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ईरान के आगे नहीं चली अमेरिका की दादागीरी, भारत भेज दिया तेल से भरा जहाज

अमेरि‍का ने भारत को क्रूड ऑयल न लेने की धमकी दी थी लेकि‍न ईरान ने अपने ही जहाजों में तेल भर कर भेज दि‍या।

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नई दिल्ली. भारत में ईरान से होने वाले तेल के एक्सपोर्ट के मामले में अमेरिका की दादागीरी धरी रह गई। दरअसल ईरान से ऐसा दांव चला, जिसके चलते अमेरिका की प्रतिबंध की धमकी बेअसर हो जाएगी। अमेरिका की प्रतिबंध की धमकी के बीच ईरान ने भारत को अपने जहाजों में तेल भरकर भेजना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही तेल का एक्सपोर्ट जारी रखने के लिए ईरान इन्श्योरेंस कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। गौरतलब है कि चीन के बाद भारत, ईरान के लिए दूसरा बड़ा तेल का बड़ा आयातक है।

 

 

ईरान के दांव का अमेरिका के पास नहीं है जवाब

दरअसल अमेरिका ने भारत, चीन सहित कई देशों को ईरान से तेल खरीद पर रोक लगाने के लिए 4 नवंबर की डेडलाइन तय की है। साथ ही ऐसा नहीं करने पर ईरान के साथ होने वाले किसी भी तरह के बिजनेस से जुड़ी कंपनियों को अमेरिकी इकोनॉमी या फाइनेंशियल सिस्टम में पहुंच पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। इससे बचने के लिए ईरान ने खुद ही तेल से भरे जहाज भारत भेजना शुरू कर दिया है। इससे भारत की मुश्किल लगभग खत्‍म हो गई है।

 

सऊदी के बाद ईरान, भारत के लिए दूसरा बड़ा तेल एक्सपोर्टर

2010-11 तक सऊदी अरब के बाद ईरान भारत के लिए दूसरा बड़ा क्रूड ऑयल का सप्लायर था, लेकिन न्यूक्लियर प्रोग्राम्स के संदेह में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते बाद के सालों में यह सातवें पायदान पर पहुंच गया था। 2013-14 और 2014-15 में भारत ने ईरान से क्रमशः 1.1 और 1.095 करोड़ टन तेल खरीदा था। 2015-16 में ईरान से खरीद बढ़कर 1.27 करोड़ टन पहुंच गई, जिसके साथ ही वह छठे पायदान पर पहुंच गया था। उसके बाद के साल में ईरान 2.72 करोड़ टन क्रूड की सप्लाई करके सीधे तीसरे पायदान पर पहुंच गया। 2017-18 में भारत ने ईरान से 2.26 करोड़ टन क्रूड ऑयल की खरीद की।

मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही के दौरान इराक को पीछे छोड़ते हुए ईरान दूसरे पायदान पर पहुंच गया। इस दौरान भारत ने ईरान से कुल 89.3 लाख टन ऑयल की खरीद की।

 

 

यूरोप की री-इन्श्योरेंस कंपनियों ने कवर देने से किया इनकार

अमेरिका इस साल मई में न्यूक्लियर डील से पीछे हट गया था और कहा था कि 180 दिनों के भीतर ईरान पर प्रतिबंध फिर से बहाल हो जाएंगे। अमेरिका ने ईरान से तेल का आयात या ट्रेड बंद नहीं करने वालों को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच उपलब्ध नहीं कराने की चेतावनी भी दी थी। इसके चलते यूरोप की री-इन्श्योरेंस कंपनियों ने ईरान से तेल का इंपोर्ट करने वाली कंपनियों को इन्श्योरेंस कवर उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था।

 

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इन्श्योरेंस के लिए भी आगे आया ईरान

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि इस समस्या से पार पाने के लिए ईरान ने खुद ही शिपिंग इन्श्योरेंस उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने भारत तक तेल भेजने के लिए अपने जहाजों का भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, क्योंकि ईरानी तेल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए हाल में जारी टेंडर्स में तमाम शिपिंग कंपनियों ने भाग ही नहीं लिया। इसी महीने की शुरुआत में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (एचपीसीएल) ने इन्श्योरेंस की समस्या के चलते ईरानी ऑयल कार्गो की खरीद को कैंसिल कर दिया था।

एचपीसीएल ने इस महीने की शुरुआत में रिफाइनरीज से लेकर पाइपलाइन और स्टोरेज जैसी एसेट्स का इन्श्योरेंस कराने की प्रक्रिया शुरू की तो री-इन्श्योरेंस कंपनियों ने ईरानी तेल की प्रोसेसिंग और स्टोरेज से जुड़ी घटनाओं के लिए कवर देने से इनकार कर दिया।

 

 

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2012 में भी पैदा हुए थे ऐसे हालात

सूत्रों ने कहा कि यह एक अस्थायी समस्या लगती है और 2012 में ईरान पर प्रतिबंध लगने के वक्‍त भी ऐसे ही हालात पैदा हुए थे। उस समय ईरानी ऑयल को प्रोसेस करने वाले हिस्से को छोड़कर बाकी सभी इंस्टालेशन को इन्श्योरेंस कवर उपलब्‍ध कराया गया था। इस प्रकार यदि किसी कंपनी के पोर्टफोलियो में ईरानी तेल की 10 फीसदी हिस्सेदारी है, तो बाकी 90 फीसदी प्रोसेसिंग के लिए इन्श्योरेंस कवर मुहैया कराया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि एचपीसीएल की समस्या का हल जल्द ही निकाल लिया जाएगा और एक कार्गो के कैंसिलेशन की मुख्य वजह नई इन्श्योरेंस कंपनी का रिन्यूएबल के लिए आगे आना है। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) जैसी अन्य कंपनियां 2-3 महीनों में अपने इन्श्योरेंस कवर को रिन्यू कराएंगी, तब तक ईरान के मामले में तस्वीर भी साफ हो जाएगी।


 

ट्रम्प सरकार बना रही है भारत-चीन पर दबाव

अमेरिका की डोनाल्ड ट्रम्प सरकार भारत, चीन और अन्य खरीददार देशों पर ईरान से तेल की खरीद बंद करने के लिए दबाव बना रही है। अमेरिका ने इसके लिए 4 नवंबर की डेडलाइन तय की है। ऐसा नहीं करने की स्थिति में ईरान के साथ डीलिंग करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

 
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