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7 साल बाद चीन पहुंचा मोदी का दोस्त, पहले ही दिन कर दीं 2 लाख करोड़ की डील

2011 के बाद पहली चीन विजिट पर पहुंचे जापान के पीएम

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बीजिंग.  7 साल तक चले टकराव के बाद अब मोदी का दोस्त चीन पहुंचा। उन्होंने न सिर्फ चीन के साथ अपने  खराब संबंधों को भुलाया, बल्कि पहले ही दिन उसके साथ 2.22 लाख करोड़ रुपए (30 अरब डॉलर) की डील कर दी। हम जापान के पीएम शिंजो आबे की बात कर रहे हैं, जिन्हें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनिंदा नजदीकी वर्ल्ड लीडर्स में शुमार किया जाता है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर में शुरू की गई ट्रेड वार ने एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले देशों को साथ आने पर मजबूर कर दिया।

 

 

पहले ही दिन हुईं अरबों की डील

जापानी पीएम ने दौरे के पहले ही दिन चीन के साथ अरबों की डील की। बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, जापान और चीन ने एक बाईलेटरल करंसी स्वैप एग्रीमेंट किया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी बढ़ाना है। इस एग्रीमेंट के तहत नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई और यह 25 अक्टूबर, 2021 तक जारी रहेगी। BOJ ने कहा कि इससे दोनों देशों के सेंट्रल बैंक 30 अरब डॉलर (2.22 लाख करोड़ रुपए) की लोकल करंसी का एक्सजेंच कर सकेंगे।  

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एशिया की बड़ी आर्थिक ताकत हैं चीन-जापान

इसके अलावा दोनों देशों ने आपसी संबंधों को और मजबूती देते हुए 2.6 अरब डॉलर की  दूसरी बिजनेस डील्स भी कीं। इससे पहले चीन के प्रीमियर ली केक्वांग ने जापानी पीएम आबे का स्वागत किया।

गौरतलब है कि एशिया की दो बड़ी आर्थिक ताकत माने जाने वाले चीन और जापान के बीच खासा टकराव देखने को मिलता रहा है। वर्ष 2012 में दोनों देशों के संबंध खासे बिगड़ गए थे, जापान ने चीन के दावे वाले एक विवादित आइसलैंड को ‘नेशनलाइज्ड’ कर दिया था।

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आबे ने क्या कहा

विजिट के दौरान आबे ने एक ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि दोनों देश ‘इस रीजन की शांति और संपन्नता में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए अहम भूमिका निभाने’ के लिए राजी हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘ट्रेड बढ़ने से जापान और चीन के लोगों के बीच संबंध और गहरे होंगे।’

 

ट्रेड वार से बढ़ीं नजदीकियां

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रेसिडेंट द्वारा शुरू की गई ट्रेड वार से जापान और चीन के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं। ट्रम्प ने जहां चीन पर भारी टैरिफ लगाए, वहीं ट्रेड डेफिसिट कम करने के लिए जापानी एक्सपोर्ट को भी टारगेट किया जा रहा है। आबे जापानी कंपनियों के लगभग 1,000 डेलीगेट्स के साथ चीन पहुंचे और उन्होंने 500 डील कीं।

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