Advertisement
Home » इकोनॉमी » इंटरनेशनलWTO's existence is under threat: Prabhu

खतरे में पड़ा WTO का अस्तित्व, ग्लोबल ट्रेड के लिए है सबसे मुश्किल दौरः प्रभु

केंद्रीय कॉमर्स मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने कहा कि मौजूदा हालात में डब्ल्यूटीओ में खासे रिफॉर्म्स की जरूरत है।

WTO's existence is under threat: Prabhu

 

कोलकाता. केंद्रीय कॉमर्स और सिविल एविएशन मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने शनिवार को कहा कि मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) का अस्तित्व ‘खतरे में’ पड़ गया है, लेकिन भारत ट्रेड नॉर्म्स के रेग्युलेशन के इसकी जरूरत को पूरा समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ के कुछ देश में ट्रेडिंग नॉर्म्स पर सवाल उठा रहे हैं और इसे ग्लोबल ट्रेड के लिए ‘बीते 70 साल का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर’ बताया जा रहा है।

 

डब्ल्यूटीओ के बिना बढ़ेंगी मुश्किलें

फियो के एक कार्यक्रम में एक्सपोर्टर्स के साथ संवाद के दौरान प्रभु ने कहा, ‘डब्ल्यूटीओ का अस्तित्व खतरे में हैं। लेकिन यदि डब्ल्यूटीओ नहीं होगा तो सभी देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दुनिया में खासी उथल-पुथल बनी हुई है।’

 

 

डब्ल्यूटीओ में भारी रिफॉर्म्स की जरूरत

मिनिस्टर ने कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ के रूल्स और रेग्युलेशंस को ग्लोबल ट्रेड के लिए गारंटी के तौर पर देखता है। इन हालात में ग्लोबल ट्रेड बॉडी के भीतर भारी रिफॉर्म्स की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूटीओ को अस्तित्व में और मजबूत बनाए रखने की जरूरत है, जिसके लिए ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) में मिनिस्ट्रीयल टॉक के फेल होने के बाद दिल्ली में एक मिनी-मिनिस्ट्रीयल मीटिंग की व्यवस्था की पहल की गई थी।’

 

 

कई देशों के साथ बाईलेटरल ट्रेडिंग एग्रीमेंट की कोशिश में भारत

प्रभु ने कहा कि भारत, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, आसियान, यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन, मध्य एशिया, जीसीसी, पूर्वी देशों और चीन के साथ कई बाईलेटरल ट्रेडिंग एग्रीमेंट करने की कोशिशें भी कर रहा है। अमेरिका के साथ ट्रेड डिस्प्यूट्स के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिशें कर रहा है। मिनिस्टर ने कहा कि भारत द्वारा चीन के साथ भारी भरकम ट्रेड डेफिसिट में कमी लाने की कोशिशें की जा रही हैं।

 

कुछ साल में 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त एक्सपोर्ट करने की योजना

कॉमर्स मिनिस्ट्री अगले कुछ साल में 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त एक्सपोर्ट करने के लिए एक्सपोर्टर्स बॉडी के साथ मिल प्रोडक्ट-मार्केट के स्वरूप को तैयार करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने आसान फाइनेंसिंग उपलब्ध कराने के लिए एक्सपोर्ट्स को प्रायोरिटी लेंडिंग सेक्टर का दर्जा देने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास भी जापान की जेट्रो, ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेड जैसी एजेंसियां होनी चाहिए। इस दिशा में काम किया जा रहा है।’

एक्सपोर्टर्स को जीएसटी रिफंड के मसले पर उन्होंने कहा कि इस समस्या को काफी हद तक दूर कर लिया गया है।

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
Advertisement
Don't Miss