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सऊदी और ईरान ने की तेल पर ऐसी डील, अमेरिका भी रह गया दंग

खतरे में पड़ी कमाई तो चला दांव, नहीं चली अमेरिका की दादागीरी

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विएना. सऊदी अरब और ईरान को यूं तो एक-दूसरे का कट्टर दुश्मन माने जाते हैं, लेकिन जब तेल से होने वाली कमाई पर संकट आया तो दोनों एक हो गए। सऊदी अरब की अगुआई वाला तेल उत्पादक देशों का संगठन OPEC शुक्रवार को तेल के उत्पादन में कटौती के लिए राजी हो गया, जिससे तेल की कीमतों की गिरावट को थामा जा सके। वहीं ओपेक में ईरान को उत्पादन में कटौती से छूट दे दी गई, जिससे वह अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर सके। दरअसल बीते लगभग 2 महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30 फीसदी की कमी आ चुकी है, जिससे अरब देशों की कमाई में खासी कमी आ चुकी है।

 

2 महीने 30 फीसदी सस्ता हुआ ब्रेंट क्रूड

बीते अक्टूबर महीने से क्रूड की कीमतें लगातार गिर रही है। 4 अक्टूबर को जहां ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था, वहीं 30 नवंबर तक यह घटकर 57.71 डॉलर पर आ गया था। इस प्रकार दो महीने से भी कम समय में इसमें 30 फीसदी से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।

 

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सऊदी अरब और ईरान दोनों को होगा फायदा

ओपेक में हुई यह डील एक दूसरे के कट्टर दुश्मन देश सऊदी अरब और ईरान दोनों को फायदा पहुंचाने वाली है। सऊदी अरब जहां दुनिया का दूसरा ऑयल प्रोड्यूसर है और उसकी इकोनॉमी काफी हद तक तेल से होने वाली कमाई पर निर्भर है। इसीलिए तेल की कीमतों में होने वाले किसी भी बदलाव से उस पर काफी असर पड़ता है।

वहीं ईरान इन दिनों अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, इसके चलते वह अपने चुनिंदा कस्टमर देशों को ही तेल की सप्लाई कर पा रहा है। इसलिए ओपेक में हुई डील दोनों देशों के लिए खासी फायदेमंद होने जा रही है।

 

आगे पढ़ें-काम कर गई रूस की स्ट्रैटजी

 

 

 

 

काम कर गई रूस की स्ट्रैटजी

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब और ईरान जैसे कट्टर दुश्मन देशों को मनाना आसान नहीं था। माना जा रहा है कि इस डील के पीछे गैर ओपेक मेंबर रूस की स्ट्रैटजी रही, जिसने मेंबर्स के साथ कई बाईलेटरल मीटिंग की। इस प्रकार ओपेक में ईरान को तेल उत्पादन में कटौती से छूट मिल गई। इस डील ने अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों को हैरत में डाल दिया है।

आगे पढ़ें- क्या हुई डील

 

 

क्या हुई डील

पहले हुई बातचीत में ओपेक और सहयोगियों के तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती का प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें 6.50 लाख ओपेक को ही घटाना था। खबरों के मुताबिक तेल के उत्पादक देश प्रोडक्शन में कटौती के लिए अक्टूबर के आउटपुट को बेसलाइन के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। दो दिन तक चली बैठक में ओपेक देशों के बीच 12 लाख बैरल प्रति दिन (एमबीडी) की कटौती पर सहमति बनी। हालांकि यह कटौती उम्मीद से काफी ज्यादा है, इसीलिए यह खबर आते ही इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ गईं। माना जा रहा है कि इसका भारत पर भी खासा असर पड़ेगा और एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के महंगे होने का क्रम शुरू हो सकता है।

 

प्रति दिन 12 लाख बैरल उत्पादन घटाएगा ओपेक

ओपेक और उसके पार्टनर्स के बीच 12 लाख बैरल प्रति दिन उत्पादन में कटौती पर सहमति बनी, जिसमें से 8 लाख बैरल की कटौती अकेले ओपेक देश करेंगे। हालांकि ईरान इस विवादित बातचीत में विजेता के तौर पर सामने आया है। ईरान ने कहा कि उसे कटौती से छूट हासिल हुई है, क्योंकि वह पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

 
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