व्यावसायिक तौर पर व्यावहारिक होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि इसे चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के जवाब के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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जापान ने साधी चुप्पी

जापान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता नात्सुको सकाता ने कहा कि जापान ने 1980 के दशक से ही पोर्ट ऑफ कोलंबो के विकास के लिए सहयोग किया था। उन्होंने ईमेल से जारी बयान में कहा, ‘अभी तक पोर्ट ऑफ कोलंबो के संबंध में नए सहयोग पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।’ जापान पहले से ही अपनी ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटजी’ के अंतर्गत बड़ी भूमिका निभाने पर काम करता रहा है।

भारत को पार्टनर बनाना चाहता है श्रीलंका

इस संबंध में श्रीलंका के पोर्ट मिनिस्टर सगाला रत्नायका और पोर्ट्स अथॉरिटी चेयरमैन की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालांकि रत्नायका ने दो महीने संसद को बताया था कि पोर्ट्स अथॉरिटी कोलंबो पोर्ट के ईस्ट टर्मिनल के लिए क्रेनों की खरीद कर रही है। उन्होंने कहा था, ‘उनका देश ज्यादा शिपिंग लाइंस को आकर्षित करने की कोशिशें कर रहा है, जिनमें विशेष रूप से इंडस्ट्री के बड़े जहाज ऑपरेट करने वाली शिपिंग लाइन्स पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।’ उन्होंने उस समय संभावित पार्टनर के तौर पर भारत के नाम का उल्लेख किया था। श्रीलंका ने हंबनटोटा के खाली एयरपोर्ट में निवेश के लिए भी भारत से संपर्क किया था।

 

विवादों में आया चीनी निवेश

वहीं चीन के 1 लाख करोड़ डॉलर के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव में शामिल होने वाले देशों में श्रीलंका भी शामिल था। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से चीन की अपने ट्रेड और इकोनॉमिक संबंधों को मजबूत बनाने की योजना है। हालांकि चीन का श्रीलंका में यह निवेश खासा विवादित हो गया था और श्रीलंका की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया था। इसके चलते चीन पर श्रीलंका को कर्ज के जल में फंसाने के आरोप भी लगे। श्रीलंका के अलावा मालदीव, पाकिस्तान सहित कई देशों में चीन का कर्ज वहां की सरकरों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया है।

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