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पाक की चाल पर भारी पड़ा मोदी का स्टाइल, एक मीटिंग से ही बचा लिए 20 हजार करोड़

मोदी ने अपने ही अंदाज में भारत का कराया 5 गुना फायदा

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नई दिल्ली. पाकिस्तान अपनी शातिराना चाल से भले ही 4300 करोड़ रुपए बचाने के लिए अपनी पीठ ठोक रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में भी उस पर भारी पड़ गए हैं। पीएम मोदी ऐसे ही एक काम को भारत के लिए अंजाम दे चुका हैं, लेकिन उनका अंदाज भी बिल्कुल अलग रहा था। दरअसल पीएम मोदी ने मार्च, 2015 में कतर के साथ एक एग्रीमेंट करके भारत के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की बचत का रास्ता साफ किया था। 


 

ऐसे हुई थी 20 हजार करोड़ रुपए की बचत
पीएम मोदी ने खुद संसद में माना था कि कतर के साथ एलएनजी (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) खरीदने के लिए हुई डील से भारत को 8,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। इसके साथ ही भारत को इस डील से 12 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त बचाने में कामयाबी हासिल की थी। दरअसल वर्ष 2015 में कतर से एलएनजी की कम मात्रा में खरीद के कारण पुरानी डील की शर्तों के कारण भारत पर 12 हजार करोड़ रुपए की पेनल्टी बनती थी। 
मार्च, 2015 में जब कतर के शासक शेख तामिम बिन हमाम अल थानी भारत के दौरे पर आए थे, तो दोनों देशों के बीच ऐसा एग्रीमेंट हुआ जिससे भारत 12 हजार करोड़ रुपए की पेनल्टी देने से बच गया। इस प्रकार मोदी ने अपने ही स्टाइल में देश के 20 हजार करोड़ बचाने में कामयाबी हासिल की। 

 

 

पाकिस्तान को चलनी पड़ी शातिर चाल
वहीं पाकिस्तान को ऐसे ही एक काम के लिए शातिर चाल चलनी पड़ी थी। हाल में आई ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016 में एलएनजी की कीमतों को घटाने के लिए कतर के साथ टकराव हो गया। ऐसे में पाकिस्तान ने ऐसी चाल चली, जिसका कतर के पास कोई जवाब नहीं था। 
दरअसल टकराव बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने गैस के 120 कार्गो खरीदने के लिए दो बड़े ग्लोबल टेंडर जारी कर दिए थे। इसके माध्यम से उसे यूके की रॉयल डच शेल और बीपी सहित कई सप्लायर्स से बिड हासिल हुईं।

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ऐसे पाकिस्तान ने बचाए 4300 करोड़ रु
हाल में पाकिस्तानी कंपनी पाकिस्तान स्टेट ऑयल (पीएसओ) ने खुद अपने इस दांव को स्वीकार किया। कंपनी ने अपने प्रिजेंटेशन में कहा कि जहां कतरगैस ऑपरेटिंग कंपनी से उसकी बातचीत चल रही थी, वहीं उसे कई बिड्स और अच्छी कीमतों के विकल्प भी मिले। पीएसओ ने कहा, ‘इस स्ट्रैटजी से कतरगैस के साथ कीमतों को कम करने में मदद मिली और देश के लगभग 61 करोड़ डॉलर (4300 करोड़ रुपए) की बचत हुई।’

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स्विट्जरलैंड से मिली सबसे कम कीमत की बिड
तब पाकिस्तान ने कतर को सबसे कम कीमत की बिड के बारे में बताया, जो स्विट्जरलैंड की गनवोर ( Gunvor Group Ltd) ग्रुप से मिली थी। बाद में कतर नई कीमत पर गैस सप्लाई के लिए राजी हो गया, हालांकि पाकिस्तान ने दिए गए पहले टेंडर के क्रम में गनवोर से भी गैस खरीदी। लेकिन दूसरे टेंडर को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और कतर डील को पूरा कर लिया गया।

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पाकिस्तान की तमाम फैक्ट्रियां हुईं बंद
आखिरकार कतर के साथ डील के बाद पाकिस्तान बड़े एलएनजी बायर के तौर पर सामने आया और उसकी 15 साल के लिए सालाना 37.5 लाख टन गैस खरीदने की डील हुई। इसके चलते पावर का प्रोडक्शन घट गया और पाकिस्तान की तमाम फैक्ट्रियां बंद होने के मजबूर हो गईं। हालांकि 2016 के बाद पाकिस्तान का इंपोर्ट तेजी से बढ़ा और वह एलएनजी इंपोर्ट करने वाला दुनिया का 7वां बड़ा देश बन गया। पाकिस्तान में सरकारी एजेंसियों और विदेशी एलएनजी सप्लायर्स के बीच हुई इस बातचीत की खासी आलोचना भी हुई। कुछ ने दावा किया कि करप्शन को छिपाने के लिए इस डील में ट्रांसपरेंसी नहीं बरती गई।

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