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इकोनॉमी पर भारी पड़ेगा सरकार-RBI के बीच टकराव, S&P ने दी वार्निंग

S&P आरबीआई गवर्नर पद से उर्जित पटेल के हाल में हुए इस्तीफे को नकारात्मक रूप से देखती है।

Govt tussle with RBI could undermine financial stability: S&P

 

सिंगापुर. भारत सरकार और रिजर्व बैंक (RBI) के बीच टकराव की स्थिति देश पर भारी पड़ सकती है। सरकार की तरफ से आरबीआई पर लगातार बन रहे दबाव से देश में बीते कुछ साल से हो रही बैंकिंग सिस्टम में सुधार के साथ ही लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल स्टैब्लिटी की कोशिशों को तगड़ा झटका लग सकता है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) ने सोमवार को अपनी एक रिपोर्ट में ये बातें कहीं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स आरबीआई गवर्नर पद से उर्जित पटेल के हाल में हुए इस्तीफे को नकारात्मक रूप से देखती है।

 

 

आरबीआई की अगली बोर्ड मीटिंग पर नजर

आरबीआई और सरकार के बीच केंद्रीय बैंक की ऑटोनमी और स्वतंत्रता को लेकर टकराव के बीच उर्जित पटेल के इस्तीफे के कई दिन बाद रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘हम जनवरी, 2019 में होने वाली आरबीआई बोर्ड मीटिंग में बैंकिंग सिस्टम के रेग्युलेशन में कोई बदलाव की उम्मीद करते हैं।’ इस बार आरबीआई की बोर्ड मीटिंग में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला।

 

 

लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल स्टैब्लिटी हो सकती है कमजोर

एसएंडपी ने कहा, ‘पड़ोसी देशों के केंद्रीय बैंकों की तुलना में आरबीआई ने पारंपरिक तौर पर ज्यादा स्वतंत्रता दिखाई है। लेकिन भारत सरकार की तरफ से लगातार की तरफ से दबाव बढ़ने से जोखिम बढ़ा है। इससे देश की लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल स्टैब्लिटी कमजोर हो सकती है।’

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि फाइनेंशियल सेक्टर की सेहत को दुरुस्त करने के लिए केंद्रीय बैंक लंबे समय से ‘रिकॉग्निशन, रिकैपिटलाइजेशन, रिजॉल्यूशन और रिफॉर्म’ पर जोर दे रहा है। ऐसे में आरबीआई पर किसी तरह के दबाव से देश के लिए जोखिम बढ़ लसकता है।

 

 

आरबीआई के फैसलों से बढ़ी है बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता

एसएंडपी ने कहा, ‘हमारी राय में आरबीआई के फैसलों से हाल के वर्षों में बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में सुधार हुआ है। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा पेश किए गए एसेट क्वालिटी रिव्यूज में सुधार हुआ है। हालांकि इसका बेस खासा कम है और लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।’

 
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