Home » Economy » InternationalFitch keeps India rating unchanged for 12th yr in a row

Fitch ने लगातार 12वें साल अपग्रेड नहीं की भारत की सॉवरेन रेटिंग, BBB- पर बरकरार

Fitch ने कहा कि कमजोर वित्तीय स्थिति से रेटिंग पर प्रेशर बरकरार रहा और मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक पर खासे जोखिम बने हुए हैं।

Fitch keeps India rating unchanged for 12th yr in a row

नई दिल्ली. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch) ने लगातार 12वें साल भारत की क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड करने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने गुरुवार को भारत की सॉवरेन रेटिंग स्टेबल आउटलुक के साथ ‘बीबीबी माइनस’ बरकरार रखी, जो सबसे निचला इन्वेस्टमेंट ग्रेड है। फिच ने कहा कि कमजोर वित्तीय स्थिति से रेटिंग पर प्रेशर बरकरार रहा और मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक पर खासे जोखिम बने हुए हैं। फिच रेटिंग्स के इस फैसले को पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है।

 

 

भारत सरकार बना रही थी रेटिंग एजेंसियों पर प्रेशर

गौरतलब है कि सरकार नवंबर 2017 में मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस द्वारा भारत की रेटिंग अपग्रेड किए जाने के बाद लगातार फिच पर रेटिंग में सुधार के लिए दबाव बना रही है। मूडीज ने 2004 के बाद पहली बार भारत की सॉवरेन रेटिंग को अपग्रेड किया था। वहीं फिज ने इससे पहले 1 अगस्त, 2009 में भारत की सॉवरेन रेटिंग बीबीबी माइनस से अपग्रेड करके स्टेबल आउटलुक के साथ बीबी प्लस की थी।

 

 

फाइनेंशियल सेक्टर की स्थिति बताई कमजोर

ग्लोबल एजेंसी ने अपने बयान में कहा, ‘फिच रेटिंग्स ने भारत की लॉन्ग टर्म फॉरेन करंसी इश्युअर डिफॉल्ट रेटिंग (आईडीआर) स्टेबल आउटलुक के साथ बीबीबी माइनस पर बरकरार रखी है।’ रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘मजबूत मीडियम टर्म ग्रोथ आउटलुक और अनुकूल एक्सटर्नल बैलेंस की तुलना में कमजोर फिस्कल फाइनेंस, संकटग्रस्त फाइनेंशियल सेक्टर और  स्ट्रक्चरल फैक्टर्स में सुस्ती से संतुलन की स्थिति बनी हुई है।’

 

इन वजहों से इकोनॉमी पर बना हुआ है दबाव

फिच ने कहा, ‘मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक के प्रति जोखिम खासे ज्यादा हैं और बैंकिंग या शैडो बैंकिंग सेक्टर में समस्याओं के चलते क्रेडिट ग्रोथ में सुस्ती बनी हुई है। कमजोर फिस्कल पोजिशन के कारण भारत की सॉवरेन रेटिंग्स पर दबाव बना हुआ है।’

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सरकारी कर्ज जीडीपी का 70 फीसदी हो चुका है और जीएसटी सहित अन्य रेवेन्यू में कमी के चलते वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में जीडीपी की तुलना में 3.3 फीसदी का डेफिसिट टारगेट हासिल होना मुश्किल है। इसके अलावा आम चुनावों के चलते खर्च को कंट्रोल करना मुश्किल नजर आ रहा है।

 
prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट