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पाकिस्तान ने चला मोदी जैसा पैंतरा, एक झटके में बचा लिए 4300 करोड़ रु

कंपनियों को आपस में लड़ाकर उठाया फायदा

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नई दिल्ली. पाकिस्तान भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार को गाहे बगाहे निशाने पर लेता रहा है, लेकिन अपने फायदे के लिए मोदी जैसा दांव लगाने से नहीं चूका। पाकिस्तान ने ऐसा करके अपने लगभग 60 करोड़ डॉलर (4300 करोड़ रुपए) बचाए और इस पर वह अपनी पीठ ठोक रहा है। दरअसल पाकिस्तान ने 2016 में दुनिया भर की तेल कंपनियों को आपस में भिड़ाकर नैचुरल गैस खरीदने के लिए 10 साल की एक डील की थी, जिससे उसे 4300 करोड़ रुपए की बचत हुई। पाकिस्तान की सरकारी तेल कंपनी पाकिस्तान स्टेट ऑयल (PSO) की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

 

भारत ने 2015 में की थी डील

भारत की सरकारी कंपनी और सबसे बड़ी एलएनजी की इंपोर्टर पेट्रोनेट एलएनजी ने 2015 में कतर की सरकारी गैस प्रोड्यूसर कंपनी रासगैस के साथ ऐसी डील की थी, जिसके तहत भारत को पूर्व में हुए एग्रीमेंट की तुलना में आधी कीमत पर गैस मिलती। पीएम मोदी ने भी इस संबंध में संसद में कहा था कि इस डील से भारत को 8,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। यह नया कॉन्ट्रैक्ट 1 जनवरी, 2016 से लागू हो गया था और 2028 में खत्म होगा।

 

कतर के साथ हुआ भारी टकराव

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का गैस की कीमतों में कमी को लेकर कतर के साथ टकराव हो गया था। कतर के कीमतें घटाने से इनकार के बाद पाकिस्तान ने गैस के 120 कार्गो खरीदने के लिए ग्लोबल मार्केट में दो बड़े टेंडर जारी कर दिए थे। इसके माध्यम से उसे यूके की रॉयल डच शेल और बीपी सहित कई सप्लायर्स से बिड हासिल हुईं।

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लेकिन पाकिस्तान ने बचा लिए 61 करोड़ डॉलर

पाकिस्तानी कंपनी पीएसओ के प्रिजेंटेशन में कहा गया कि जहां कतरगैस ऑपरेटिंग कंपनी से उसकी बातचीत चल रही थी, वहीं उसे कई बिड्स और अच्छी कीमतों के विकल्प भी मिले। पीएसओ ने कहा, ‘इस स्ट्रैटजी से कतरगैस के साथ कीमतों को कम करने में मदद मिली और देश के लगभग 61 करोड़ डॉलर की बचत हुई।’

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स्विट्जरलैंड से मिली सबसे कम कीमत की बिड

तब पाकिस्तान ने कतर को सबसे कम कीमत की बिड के बारे में बताया, जो स्विट्जरलैंड की गनवोर ( Gunvor Group Ltd) ग्रुप से मिली थी। बाद में कतर नई कीमत पर गैस सप्लाई के लिए राजी हो गया, हालांकि पाकिस्तान ने दिए गए पहले टेंडर के क्रम में गनवोर से भी गैस खरीदी। लेकिन दूसरे टेंडर को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और कतर डील को पूरा कर लिया गया।

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पाकिस्तान की तमाम फैक्ट्रियां हुईं बंद

आखिरकार कतर के साथ डील के बाद पाकिस्तान बड़े एलएनजी बायर के तौर पर सामने आया और उसकी 15 साल के लिए सालाना 37.5 लाख टन गैस खरीदने की डील हुई। इसके चलते पावर का प्रोडक्शन घट गया और पाकिस्तान की तमाम फैक्ट्रियां बंद होने के मजबूर हो गईं। हालांकि 2016 के बाद पाकिस्तान का इंपोर्ट तेजी से बढ़ा और वह एलएनजी इंपोर्ट करने वाला दुनिया का 7वां बड़ा देश बन गया।

पाकिस्तान में सरकारी एजेंसियों और विदेशी एलएनजी सप्लायर्स के बीच हुई इस बातचीत की खासी आलोचना भी हुई। कुछ ने दावा किया कि करप्शन को छिपाने के लिए इस डील में ट्रांसपरेंसी नहीं बरती गई।

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