‘आर्थिक हादसा’ साबित हुई नोटबंदी, तबाह हो गई इकोनॉमी; मनमोहन का मोदी सरकार पर हमला

demonetisation : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 8 नवंबर को नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर तगड़ा हमला किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि समय के साथ नोटबंदी के ‘दाग और जख्म’ और भी ज्यादा स्पष्ट दिखाई देंगे। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे ‘आर्थिक हादसे’ के तौर पर याद किया जाना चाहिए और इससे देश के हर आदमी पर असर पड़ा था।

moneybhaskar

Nov 08,2018 02:52:00 PM IST

नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 8 नवंबर को नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर तगड़ा हमला किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि समय के साथ नोटबंदी के ‘दाग और जख्म’ और भी ज्यादा स्पष्ट दिखाई देंगे। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे ‘आर्थिक हादसे’ के तौर पर याद किया जाना चाहिए और इससे देश के हर आदमी पर असर पड़ा था।

आगे ऐसे अजीबोगरीब फैसले न ले सरकारः मनमोहन

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने सरकार से ऐसे अजीबोगरीब फैसले नहीं लेने की मांग की और कहा कि ऐसे अल्पकालिक फैसलों से इकोनॉमी में अनिश्चितता बढ़ सकती है। सिंह ने नोटबंदी को ‘असफल’ और ‘बिना सोचे-समझे’ लिया गया फैसला करार देते हुए कहा कि इसने भारतीय इकोनॉमी को तबाह कर दिया और सोसायटी पर इसका असर अब साफ दिख रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर, 2016 को 1,000 रुपए और 500 रुपए के बैंक नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का ऐलान किया था।

वक्त के साथ और गहरे होंगे इसके दाग

सिंह ने कहा, ‘नोटबंदी का असर हर उम्र, स्त्री-पुरुष, धर्म, नौकरीपेशा, बिजनेसमैन और हर जाति के व्यक्ति पर पड़ा।’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अक्सर ऐसा कहा जाता है कि यह समय परिवर्तनकारी है। लेकिन बदकिस्मती से नोटबंदी के मामले में, इसके दाग और जख्म समय के साथ ज्यादा स्पष्ट दिखने लगे हैं।’

अभी तक नहीं उबरे छोटे-मझोले उद्योग

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में गिरावट के बाद नोटबंदी से आई तबाही के असर अभी तक सामने आ रहे हैं। सिंह ने जोर देकर कहा कि भारतीय इकोनॉमी के केंद्र में रहे छोटे और मझोले उद्योग नोटबंदी के झटके से अभी तक उबर नहीं सके हैं।

नहीं पैदा हो रहीं नई जॉब्स

उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों के सामने पैदा हुए लिक्विडिटी के संकट से फाइनेंशियल मार्केट्स में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा, ‘इसका स्पष्ट असर इम्प्लॉयमेंट पर दिख रहा है, क्योंकि इकोनॉमी को नई जॉब्स क्रिएट करने के मामले में लगातार जूझना पड़ रहा है।’ नोटबंदी की आलोचना पर उन्होंने कहा कि नोटबंदी के पूरे असर को समझना और अनुभव करना अभी भी बाकी है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारतीय रुपए में कमजोरी और ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में तेजी के साथ मुश्किलें और भी बढ़ने लगी हैं।’

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