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वि‍रेधि‍यों को दबाने के लि‍ए इंटरनेट को कंट्रोल कर रहे हैं पुति‍न

आलोचकों को दबाने के लि‍ए पुतिन सरकार आतंकवाद के खि‍‍‍‍‍‍लाफ लड़ाई का सहारा ले रही है।

Kremlin cracking down on internet to muzzle critics say experts
मोस्‍को, व्लादिमीर पुतिन सरकार का चौथा कार्यकाल शुरू होते ही अधिकारियों ने लोकप्रिय वेबसाइटों पर आतंकवाद के खि‍‍‍‍‍‍लाफ लड़ाई को और तेज करने की बात कहनी शुरू कर दी है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इसका असली मकसद आलोचकों को दबाना है। 
 
कहा जा रहा है कि‍ राष्‍ट्रपति‍ पुतिन ने जीत के एक महीने बाद ही एस मैसेंजर साइट को बंद कर दि‍या। जो कि‍ 2012 में उनकी जीत के बाद शुरू हुई थी। इस टेलि‍ग्राम नाम की मैसेंजर साइट को रूसी डेवलपर्स ने स्‍पेशि‍यली रूसी अधि‍कारि‍यों के लि‍ए बनाया था। बता दें कि‍ इस मैसेंजर ऐप से करीब 20 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। यह भी कहा जाता है कि‍ 2000 के दशक में अपने कार्यकाल के शुरू होने के साथ ही पुति‍न ने धीरे धीरे मेन मीडि‍या उसमें भी टीवी मीडि‍या को सरकारी कब्‍जे में ले लि‍या है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूसी सरकार ने इंटरनेट को अपने वर्चस्व के लिए एक प्रमुख खतरा मानती है। यह तब हुआ जब खासकर पुतिन ने प्रधानमंत्री के रूप में 2012 में चार साल बाद वापसी की। 
 
एग्जेन्टुरा आरयू के चीफ एडि‍टर एंड्रे सोल्डटोव ने कहा कि‍ रूसी सरकार डर गई है। ऐसे में उन्‍होंने इंटरनेट की फ्रीडम पर प्रति‍बंध लगा दि‍या है। इतना ही नहीं सरकार ने एक सुरक्षा सेवा एजेंसी को भी निगरानी के काम में लगाया है। 
 
2012 में रूस ने चाइल्‍ड पोर्नोग्राफी और ड्रग वेबसाइट्स को बैन कर दि‍या। इसके अलावा कुछ चरमपंथी वेबसाइट्स को भी सरकार ने बैन कि‍या था। सरकार की ओर से कहा गया था कि‍ ऐसा इसलि‍ए कि‍या जा रहा है कि‍ बच्‍चों पर पड़ने वाले इनके गलत प्रभाव से बचाया जा सके। 
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