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सऊदी के शेखों ने दिया मोदी को बड़ा झटका, फिर महंगा हो सकता है पेट्रोल

सऊदी अरब के ऐलान से फिर महंगा होने लगा कच्चा तेल

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नई दिल्ली. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से घबराए सऊदी अरब ने ऐसा फैसला किया है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारत सरकार का सिरदर्द जरूर बढ़ जाएगा। दरअसल बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें 20 फीसदी तक घट गईं। इसके बाद आनन-फानन में सऊदी अरब की अगुआई में तेल उत्पादक देशों के संगठन (OPEC) ने  अगले महीने यानी दिसंबर से तेल उत्पादन में रोजाना 5 लाख बैरल प्रति दिन तक की कटौती करने का ऐलान किया और अगले साल तक इसे 10 लाख बैरल तक घटाया जाएगा। इसके बाद सोमवार को क्रूड 1 फीसदी बढ़कर 71 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया और तेजी का यह क्रम आगे भी जारी रह सकता है। इसके बाद माना जा रहा है कि भारत में फिर से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

 

 

सऊदी अरब घटाएगा तेल उत्पादन

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब ने कहा कि कमजोर सीजनल डिमांड के चलते वह दिसंबर से क्रूड की शिपमेंट में 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक की कमी करेगा। सऊदी अरब के एनर्जी मिनिस्टर खालिद अल-फलीह ने कहा कि ओपेक देश और उसके पार्टनर इस बात पर सहमत हैं कि टेक्निकल एनालिसिस को देखने से अक्टूबर के स्तर से तेल की सप्लाई में 10 लाख बैरल प्रति दिन तक की कमी करनी चाहिए।

 

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मोदी सरकार को लगा झटका

दरअसल बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें 20 फीसदी तक घट गई हैं। इसका फायदा भारत को भी मिला और बीते लगभग एक महीने में पेट्रोल 7 रुपए तक सस्ता हो गया है। यह मोदी सरकार के लिए भी राहत की खबर थी, क्योंकि पेट्रोल के 90 रुपए (मुंबई) के पार पहुंचने से विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर हमले बोल रही थीं। गौरतलब है कि अक्टूबर में क्रूड की कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं।  

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सरकार को एक महीने की राहत, फिर आई आफत

मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई, कच्चे तेल की कम कीमतें लगातार सरकार का साथ दे रही थीं। सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में 110 डॉलर प्रति बैरल थी, जो जून 2017 में घटकर 48 डॉलर तक आ गई। यानी कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा कमी आई। सस्ते तेल के दम पर मोदी सरकार के दौरान देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आती गई। सस्ते तेल से सरकारी को महंगाई पर कंट्रोल करने के साथ ही देश का घाटा कम कर अर्थव्यवस्था सुधारने का मौका मिला। 8 अक्टूबर, 2018 को ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, जो चार साल का उच्चतम स्तर था। उसके बाद तेल की कीमतों में नरमी आई और एक महीने बाद 9 नवंबर को यह 70 डॉलर के नीचे आ गया था। हालांकि यह राहत ज्यादा दिन नहीं रही। अब पेट्रोल और डीजल एक बार फिर तेजी की राह पर आ सकता है।

 

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