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नॉर्थ कोरिया में शांति से भारत की एक्ट ईस्ट मार्केट्स पॉलिसी को मिलेगा विस्तारः इंडस्ट्री ऑब्जर्वर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और नॉर्थ कोरियाई लीडर किम जॉन्ग-उन की मीटिंग सफल होने से भारत को भी फायदा हो सकता है।

Industry says Peaceful North Korea can expand India s Act East markets

सिंगापुर. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और नॉर्थ कोरियाई लीडर किम जॉन्ग-उन की मीटिंग सफल होने से भारत को भी फायदा हो सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बदले हालात में भारत के लिए नॉर्थ कोरिया एक इमर्जिंग मार्केट बन सकता है। 
ट्रम्प और किम की पहली मीटिंग मंगलवार को होगी और दोनों लीडर्स की पहली मुलाकात के बाद नॉर्थ कोरिया अपने न्यूक्लियर वीपन्स को नष्ट करने का प्रॉसेस शुरू कर सकती है।

 

 

पूर्वी एशिया पर फोकस बढ़ाना चाहता है भारत
इंडस्ट्री से जुड़े एक सोर्स ने कहा, ‘भारत ने आसियान के साथ ही पूर्वी एशिया पर अपना फोकस बढ़ाना शुरू कर दिया है और नॉर्थ कोरिया जैसे एक नए मार्केट का जुड़ना देश की निर्यात केंद्रित इंडस्ट्रीज के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा।’

 

 

मोदी सरकार ने पेश की थी एक्ट ईस्ट पॉलिसी
दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारत सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी की पेशकश की थी, जिसमें एशिया-पैसिफिक रीजन के पड़ोसी देशों के साथ मेलजोल पर ध्यान केंद्रित किया गया था। सोर्स ने कहा कि समिट के नतीजों के प्रति आशावादी होना अच्छा होगा। वहीं ट्रम्प और किम खुद को मजबूत लीडर समझते रहे हैं, ऐसे में कुछ आशंकाएं भी बरकरार रहेंगी। 

 

 

समिट में भाग लेना किम का साहसी कदम
एक अन्य सोर्स ने संतुलित रुख जाहिर करते हुए कहा कि किम ने ग्लोबल पीस के लिए ट्रम्प के साथ समिट में भाग लेकर एक साहसी कदम उठाया है, हालांकि समिट के भविष्य को लेकर कुछ अनुमान लगाना फिलहाल जल्दबाजी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी इस ऐतिहासिक समिट पर नजर है। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में सिंगापुर में शांगरी ला डायलॉग में दिए संबोधन में शांतिपूर्ण और सुरक्षित रीजन पर जोर दिया। 
सोर्स ने कहा, ‘इस घटनाक्रम पर बात करें तो हमें भरोसा है कि अमेरिक व नॉर्थ कोरिया के अधिकारियों के साथ ही मेजबान देश सिंगापुर ने काफी हद तक जमीनी कार्य कर लिए हैं।’

 

 

भारत के लिए काफी कुछ है दांव पर
एक अन्य इंडस्ट्री ऑब्जर्वर ने कहा कि भले ही इस समिट में भारत सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन जाहिर तौर पर शांतिपूर्ण विश्व के दर्शन के साथ काम करने वाले भारत के लिए ऐसे इंटरनेशन इवेंट्स में काफी कुछ दांव पर है।
एक ऑब्जर्वर ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई इकोनॉमी है और सभी के लिए मित्र देश है। उन्होंने कहा कि भारत के अमेरिका के साथ-साथ सिंगापुर से भी मजबूत डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक रिलेशन हैं। साथ ही भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए सिंगापुर एक अच्छा प्लेटफॉर्म है। 
अमेेरिका डिन्यूक्लियराइज और सुरक्षित दुनिया के साथ ही नॉर्थ कोरिया में इकोनॉमिक डेवलपमेंट को सपोर्ट करने में दिलचस्पी के साथ समिट पर काम कर रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समिट के सफल होने पर नॉर्थ कोरिया नए अवसरों की पेशकश करने वाली ईस्ट एशियन इकोनॉमीज का हिस्सा बन जाएगा। 

 

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