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चीन से 5 गुना पीछे है भारत की इकोनॉमी, तुलना करना ठीक नहींः रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि भारत और चीन के बीच तुलना करना ठीक नहीं है।

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न्यूयॉर्क. रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि भारत और चीन के बीच तुलना करना ठीक नहीं है, क्योंकि पड़ोसी देश की तुलना में भारत की इकोनॉमी लगभग 5 गुना पीछे है। उन्होंने कहा कि दोनों देश काफी अलग-अलग हैं और उनके बीच तुलना भारत के लिहाज से ठीक नहीं है। राजन ने कहा कि उन्होंने पहले भी भारत की ग्रोथ के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार पर जोर दिया था। राजन फिलहाल यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल बिजनेस में फाइनेंस के प्रोफेसर हैं। उन्होंने 11 अप्रैल को हावर्ड केनेडी स्कूल में ‘लीवरेज, फाइनेंशियल क्राइसेस एंड पॉलिसीस टू रेज इकोनॉमिक ग्रोथ’ पर लेक्चर दिया था।

 

 

25 साल से 7 फीसदी बनी हुई है ग्रोथ
उन्होंने कहा कि चीन की तुलना में भारत काफी पीछे हैं, जो भारतीय इकोनॉमी के साइज की तुलना में 5 गुनी है। उन्होंने कहा, ‘चीन से इतर देखें तो किसी भी क्राइटीरिया पर भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है।’ उन्होंने कहा कि बीते 25 साल से भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी बनी हुई है।

चीन की तुलना में भारत ने क्या काम नहीं किया है, इस सवाल पर राजन ने कहा कि भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन पर काम नहीं किया है। राजन ने कहा कि चीन की ग्रोथ और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ काफी हद तक पोर्ट्स, सड़कों तक उसकी पहुंच की वजह से संभव हुई है। ऐसा भारत के साथ नहीं है।

 

 

भारत में बड़े प्रोजेक्ट लागू करना खासा मुश्किल
राजन ने भारत में एक 6 लेन के हाईवे का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट को वहां पर कई बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना मुश्किल है, क्योंकि यह कई लोगों की जमीन से गुजरेगा। उन्होंने कहा, ‘भारत में आपको दुनिया की पहली सिविल सोसायटी, कारोबारी राजनेताओं और तीसरा प्रशासन से निबटना पड़ेगा। इन्हें मिलाकर देखें तो वहां ऐसे प्रोजेक्ट्स का निर्माण, जमीन खरीदना खासा मुश्किल हो जाता है।’

 

 

डेमोक्रेसी है भारत की सबसे बड़ी एडवांटेज 
हालांकि राजन ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा एडवांटेज यहां की डेमोक्रेसी है। उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर मेरा मानना है कि ग्रोथ का सबसे मजबूत सिस्टम सरकार द्वारा चलाया जाने वाला सिस्टम नहीं है। जब आप सबसे आगे होते हैं तो लचीली मार्केट डेमोक्रेसी सबसे मजबूत सिस्टम है, क्योंकि इसमें खासा नियंत्रण और संतुलन होता है।’

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