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अपनी करंसी को डिवैल्युएट करेगा पाकिस्तान, IMF के साथ बातचीत में हुआ राजी

पाकिस्तान ने अपनी करंसी को कमजोर करने का फैसला किया है।

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने अपनी करंसी को कमजोर करने का फैसला किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) के साथ बातचीत के बाद पाकिस्तान सरकार ऐसा करने के लिए राजी हुई है।

पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ के एक डेलिगेशन के बीच शुक्रवार को देश की इकोनॉमी पर बातचीत का पहला राउंड पूरा हुआ। अब दोनों ही पक्ष 13-14 दिसंबर को होने वाली मीटिंग से पहले पॉलिसी तैयार कर रहे हैं।

 

कई साल के विरोध के बाद हुआ राजी

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के मीडिया ग्रुप डॉन को बताया कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) कई साल के विरोध के बाद अब मार्केट कंडीशंस के मुताबिक करंसी में बदलाव करेगा। इस कदम का उद्देश्य अगले महीने लॉन्च होने वाले दो इंटरनेशनल बॉन्ड्स से 2.5 अरब डॉलर जुटाने का रास्ता साफ करना है।

 

पाकिस्तान के एक्सटर्नल सेक्टर की सेहत पर चिंतित IMF

सोच समझ कर लिए गए इस फैसले के बाद पाकिस्तान करंसी शुक्रवार को 110 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंच गई और फिर 107 रुपए पर सेटल हुई, जो अधिकारिक अनुमानों से ज्यादा लेवल नहीं था। सूत्रों ने कहा कि आईएमएफ की चिंताएं पाकिस्तान के एक्सटर्नल सेक्टर की सेहत को लेकर थीं, लेकिन सरकारी अधिकारियों की राय इससे अलग थी।

दोनों पक्षों की बातचीत के बाद आईएमएफ टीम अब अपनी एसेसमेंट रिपोर्ट तैयार करेगी और इस पर फीडबैक व चर्चा के लिए सोमवार को पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपेगी।

 

विभिन्न पक्षों से बातचीत करेगा IMF

जहां फाइनेंस सेक्रेटरी शाहिद महमूद की अगुआई वाली सरकार की टीम इस एसेसमेंट को रिव्यू करेगी, वहीं पाकिस्तान में मौजूद हेराल्ड फिंगर की अगुआई वाला आईएमएफ मिशन अगले सप्ताह लाहौर का दौरा करेगा, जहां उसकी बातचीत पंजाब के चीफ मिनिस्टर शहबाज शरीफ और स्वतंत्र ऑब्जर्वर व बिजनेस कम्युनिटी के रिसर्चर्स, प्राइवेट सेक्टर की यूनिवर्सिटी के रिप्रिजेंटेटिव्स के साथ होगी।

 

 

महंगा हुआ इंपोर्ट और घट रहा एक्सपोर्ट

पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों का मानना है कि करंसी एडजस्टमेंट से कमर्शियल बैंकों की 6 अरब डॉलर की फॉरेन करंसी होल्डिंग्स को ऑफीशियल रिजर्व में लाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे ऑफीशियल, बैंकिंग और ओपन मार्केट रेट्स में अंतर को कम करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, कई महीनों में ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि एक्सपोर्टर्स अपनी पोजिशन को घटा रहे हैं। लंबे समय के लिहाज से देखें हाल में इंपोर्ट ड्यूटी और रेग्युलेटरी ड्यूटीज लगाए जाने या बढ़ोत्तरी से इंपोर्ट अनावश्यक रूप से महंगा हो जाएगा।

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