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शी जिनपिंग दूसरी बार बने चीन के प्रेसिडेंट, संसद ने लगाई मुहर

बीजिंग. शी जिनपिंग दूसरी बार पांच साल के लिए चीन के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। इस प्रस्ताव पर चीन की पार्लियामेंट ने शनिवार को मुहर लगा दी है। जिनपिंग सबसे ताकतवर मानी जाने वाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के भी प्रमुख होंगे। सीएमसी, चीनी मिलिट्री की टॉप कमांड है। 11 मार्च को चीन की संसद ने संविधान से उस नियम को हटा दिया, जिसके तहत कोई भी शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति रह सकता है। इसके साथ ही जिनपिंग जब तक चाहें तब तक देश के राष्ट्रपति रह सकते हैं।


जिनपिंग की बढ़ी ताकत
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 2023 में जिनपिंग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) से रिटायर होंगे। शी 2013 में प्रेसिडेंट बने थे।
एनपीसी ने जिनपिंग के करीबी वांग किशान को उपराष्ट्रपति घोषित किया है। कुल मिलाकर पूरी सत्ता जिनपिंग के हाथों में केंद्रित हो गई है। प्रधानमंत्री ली केकियांग को बरकरार रखा गया है, लेकिन पूरी कैबिनेट समेत सेंट्रल बैंक का गवर्नर बदला जाएगा।


भारत पर क्या पड़ेगा असर
माना जा रहा है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी को स्टेट काउंसलर की भूमिका मिल सकती है। लिहाजा वे देश के टॉप डिप्लोमैट बन सकते हैं और भारत-चीन सीमा विवाद में अहम किरदार निभा सकते हैं।
फिलहाल भारत के लिए चीन के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव यांग जीईची हैं। अब उन्हें सीपीसी के पोलित ब्यूरो में भेजा गया है।

 

माओ के बाद दूसरे सबसे ताकतवर नेता बने जिनपिंग
जिनपिंग 2013 में पहली बार चीन के राष्ट्रपति चुने गए थे। पिछले साल हुई सीपीसी की बैठक में उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुना गया। उनका दूसरा कार्यकाल 2023 तक चलेगा। इसके अलावा बैठक में जिनपिंग को दूसरी बार पार्टी प्रमुख भी चुना गया था। कांग्रेस ने उनके विचारों को संविधान में शामिल करने का फैसला किया था।
राष्ट्रपति के लिए 2 कार्यकाल की सीमा खत्म होने के बाद जिनपिंग अब माओत्से तुंग के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता बन गए हैं।

 

चीन में कब बना था दो कार्यकाल का नियम
चीन में राष्ट्रपति डेंग जियाओ पिंग ने 1982 में एक विधेयक पेश किया था। इसके तहत अगला कोई भी राष्ट्रपति दो बार से ज्यादा इस पद पर नहीं रह सकता था। माना जाता है कि जाओपिंग ने ये कदम माओ के 1966-76 के कार्यकाल की वजह से लिया था। इस दौरान चीन में हुई सांस्कृतिक क्रांति में लाखों लोगों की जान गई थी।

 

तीसरी बार भी राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं जिनपिंग
पिछले साल अक्टूबर में जिनपिंग के खास 69 साल के वांग किशान ने पार्टी की स्टेंडिंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था। चीन में 70 साल की उम्र के बाद अधिकारी अपने पद पर नहीं रह सकते। चीन में 70 साल की उम्र के बाद अधिकारी अपने पद पर नहीं रह सकते। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद इसी साल उन्हें संसद प्रतिनिधि बनाया गया। अब किशान को उपराष्ट्रपति बनाया गया है।
चीन में पार्टी अध्यक्ष का रोल राष्ट्रपति से भी ज्यादा बड़ा माना जाता है और जिनपिंग को पार्टी में जल्द ही वो स्थान दिया जा सकता है। जिससे 2023 में राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वो चीन के सबसे ताकतवर शख्स बने रह सकते हैं।

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