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अब पाकिस्तान को तभी मिलेगा उधार, जब खोलेगा चीन के साथ दोस्ती के राज

IMF ने कहा-पाक को चीन से लिए कर्ज का खुलासा करना होगा

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नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) जल्द ही पाई-पाई को मोहताज हो सकता है। दरअसल उसका विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के करीब है। उसकी मुसीबत तब और बढ़ गई, जब इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) उसे कर्ज देने से हाथ खड़े कर दिए। IMF ने कहा कि अगर उसे उधार चाहिए तो अपने कुल कर्ज का खुलासा करना होगा, जिसमें सदाबहार दोस्त चीन से लिया गया पैसा भी शामिल है।

 

 

 

पाकिस्तान को 10 अरब डॉलर की है जरूरत

गौरतलब है कि पाकिस्तान के स्टेट बैंक ने सरकार को बताया है कि उसके पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 10 अरब डॉलर के फंड की जरूरत है, जिसे आईएमएफ की मदद के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से विश्व की सभी इकोनॉमीज पर असर पड़ा है और पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा शिकार हुआ है।

तेल की कीमतों में हुए इजाफे की वजह से पाकिस्तान के आयात बिल में इजाफा हुआ है और इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली हो रहा है और रुपये के बर्बाद होने से उसे कोई राहत नहीं मिल रही है।

 
 

पाक को बताना होगा, चीन से कितना लिया कर्ज

IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीन लैगार्डे ने कहा कि किसी को कर्ज देने से पहले उस देश की कर्ज चुकाने की क्षमता के आकलन के लिए ऐसा करना जरूरी है। इसमें चीन द्वारा बेल्ट एंड रोड बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए पाकिस्तान को दिए गए कर्ज भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि चीन ने पोर्ट्स, रेलवे और रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर के विसाक के लिए पाकिस्तान को 60 अरब डॉलर की फाइनेंसिंग करने का वादा किया है, लेकिन कर्ज का स्तर बढ़ने से पाकिस्तान को सबसे बड़े बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट का साइज घटाकर 2 अरब डॉलर करना पड़ा है।

 

 

कर्ज देने से पहले पूरी जानकारी लेता है आईएमएफ

पाकिस्तान द्वारा चीन से लिए गए कर्ज पर लैगार्डे ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘जब भी हम कोई कर्ज देते हैं, तो संबंधित देश पर मौजूद कर्ज के नेचर, साइज और शर्तों की जानकारी लेते हैं।’

अमेरिका भी चीन द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए जा रहे कर्ज की आलोचना कर चुका है। अमेरिका ने आगाह किया कि ऐसे विकासशील देशों पर कर्ज लादना दुखद है, जो कर्ज लौटा नहीं सकते हैं। अमेरिका ने कहा कि आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को बेलआउट देना सही नहीं है, क्योंकि अभी उसे चीन का कर्ज भी लौटाना है।

आगे पढ़ें- तालिबान के खिलाफ लड़ाई में पाक नहीं कर रहा सपोर्ट

 

 

तालिबान के खिलाफ लड़ाई में पाक नहीं कर रहा सपोर्ट

माना जा रहा है कि अमेरिका की अगुआई में तालिबान के खिलाफ चल रही लड़ाई में पाकिस्तान से कोई सपोर्ट नहीं मिलने के कारण वह अब उसे कोई राहत देने के मूड में नहीं है।

लैगार्डे ने कहा कि आईएमएफ के लिए पाकिस्तान के हर तरह के कर्ज के बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही पाकिस्तान को कर्ज देने पर फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बाली में हुए एक प्रोग्राम के दौरान आईएमएफ से सहयोग मांगा था। उन्होंने कहा, ‘आने वाले दिनों में आईएमएफ की एक टीम इस्लामाबाद का दौरा करेगा। उस दौरान संभावित आईएमएफ सपोर्टेड इकोनॉमिक प्रोग्राम पर चर्चा होगी।’

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12 बार आईएमएफ से बेलआउट ले चुका है पाक

उधर हाल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल में घोषणा की थी कि बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस की समस्या को कम करने के लिए वह वित्तीय सहायता मांगेंगे। इस ऐलान के बाद पाकिस्तानी रुपया 7 फीसदी कमजोर हो गया था।

अगर पैकेज पर सहमति बन जाती है तो यह 1988 के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ से मिलने वाला 13वां बेलआउट होगा। 2013 में पाकिस्तान ने 6.7 अरब डॉलर का कर्ज लिया था।

 
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