Home » Economy » Internationalno better example of Trump s trade fight with China than f 35

अमेरिका को अब चीन से साइबर चोरी का खतरा, कहा-एयरोस्पेस, रोबोटिक्स और AI में खा सकता है हजारों जॉब्स

चीन पर दुनिया के सबसे महंगे लड़ाकू विमान F-35 ज्वाइंट स्ट्राइक को कॉपी करने के भी लगे हैं आरोप

no better example of Trump s trade fight with China than f 35

 

नई दिल्ली. दुनिया की दो बड़ी इकोनॉमीज अमेरिका और चीन जहां टैरिफ को लेकर ‘जैसे को तैसे’ की स्ट्रैटजी पर काम कर रही हैं, वहीं अब अमेरिका ने चीन की ट्रेड प्रैक्टिसेस पर भी सवाल उठाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि चीन के लगातार इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी की चोरी से अमेरिका अरबों डॉलर के रेवेन्यू और हजारों जॉब्स का नुकसान पहुंचा रहा है।

 

 

ट्रेड एडवाइजर ने उठाए सवाल

व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नैवारो ने कहा, ‘चीन, अमेरिका की फ्यूचर की इंडस्ट्रीज को टारगेट कर रहा है।’ उन्होंने इसके लिए चीन के साइबरथेफ्ट से एअरोस्पेस, रोबोटिक्स और आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस को मिल रही चुनौती का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘यदि चीन फ्यूचर की इन इमर्जिंग इंडस्ट्रीज को हासिल करने में सफल हो जाता है तो अमेरिका का कोई इकोनॉमिक फ्यूचर नहीं बचेगा और यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से गंभीर समझौता होगा।’

 

 

चीन पर लगे हैं एफ-35 को कॉपी करने के आरोप

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक,अमेरिका के लिए उसके सबसे महंगे वीपन सिस्टम एफ-35 ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर से बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता। अमेरिका ने अक्टूबर, 2001 में नेक्स्ट जेनरेशन के स्टील्थ स्ट्राइक फाइटर के लिए लॉकहीड मार्टिन को 200 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। यह कॉन्ट्रैक्ट इतना बड़ा था कि इसके माध्यम से 5वीं जेनरेशन का एयरक्राफ्ट डेवलप किया जाना था, जो उसके 4 मिलिट्री एयरक्राफ्ट को रिप्लेस करने में सक्षम था। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एफ-35ए बॉम्बर्स की कॉस्ट लगभग 15 करोड़ डॉलर (1 हजार करोड़ रुपए) है।

 

 

एफ-35 से मेल खाता है चीन का जे-31

2009 में जब अमेरिका का नया फाइटर जेट सामने आया तो उसके कुछ संवेदनशील डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स डाटा साइबरथेफ्ट का शिकार हो चुके थे। समझा जाता है कि इस साइबरथेफ्ट के पीछे चीन के हैकर्स थे और यही वजह है कि चीन का स्टील्थ शेनयांग जे-31 काफी हद एफ-35 से मेल खाता है।

 

 

एफ-22 राप्टर के साथ भी ऐसा कर चुका है चीन

एफ-35 की नकल करके जे-31 बनाने से पहले एफ-22 के साथ भी ऐसा हो चुका है। चीन का जे-20 काफी हद तक एफ-22 राप्टर के साथ मेल खाता है।

कारोबारी जासूसी के एक अन्य मामले में चीन के शेंगदू जे-20 स्टील्थ फाइटर जेट संदिग्ध तौर पर लॉकहीड के एफ-22 राप्टर की बेहतरीन डिजाइन के समान नजर आता है। जहां अमेरिका में निर्मित लॉकहीड मार्टिन में अच्छा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, ज्यादा उन्नत सेंसर और संवेदनशील स्टील्थ कोटिंग है, वहीं कथित तौर पर चीन द्वारा चोरी की गई इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी में खर्च से बचने की कोशिश की गई है।

 

चीन पर लगाया था 60 अरब डॉलर का प्रतिकार शुल्क

मार्च में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने एक एग्जीक्यूटिव मेमोरैंडम पर हस्ताक्षर किए, जिसमें औद्योगिक जासूसी जैसी ट्रेड प्रैक्टिसेस के लिए चीन पर पेनल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत चीनी इंपोर्ट्स पर 60 अरब डॉलर का प्रतिकार शुल्क लगाया गया था।

इस मसले पर लॉकहीड मार्टिन की सीईओ मैरीलिन ह्युसन ने कहा था कि इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी डिफेंस इंडस्ट्री की जान है और उन्होंने ट्रम्प सरकार के इस एक्शन का स्वागत किया। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए अहम पल बताते हुए कहा था कि इसके माध्यम से एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की एक बड़ी समस्या दूर होने जा रही है। इससे देश की इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी को भी सुरक्षा मिलेगी।

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट