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3.3% फिस्कल डेफिसिट हासिल करने के लिए खर्च घटा सकती है सरकार: Moody's

मूडीज ने कहा कि फिस्कल डेफिसिट के लिए 3.3 फीसदी का टारगेट हासिल करने के लिए सरकार खर्च में कटौती कर सकती है।

Moodys says India may cut expenditure to stick to fiscal deficit

नई दिल्ली. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने गुरुवार को कहा कि जीडीपी की तुलना में भारत का फिस्कल डेफिसिट 3.3 फीसदी के स्तर पर बने रहने का अनुमान है और बजटीय लक्ष्य से पीछे रहने की स्थिति में सरकार अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को भी घटा सकती है। हालांकि मूडीज ने कहा कि क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों को देखते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइस ड्यूटी में कटौती से भारत के सॉवरेन क्रेडिट प्रोफाइल पर प्रेशर बढ़ेगा। 

 

 

13 साल में पहली बार बढ़ी थी रेटिंग

मूडीज ने बीते साल 13 साल में पहली बार भारत की सॉवरेन रेटिंग में बढ़ाकर स्टेबल आउटलुक के साथ ‘बीएए2’ कर दी थी और कहा था कि इकोनॉमिक और इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स जारी रहने से ग्रोथ संभावनाओं में सुधार दर्ज किया गया है। 
मूडीज का अनुमान है कि सरकार 2018-19 में 3.3 फीसदी का टारगेट हासिल कर सकती है। बयान के मुताबिक सरकार को फिस्कल कंसॉलिडेशन और बजट लक्ष्यों के लिए अपनी प्रतिबद्धता का फायदा मिलेगा।

 

बजट रेवेन्यू में कुछ गिरावट का है जोखिम

मूडीस के वीपी और सीनियर क्रेडिट ऑफिसर विलियम फोस्टर ने कहा, ‘भले ही मूडीज बजट रेवेन्यू में कुछ गिरावट के जोखिम देखती है, लेकिन उसका अनुमान है कि अगर फिस्कल टारगेट में कमी की भरपाई करने की जरूरत पड़ी तो सरकार प्रस्तावित कैपिटल एक्सपेंडिचर में कुछ कमी करेगी। कुछ ऐसा ही पिछले वर्षों में भी किया था।’

 

घट सकता है GST रेवेन्यू 

रेवेन्यू के मामले में फोस्टर ने कहा कि मूडीज सरकार की गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यटी से कलेक्शन से उम्मीदों में कुछ गिरावट का जोखिम देखती है।
जीएसटी लागू करने और अनुपालन में जारी अनिश्चितता के साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट के समयबद्ध प्रोविजन और टैक्स रेट्स में बार-बार बदलाव से रेवेन्यू में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। 
हालांकि, इसे लागू करने में शुरुआत में आए झटके अब कुछ कम होते दिख रहे हैं और मूडीज को मीडियम टर्म में जीएसटी कंप्लायंस में स्थायित्व आने का अनुमान है। इसके साथ ही इकोनॉमी के फॉर्मलाइज होने के साथ ही अनुमान के अनुरूप रेवेन्यू आने की उम्मीदें हैं।  

 

सरकार पर बढ़ सकता है एक्साइज ड्यूटी घटाने का प्रेशर

इसमें कहा गया, ‘यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो सरकार पेट्रोल और डीजल प्रोडक्ट्स पर एक्साइस ड्यूटी में कमी के लिए दखल दे सकती है, जिससे भारत के सॉवरेन क्रेडिट प्रोफाइल पर निगेटिव प्रेशर पड़ सकता है।’ रिटेल सेलिंग प्राइस पर 20 फीसदी एक्साइस ड्यूटी लगती है और 2016 में तेल की कीमतों में गिरावट के साथ इसकी शुरुआत की गई थी।

 

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