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भारत करने जा रहा दुनिया की सबसे बड़ी फाइटर प्लेन की डील, 110 जेट के लिए प्रोसेस शुरू

सरकार ने इंडियन एयरफोर्स को मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

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नई दिल्ली. भारत ने शुक्रवार को 110 लड़ाकू विमान खरीदने का प्रोसेस शुरू कर दिया है। इसे हाल के दिनों में दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी डील माना जा रहा है। यह डील 15 अरब डॉलर (98 हजार करोड़ रुपए) की हो सकती है। इससे एयरफोर्स की प्रहार करने की क्षमता में खासा इजाफा होगा। खास बात यह है कि इस ऑर्डर में देश में लड़ाकू विमानों का निर्माण भी शामिल है।


भारत में भी बनाए जाएंगे लड़ाकू विमान
अधिकारियों के मुताबिक, इस संबंध में रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन (आरएफआई) या इनीशियल टेंडर जारी कर दिया गया है। इसके तहत डिफेंस सेक्टर में सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ इनीशिएटिव के तहत खरीद की जाएगी।
सरकार ने लगभग 5 साल पहले इंडियन एयरफोर्स के लिए 126 मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) खरीदने के प्रोसेस खरीदने के प्रोसेस को रद्द कर दिया था। यह सरकार का लड़ाकू विमान का पहला मेगा प्रोक्योरमेंट इनीशिएटिव है।


2016 में 36 राफेल के लिए की थी डील
इसके बजाय एनडीए सरकार ने सितंबर, 2016 में लगभग 59 हजार करोड़ रुपए में 36 राफेल ट्विन इंजन जेट खरीदने के लिए फ्रांस सरकार के साथ डील की थी। एयरफोर्स 36 अतिरिक्त राफेल खरीदने को भी उत्सुक है। हालांकि अभी सरकार ने अभी तक इस पर फैसला नहीं किया है।


फ्लाईवे कंडीशन में होंगे 15 फीसदी जेट
आरएफआई में जहां 110 एयरक्राफ्ट की खरीद का उल्लेख किया गया है, वहीं डिफेंस मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने लड़ाकू विमानों की संख्या 114 बताई है। आरएफआई के मुताबिक, कुल लड़ाकू विमानों में तीन-चौथाई सिंगल सीट एयरक्राफ्ट होंगे, वहीं बाकी ट्विन सीट होंगे।
कम से कम 85 फीसदी एयरक्राफ्ट मेड इन इंडिया होंगे, वहीं 15 फीसदी प्लाईवे कंडीशन में होंगे।


मेक इन इंडिया के तहत होगी डील
अधिकारियों ने कहा कि लड़ाकू विमानों को विदेशी एयरक्राफ्ट मेकर द्वारा एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर बनाया जाएगा। इसमें हाल में लॉन्च किए गए स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्रोडक्शन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य हाई-एंड डिफेंस टेक्नोलॉजी को भारत में लाना है।  

इन कंपनियों के बीच होगी होड़
अग्रणी मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्रोड्यूसर्स लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, साब, दसाल्ट और रूसी एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन मिग आदि शामिल हैं, जिनके बीच मेगा डील को हथियाने की होड़ देखने को मिलेगी।


एयरफोर्स लंबे समय से बना रही थी प्रेशर
एयरफोर्स लगातार अपने फाइटर स्क्वाड्रन की कमजोर होती ताकत का हवाला देते हुए एयरक्राफ्ट खरीदने के प्रोसेस में तेजी लाने का दबाव बना रही थी। वहीं एयरफोर्स से कुछ पुराने पड़ चुके जेट हटाए जा रहे हैं।

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