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मोदी ने चीन को उसी की चाल से दी मात, मालदीव में फिर बजा भारत का डंका

मुस्लिम देश ने चीन को अरबों का झटका देने का किया ऐलान

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नई दिल्ली. दो दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के मालदीव (Maldives) पहुंचने के दो दिन के भीतर वहां भारत का डंका बजने लगा है। मोदी की कुछ घंटों की विजिट का असर कुछ ऐसा हुआ है कि इस छोटे से देश ने दुनिया की महाशक्तियों में शुमार चीन को अरबों का झटका देने का ऐलान किया है। मालदीव की नई सरकार के एक टॉप लीडर ने कहा कि चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरी तरह एकतरफा है और इसे रद्द करने पर विचार किया जा रहा है।

 

रद्द होगा चीन के साथ एग्रीमेंट

बीबीसी से बातचीत में मालदीव के पूर्व प्रेसिडेंट मोहम्मद नशीद (Mohamed Nasheed) ने कहा, ‘चीन और मालदीव के बीच ट्रेड के आंकड़े मेल नहीं खाते। यह पूरी तरह एकतरफा एग्रीमेंट है।’ उन्होंने कहा कि मालदीव की पार्लियामेंट इस ट्रेड डील को मंजूरी नहीं देगी, जो इसे लागू किए जाने के लिए जरूरी है। इब्राहिम मोहम्मद सोलिह (ibrahim mohamed solih) के मालदीव के नए प्रेसिडेंट बनने के बाद उनकी यह टिप्पणी सामने आई है। नशीद नए प्रेसिडेंट सोलिह के सीनियर एडवाइजर हैं, जिन्हें सितंबर में हुए चुनाव में लड़ने के लिए बैन कर दिया गया था।

 

दोनों देशों के बीच होता है 1857 करोड़ रु का ट्रेड

ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित डाटा के मुताबिक चीन और मालदीव के बीच लगभग 25.80 करोड़ डॉलर (1857 करोड़ रुपए) का कारोबार होता है, जिसमें 99 फीसदी हिस्सेदारी चीन की है। इसमें से अधिकांश गुड्स को चीन से इंपोर्ट किया जाता है।

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रातोंरात मालदीव पहुंच गए थे मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी हाल में अचानक मालदीव पहुंच गए थे। वह नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा था। इससे पहले 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश की यात्रा की थी। पीएम मोदी ने कहा था, ‘हमारी इच्छा स्थायी, लोकतांत्रिक, संपन्न और शांतिपूर्ण मालदीव देखने की है।’

 

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चीन की हुई बोलती बंद

मालदीव के इस ऐलान पर चीन की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं मिली है। हालांकि एक सप्ताह पहले नशीद के उस बयान को मालदीव एम्बेसी ने सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें देश के चीन के कर्ज के जाल में फंसने की आशंका जाहिर की गई थी। गौरतलब है कि अब्दुल्ला यामीन की अगुआई वाली पिछली सरकार के चीन से नजदीकी संबंध थे और उसने पिछले साल चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया था।

गौरतलब है कि चीन और चीनी कंपनियों ने लग्जरी रिजॉर्ट्स और कोरल आइसलैंड्स के लिए प्रसिद्ध इस देश में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर करोड़ों डॉलर निवेश कर रखे हैं। ऐसे में नशीद के बयान को चीन के लिए तगड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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चीनी निवेश की समीक्षा करेगा मालदीव

चीन हिंद महासागर में स्थित कई छोटे देशों को अपने जाल में फंसाने के लिए हाईवेज और पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स पर अरबों डॉलर निवेश कर रहा है।
नशीद ने कहा कि चीन और चीनी कंपनियों ने मालदीव में कई आइसलैंड 50 से 100 साल की लीज पर ले लिए हैं।  पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘यदि इनमें से कोई निवेश कमर्शियल नहीं है तो हमें इसका रिव्यू करना चाहिए। बीते पांच साल के दौरान कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।’

नशीद भारत के साथ नजदीकी संबंधों को प्राथमिकता देते हैं। भारत भी मालदीव में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। पीएम मोदी उन चुनिंदा मेहमानों में शामिल थे, जो शनिवार को राजधानी माले में हुए प्रेसिडेंट सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे।

 
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