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मोदी जो करने में रहे नाकाम, इमरान ने कर दिखाया वह काम

भारत की तरह पाक ने की सेंट्रल बैंक के अधिकार कम करने की कोशिश

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली सरकार लंबी कोशिशों के बाद भी जो काम नहीं कर पाई, अब वही काम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) पाकिस्तान में करने जा रहे हैं। हालांकि यह कहना सही होगा कि इमरान ने काफी हद ऐसा कर भी दिया है। दरअसल मोदी सरकार ने भारत में रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकार कम करने की कोशिश कई महीने से कर रही है। इसको लेकर सरकार को भारत ही नहीं कई ग्लोबल एक्सपर्ट्स की तरफ से आलोचना का शिकार होना पड़ा था। अब इमरान खान की अगुआई वाली पाकिस्तान सरकार यही काम करने जा रही है।

 

मोदी सरकार ने भी की थी ऐसी कोशिश

गौरतलब है कि हाल के दिनों में मोदी सरकार ने भी कुछ ऐसी ही कोशिश की थी। सरकार ने जहां आरबीआई के अधिकारों में कटौती की कोशिश की, वहीं मोदी सरकार ने आरबीआई से उसके रिजर्व में 3.6 लाख करोड़ रुपए की मांग भी की थी। इसको लेकर मोदी सरकार एक्सपर्ट्स और अपोजिशन के निशाने पर आ गई थी।

 

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इमरान सरकार बनाएगी कमेटी

पाकिस्तान सरकार ने एक ऐसी कमेटी बनाने का ऐलान किया है, जिसे वहां का सेंट्रल बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान किसी भी तरह के करंसी एडजस्टमेंट के बारे में तुरंत सूचित करेगा। इमरान सरकार के इस कदम को बैंकिंग रेग्युलेटर के अधिकारों को कम करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इन दिनों पाकिस्तान सरकार इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड से बेलआउट पैकेज के लिए बात कर रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कदम से उसे बेलआउट लेने में दिक्कत हो सकती है।

 

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स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने पांचवीं बार कमजोर किया रुपया

हाल में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इस साल पांचवीं बार रुपया कमजोर किया था और इंटरेस्ट रेट बढ़ा दी थी। प्रधानमंत्री इमरान खान हाल में रिपोर्टर्स से बातचीत में कहा कि मुझे मीडिया रिपोर्ट्स से रुपए के डिवैल्युएशन के बारे में पता लगा और प्रस्तावित कमेटी से सेंट्रल बैंक के लिए करंसी में उतार-चढ़ाव को थामने में मदद मिलेगी।

कराची में जेएस ग्लोबल कैपिटल के डिप्टी रिसर्च हेड ने कहा, ‘इसका साफ मतलब सेंट्रल बैंक के स्वतंत्र फैसले लेने के अधिकारों में कटौती है। इसका इकोनॉमी पर निगेटिव असर पडे़गा और आईएमएफ से बातचीत में यह बड़ी बाधा साबित हो सकती है।’

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मोदी सरकार और आरबीआई में हुआ था टकराव

बीते कुछ महीनों के दौरान आरबीआई के अधिकारों में कटौती की कोशिशों को लेकर मोदी सरकार एक्सपर्ट्स और अपोजिशन के निशाने पर आ गई थी। इसको लेकर आरबीआई और सरकार के बीच भी खासी तनातनी देखने को मिली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपए की मांग पर अड़ गई थी। मोदी सरकार इस मांग को लेकर रिजर्व बैंक पर दबाव बना रही थी।

 

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मोदी सरकार को देनी पड़ी थी सफाई

ऐसे हालात में मोदी सरकार को सफाई तक जारी करनी पड़ी थी। सरकार ने कहा था कि वह आरबीआई की स्वायत्ता का सम्मान करती है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने कहा था कि आरबीआई गवर्नर अर्थव्यवस्था की प्राथमिकताओं को स्वीकार करे।

इससे पहले रिजर्व बैंक ने 3.6 लाख करोड़ रुपए के सरप्लस फंड को सरकार को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।केंद्र सरकार ने सुझाव दिया था कि सरप्लस को सरकार और आरबीआई दोनों मिलकर मैनेंज करे, क्योंकि वित्त मंत्रालय की नजर में आरबीआई का फंड ट्रांसफर से जुड़ा सिस्टम काफी पुराना है। वहीं आरबीआई का मानना है कि सरकार की आरबीआई से इस तरह से इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा।

 
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