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चीन के जाल में फंसा था मुस्लिम देश, 10 हजार करोड़ देकर मोदी ने उबारा

धरा रह गया भारत की घेराबंदी करने का चीन प्लान

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नई दिल्ली. भारत का एक और पड़ोसी देश मालदीव, चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस चुका था। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारत सरकार ने उसे बचाने के लिए 1.40 अरब डॉलर यानी 10 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया। इससे मालदीव की तात्कालिक आर्थिक जरूरतें पूरी होंगी। भारत की विजिट पर आए मालदीव के प्रेसिडेंट इब्राहिम सोलिह के साथ बातचीत के बाद पीएम मोदी ने खुद इस पैकेज का ऐलान किया।

 

मालदीव पर है 21 हजार करोड़ का कर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव पर चीन का 3 अरब डॉलर या 21 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाला यह देश मदद के लिए भारत, सऊदी अरब और अन्य देशों की ओर देख रहा है। गौरतलब है कि मालदीव ने अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए यह कर्ज लिया था और इन प्रोजेक्ट्स को चीन की कंस्ट्रक्शन कंपनियां ही पूरा कर रही हैं। पिछले महीने ही भारत ने मालदीव के नए विदेश मंत्री अब्दुल्लाह शाहिद की भारत यात्रा के दौरान 2.5 करोड़ डॉलर के कर्ज की पेशकश की थी।

आगे पढ़ें-हिंद महासागर की घेराबंदी करता रहा है चीन

 

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हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए अहम है मालदीव

मालदीव के प्रेसिडेंट सोलिह अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर रविवार को ही भारत पहुंचे थे। सोलिह ने सितंबर में चीन के नजदीकी माने जाने वाले पूर्व प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन को चुनाव में शिकस्त दी थी। भारत सरकार को यामीन की अगुआई वाली मालदीव की पिछली  सरकार के कामकाज और चीन के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियों से काफी आपत्ति थीं। मालदीव को भारत के नियंत्रण वाले हिंद महासागर की सुरक्षा के लिहाज से खासा अहम माना जाता रहा है। चीन हिंद महासागर के छोटे देशों में अपने नौसौनिक अड्डे बनाने के लिए लुभाता रहा है, जिससे उसे भारत की घेराबंदी करने में आसानी हो।

सोमवार को मालदीव के प्रेसिडेंट का राष्ट्रपति भवन में हुए एक समारोह में स्वागत किया गया। सोलिह के साथ उनकी पत्नी फजना अहमद भी हैं। उनका मालदीव लौटने से पहले ताजमहल की विजिट करने का भी प्लान है।

 

आगे पढ़ें-रातोंरात मालदीव पहुंच गए थे मोदी

 

 

 

रातोंरात मालदीव पहुंच गए थे मोदी

मालदीव में नई सरकार की ताजपोशी नवंबर महीने में हुई थी। भारत के लिए मालदीव इतना अहम है कि नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी रातोंरात वहां पहुंच गए थे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा था। इससे पहले 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश की यात्रा की थी। पीएम मोदी ने कहा था, ‘हमारी इच्छा स्थायी, लोकतांत्रिक, संपन्न और शांतिपूर्ण मालदीव देखने की है।’

 

आगे पढ़ें-पिछली सरकार पर लगे थे चीन से भारी कर्ज लेने के आरोप

 

 

 

पिछली सरकार पर लगे थे चीन से भारी कर्ज लेने के आरोप

हाल में सोलिह की अगुआई वाली सरकार ने कहा था कि उसे अभी तक चीन के वास्तविक कर्ज के बारे में नहीं पता है। दरअसल सोलिह चीन की ओर झुकाव रखने वाली पूर्ववर्ती अब्दुल्ला यमीन सरकार पर सरकारी खजाने को जमकर लूटने और चीन से भारी कर्ज लेने का आरोप लगाते रहे हैं। माना जाता है कि चीन ने यहां पर सड़क और हाउसिंग निर्माण के नाम पर करोड़ों डॉलर का निवेश किया है।

गौरतलब है कि इस आइसलैंड चेन की आबादी लगभग 4 लाख है, जिसे अपने सफेद रेत के समुद्र तटों और नीले पानी के लिए जाना जाता है। यामीन सरकार के दौरान मालदीव के चीन के कर्ज के जाल में फंसने के आरोप लग रहे थे, जिसके चलते सोलिह को राष्ट्रपति चुनाव में यामीन को शिकस्त देने में मदद मिली।

 

 

मुश्किल हो रहा चीन का कर्ज समझना

सत्ता संभालने के बाद सोलिह सरकार ने कहा था कि देश की आर्थिक स्थिति बद्तर हालत में है और चीनी कंपनियों के साथ हुईं डील्स की वास्तविक डिटेल खंगालने में कई हफ्ते या महीनों लगेंगे। सोलिह के एक करीबी लीडर ने कहा था, ‘हमारे लिए चीन के वास्तविक कर्ज को समझना खासा मुश्किल हो रहा है।’

उन्होंने कहा, ‘प्रत्यक्ष कर या प्रत्यक्ष द्विपक्षीय सरकार से सरकार को कर्ज अलग-अलग चीज है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर के लिए दी गई सॉवरेन गारंटी सबसे अहम है। सबसे बड़ी बात है कि हमारी सरकारी कंपनियां कर्ज के जाल में फंस गई हैं।’

 
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