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जिससे बौखलाया हुआ है अमेरिका, मोदी सरकार इसी हफ्ते करेगी वही डील

मिसाइल-रोधी प्रणाली एस-400 बेचने भारत आ रहे हैं पुतिन

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नई दिल्ली. अमेरिका जिसको लेकर लगातार भारत को आगाह कर रहा है, संभवतः भारत, रूस के साथ 5 अक्टूबर को इस डील को पूरा कर देगा। दरअसल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 अक्टूबर को भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अत्याधुनिक मिसाइल रोधी प्रणाली एस-400 सहित कई हथियारों की खरीद के लिए पुतिन के साथ एग्रीमेंट कर सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका इस डील को लेकर भारत को धमकी भरे अंदाज में आगाह कर चुका है। 

 

 

40 हजार करोड़ रु की होगी डील

रूस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, रूसी एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए भारत 5 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रु) से ज्यादा की डील कर सकता है। पुतिन 4 अक्टूबर को रूस से भारत के लिए रवाना होंगे। रूस ने कहा, ‘इस विजिट के लिए एस-400 एयरफोर्स डिफेंस सिस्टम्स की डिलिवरी का समझौता खासा अहम होगा।’ हालांकि इस डील से अमेरिका बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। भारत के पुराने डिफेंस पार्टनर अमेरिका ने अगस्त में कहा था कि यदि यह डील होती है तो भारत को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि रूस से हथियार खरीद पर भारत को अमेरिका से विशेष छूट मिलने की कोई गारंटी नहीं होगी। अमेरिकी सरकार ने हाल में अपने नियमों में बदलाव करते हुए भारत को उन खास देशों की शामिल किया है, जिन्हें वह बेरोक-टोक डिफेंस और अन्य टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा। 

 

 

भारत को भुगतने पड़ सकते हैं परिणामः अमेरिका 
पेंटागन में एशिया और प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक मंत्री रैंडल स्रीवर ने कहा कि ऐसा माहौल बनाया गया है, जिससे लगता है कि भारत को इस संबंध में छूट मिलेगी। उन्होंने कहा था, 'मैं बताना चाहूंगा कि यह थोड़ी भ्रमित करने वाली बात है। हमें अभी भी इसकी चिंता है कि भारत रूस के साथ बड़े सौदे कर सकता है। यहां बैठकर मैं आपसे यह नहीं कह सकता कि उन्हें छूट मिलेगी ही और उनके लिए प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।' मतलब साफ है कि इस डील का भारत को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। स्रीवर का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब एक सप्ताह बाद नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के रक्षा तथा विदेश मंत्रियों के बीच 2+2 वार्ता होनी तय हुई है। बातचीत के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जिम मैटिस नई दिल्ली जाने वाले हैं। 

 


बड़े डिफेंस पार्टनर बनकर उभरे हैं भारत-अमेरिका
बता दें कि हाल के वर्षों में भारत, अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण रक्षा सहयोगी बनकर उभरा है। रूस के खिलाफ अमेरिका के मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई देश रूस से रक्षा या खुफिया विभाग के क्षेत्रों में कोई लेन-देन या सौदे करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, रक्षा मंत्री जिम मैटिस के प्रयासों के बाद अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री को रूस के साथ सौदा करने वाले सहयोगी देशों को प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार दे दिया था।  

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40 हजार करोड़ रुपए का सौदा 
भारत ने एयरफोर्स के लि‍ए रूस से एस-400 ट्राएंफ एयर डि‍फेंस सिस्‍टम खरीदने के लि‍ए डील की है। यह सौदा करीब 40 हजार करोड़ रुपए का है। पाकि‍स्‍तान और चीन की चुनौति‍यों को देखते हुए यह सि‍स्‍टम भारत के लि‍ए बहुत महत्‍वपूर्ण है। यह एक साथ 300 टारगेट को ट्रैक कर सकता है। एस-400 सिस्‍टम एस-300 के अपग्रेडेड वर्जन हैं। पहले ये सिर्फ रूस में उपलब्‍ध थे। इन्‍हें एलमाज-एंटे मैन्‍युफैक्‍चर करती है और यह रूस में 2007 से सर्विस में है। 

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एस-400 के जरिए चीन को जवाब देना चाहता है भारत 

भारत चीन सीमा पर अपनी पोजीशन को मजबूत बनाने के लि‍ए इस सि‍स्‍टम को लगाना चाहता है। चीन  भी रूस से इस मि‍साइल सि‍स्‍टम को खरीद रहा है। इस मामले में चीन भारत से आगे नि‍कल गया। वह पहला ऐसा देश है जि‍सने इस मि‍साइल सि‍स्‍टम के लि‍ए रूस से सौदा कर लि‍या। चीन ने वर्ष 2014 में यह सौदा कर लि‍या था और रूस उसे कई मि‍साइल दे भी चुका है। ऐसे में भारत के पास भी यह सिस्टम आता है तो वह चीन को जवाब देने में सक्षम होगा। 

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