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दुनिया में बढ़ा ट्रेड वार का डर, चीन ने 106 अमेरिकी प्रोडक्ट पर लगाया 25% अतिरिक्त टैरिफ

चीन ने 106 अमेरिकी प्रोडक्ट की लिस्ट जारी कर दी है, जिसके इंपोर्ट पर 25 फीसदी फीसदी अतिरिक्त ड्यूटी ली जाएगी।

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बीजिंग/वाशिंगटन। दुनिया में ट्रेड वार बढ़ने का डर बढ़ता जा रहा है। अब चीन ने यूएस को उसी के अंदाज में जवाब देते हुए 106 अमेरिकी प्रोडक्ट की लिस्ट जारी कर दी है, जिसके इंपोर्ट पर 25 फीसदी अतिरिक्त ड्यूटी ली जाएगी। यूएस से चीन में इंपोर्ट होने वाले इन प्रोडक्ट्स में सोयाबीन, प्लेन, कार, व्हिस्की और केमिकल्स शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन की मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स का कहना है कि टैरिफ को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे चीन को सालाना 5000 करोड़ डॉलर हासिल हो। पहले यूएस ने चीन से इंपोर्ट होने वाले प्रोडक्ट पर 5000 करोड़ डॉलर का टैरिफ लगाया था। 

 

24 घंटे के अंदर उठाया कदम

बता दें कि यूएस ने चीन से इंपोर्ट होने वाले उन प्रोडक्ट्स की लिस्ट जारी की है, जिन पर 25 फीसदी की दर से अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया गया था। जिसके 24 घंटे के भीतर ही चीन ने अपनी लिस्ट जारी की दी। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने कहा कि प्रोडक्ट्स की यह लिस्ट अलग-अलग एजेंसियों के बीच आर्थिक विश्‍लेषण के बाद तैयार की गई है। इसमें चीन के उन प्रोडक्ट्स को शामिल किया गया है, जिन्हें चीन की औद्योगिक योजना से फायदा मिल रहा है। इनका अमेरिका की इकोनॉमी पर कम से कम असर होगा। 

 

US ने इन चीनी प्रोडक्ट की लिस्ट जारी की  
अमेरिका ने जिन प्रोडक्ट्स की लिस्ट जारी की है, उनमें एविएशन, टेलिकम्युनिकेशंस, रोबोटिक्स और मशीनरी जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इनमें 13000 के करीब प्रोडक्ट शामिल हैं। इनकी लिस्ट सार्वजनिक तौर पर जारी कर उस पर लोगों से कमेंट मांगे जाएंगे। जरूरत पर सुनवाई भी होगी। प्रॉसेस पूरा हो जाने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कार्यालय ऐसे प्रोडक्ट्स की अंतिम लिस्ट जारी कर देगा, जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। 

 

दुनियाभर के बाजारों पर असर 
आज के कारोबार में ट्रेड वार बढ़ने के डर से दुनियाभर के बाजारों में दबाव दिख रहा है। हैंगसेंग में 661 अंकों की गिरावट है, वहीं, KOSPI में 34 अंकों, स्ट्रेट टाइम्स में 65 अंक, FTSE में 34 अंक, CAC40 में 37 अंक और DAX में 144 अंकों की गिरावट है। वहीं, डाओ फ्यूचर्स में 285 अंकों की गिरावट है।

 

बढ़ सकता है ट्रेड वार का दायरा
आर्थिक मामलों के जानकार पनिंदकर पई का कहना है कि मौजूदा समय में अमेरिका नेशन फर्स्ट की पॉलिसी पर काम कर रहा है। अगर यूएस इसी तरह से एग्रेसिव ट्रेड पॉलिसी पर काम करता रहा तो दूसरे बड़ी इकोनॉमी वाले देश भी यूएस के साथ नेशन फर्स्ट की पॉलिसी पर काम करना शुरू कर देंगे। इसमें चीन, जापान और यूरोपीय देशों की प्रमुख भूमिका हो सकती है। ऐसे में इस बात का डर बन गया है कि 2 देशों के बीच शुरू हुए ट्रेड वार की आंच कई देशों तक फैल जाएगी। ऐसा हुआ तो ट्रेड वार में फंसे देशों के साथ दूसरे देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, जिससे नेशनल इनकम कमजोर होगी। पई ने इस संभावना से भी इंकार नहीं किया कि अगर ट्रेड वार लंबा खिंचता है तो दुनिया एक और मंदी की ओर जा सकती है। 

 

भारत के मुकाबले चीन के साथ कई गुना ट्रेड डेफिसिट   

 

एस जहां चीन को 13040 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट करता है, वहीं, चीन से वह 50560 करोड़ डॉलर का इंपोर्ट करता है। यानी चीन के साथ व्यापार घाटा 37500 करोड़ रुपए है। चीन यूएस के साथ लीडिंग ट्रेड पार्टनर है, वहीं भारत टॉप ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल नहीं है। हालांकि भारत बड़ी मात्रा में यूएस में आईटी सर्विस, टेक्सटाइल, कीमती पत्थरों का निर्यात करता है। वहीं, जापान के साथ यूएस का व्यापार घाटा 6880 करोड़ डॉलर, जर्मनी के साथ 5420 करोड़ डॉलर और मैक्सिको के साथ 7100 करोड़ डॉलर है। वहीं, इस तुलना में भारत के साथ यूएस का व्यापार घाटा करीब

2290 करोड़ डॉलर है जो बहुत कम है। 

 

ट्रेड वार से भारत कितना सेफ​ 
ट्रेड वार की आंच भारत तक पहुंचेगी, इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यूएस ने जिस तरह से चीन से आयात पर टैरिफ लगाया है, उसी तरह से वह भारत से आयात होने वाले इंपोर्ट पर भी ड्यूटी बढ़ा सकता है। असल में भारत के साथ भी यूएस का कारोबार देखें तो घाटे में अमेरिका ही है। भारत का यूएस के साथ व्यापार WTO के नियमों और 2005 के ट्रेड पॉलिसी फोरम के आधार पर होता है। पिछले साल भारत-अमेरिका में 6700 करोड़ डॉलर का करोबार हुआ था।

 

वहीं, चीन के साथ 7148 करोड़ डॉलर का कारोबार भारत ने किया था। यानी ट्रेड पार्टनर की बात करें तो भारत-अमेरिका, भारत-चीन आपस में बड़े ट्रेड पार्टनर हैं। भारत के लिहाज से अमेरिका और चीन टॉप ट्रेड पार्टनर हैं। ऐसे में अगर यूएस-चीन के बीच वार से व्यापारिक माहौल बिगड़ता है तो इसका असर भारत पर पड़ना तय है।

 

 

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