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न्यूजीलैंड की कंपनियां फेसबुक-गूगल को नहीं देंगी विज्ञापन, लाइव दिखाया था आतंकी हमला

New Zealand firms to pull ads from Facebook, Google

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर आतंकवादी हमला लाइव दिखाने के विरोध में न्यूजीलैंड की कंपनियों ने फेसबुक और गूगल पर विज्ञापन नहीं देने का फैसला किया है। क्राइस्टचर्च में 15 मार्च को एक आतंकवादी ने दो मस्जिदों में फायरिंग की थी। इसे उसने फेसबुक लाइव पर दिखाया था। इसके बाद कई घंटे तक यह वीडियो सोशल मीडिया पर चलता रहा।


वेलिंगटन. पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर आतंकवादी हमला लाइव दिखाने के विरोध में न्यूजीलैंड की कंपनियों ने फेसबुक और गूगल पर विज्ञापन नहीं देने का फैसला किया है। क्राइस्टचर्च में 15 मार्च को एक आतंकवादी ने दो मस्जिदों में फायरिंग की थी। इसे उसने फेसबुक लाइव पर दिखाया था। इसके बाद कई घंटे तक यह वीडियो सोशल मीडिया पर चलता रहा। 17 मिनट के इस वीडियो को यूट्यूब और ट्विटर पर भी शेयर किया गया। यूट्यूब गूगल का ही ऐप है। इस हमले में 49 लोगों की मौत हो गई थी और 40 से ज्यादा घायल हो गए थे। इस बीच, फेसबुक ने सफाई दी है कि वारदात के 24 घंटे के भीतर इसने हमले के 15 वीडियो अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिए थे।

 

इन कंपनियों ने किया बड़ा ऐलान

न्यूजीलैंड हेराल्ड अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार एएसबी बैंक, लोटो एनजेड, बर्गर किंग, स्पार्क जैसी कंपनियों ने सामूहिक रूप से फेसबुक और गूगल को विज्ञापन बंद करने का फैसला किया है। कुछ कंपनियों ने अपने स्तर पर भी यह कदम उठाया है। कीवी बैंक ने 15 मार्च को ही विज्ञापन बंद कर दिया था। अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इस मुहिम में कितनी कंपनियां शामिल हैं और वे कितने दिनों तक विज्ञापन नहीं देंगी।
न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंदा आर्डर्न ने रविवार को कहा था, ‘मैं फेसबुक से पूछना चाहती हूं कि एक बंदूकधारी सामूहिक हत्या की लाइव स्ट्रीमिंग कैसे कर रहा था। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने की मांग की है। इस घटना के बाद फेसबुक की काफी आलोचना हुई है।’

 

न्यूजीलैंड की कंपनियां पहले भी विज्ञापन बंद कर चुकी हैं

यह पहला मौका नहीं जब न्यूजीलैंड की कंपनियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन बंद किया हो। टेलीकॉम कंपनी स्पार्क ने इसी महीने यूट्यूब पर अपने विज्ञापन बंद कर दिए थे। कंपनी ने बच्चों के यौन शोषण वाले वीडियो के विरोध में ऐसा किया था। इसके बाद डिज्नी और नेस्ले ने भी इस प्लेटफॉर्म पर अपने विज्ञापन बंद कर दिए थे।

 

जर्मनी में पिछले साल 350 करोड़ रुपए जुर्माने का कानून बना था

फेसबुक और यूट्यूब पर पहले भी हत्या और यौन हिंसा को लाइव दिखाया गया है। किसी भी देश में इसकी इजाजत नहीं है। इसके बावजूद दोनों कंपनियों ने अभी तक ऐसे संकेत नहीं दिए हैं कि सिस्टम मजबूत करने तक वे लाइव स्ट्रीमिंग बंद करेंगी। जर्मनी ने पिछले साल कानून बनाया कि अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म घृणा फैलाने वाली स्पीच या फेक न्यूज हटाने में नाकाम रहती है तो उस पर 350 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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