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फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी घटने से इकोनॉमी को लगेगा झटका, 3.4% हो सकता है फिस्कल डेफिसिटः Moody's

पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से इकोनॉमी को तगड़ा झटका लग सकता है।

Fuel excise duty cut 'credit negative' for India, fiscal deficit may slip to 3.4%: Moody's

  

नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से इकोनॉमी को तगड़ा झटका लग सकता है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने मंगलवार को कहा कि इससे मार्च, 2019 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान सरकार के रेवेन्यू में कमी आएगी और साथ ही फिस्कल डेफिसिट 0.1 फीसदी बढ़कर जीडीपी की तुलना में 3.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगा। मूडीज ने कहा कि इससे पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की कमाई पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें 1 रुपए प्रति लीटर की कटौती का बोझ खुद उठाना पड़ेगा।

 

 

ड्यूटी घटाने से सरकार को 10,500 करोड़ रु का होगा नुकसान

गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 1.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया था, जिसके चलते सरकारी खजाने को 10,500 करोड़ रुपए के रेवेन्यू का नुकसान होगा। मूडीज ने एक स्टेटमेंट में कहा, ‘कुल मिलाकर एक्साइज ड्यूटी में कटौती इकोनॉमी के लिए नकारात्मक फैसला है, क्योंकि इससे सरकार का रेवेन्यू घट जाएगा और भारत के फिस्कल डेफिसिट में इजाफा होगा।’

अमेरिका की रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इससे सरकार के फिस्कल डेफिसिट के जीडीपी की तुलना में 3.3 फीसदी के टारगेट से चूकने का जोखिम पैदा होगा।

 

 

सरकार को घटाना पड़ेगा पूंजी खर्च

मूडीज ने कहा, ‘सरकार पहले ही वित्त वर्ष के लिए तय फिस्कल डेफिसिट के टारगेट के 94.7 फीसदी को पहले ही हासिल कर चुकी है। फिस्कल डेफिसिट बढ़ने से सरकार को अपने पूंजी खर्च में कटौती करनी होगी। हमारा अनुमान है कि इससे फिस्कल डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 3.4 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं कम्बाइंड सरकारी डेफिसिट (केंद्र और राज्य) जीडीपी के 6.3 फीसदी के स्तर पर रहना चाहिए।’

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