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भारत की घेराबंदी के लिए चीन ने चला बड़ा दांव, चुना बांग्लादेश का रूट

4300 करोड़ में बनाएगा पोर्ट, श्रीलंका-पाकिस्तान में भी कर चुका है ऐसा ही खेल

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नई दिल्ली. पाकिस्तान, श्रीलंका के बाद चीन अब बांग्लादेश के रास्ते भारत की घेराबंदी करने जा रहा है। इसके लिए उसने बांग्लादेश के साथ 60 करोड़ डॉलर यानी 4300 करोड़ रुपए की बड़ी डील की है, जिसके तहत चीन, बांग्लादेश के पायरा डीप-सी बंदरगाह (payra deep-sea) का निर्माण करेगा। इस बंदरगाह को सामरिक लिहाज से खासा अहम माना जाता है। इससे वह भारतीय समुद्र तट के काफी करीब पहुंच जाएगा और हिंद महासागर के एक बड़े हिस्से पर नजर रख सकेगा।

 

बांग्लादेश के साथ किया बड़ा समझौता

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, चीन ने दिसंबर, 2016 में अपने जिओपॉलिटकल इकोनॉमिक कॉरिडोर से ओबोर यानी OBOR (one belt one road) के साथ जुड़ने के लिए बांग्लादेश के साथ समझौता किया था। इस प्रोजेक्ट को बीआरआई (BRI) भी कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा प्रायोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से एशियाई देशों को जोड़ना है। इसे चीनी विशेषज्ञ 21वीं सदी की 'सिल्क रोड' (silk road) भी कहते हैं।

 

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पायरा पोर्ट को करेगा डेवलप

इस क्रम में चीन, बांग्लादेश के पायरा डीप-सी पोर्ट के विकास में भी खासी दिलचस्पी दिखा रहा है। चीन की दो कंपनियों चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (CHEC) और चाइना स्टेट कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग (CSCEC) इस पोर्ट के अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बांग्लादेश के साथ 60 करोड़ डॉलर की डील की है। इस डील में हाउसिंग, हैल्थकेयर, एजुकेशन आदि इन्फ्रा का विकास भी शामिल है।

 

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पोर्ट को कंट्रोल में लेने की मंशा पर काम कर रहा चीन

बांग्लादेश में मौजूद अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि इस भारी भरकम निवेश के द्वारा अपनी वास्तविक मंशा को छिपाना चाहता है और हकीकत में तो वह सामरिक लिहाज से अहम बांग्लादेश के इस पोर्ट को अपने कंट्रोल में लेना चाहता है। चीन ने श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट को लेकर भी इसी रणनीति पर काम किया था।

 

 
श्रीलंका के पोर्ट को भी कंट्रोल में ले चुका है चीन

OBOR प्रोग्राम के अंतर्गत चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास के लिए पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की अगुआई वाली तत्कालीन सरकार को अरबों डॉलर का कर्ज दिया था, जिसमें हम्बनटोटा पोर्ट का विकास उसकी प्राथमिकता में था। हालांकि श्रीलंका पर कर्ज बढ़ता गया और वर्ष 2017 में 99 साल की लीज के माध्यम से चीन ने इस पोर्ट को अपने नियंत्रण में ले लिया।

 

चारों तरफ से कर रहा भारत की घेराबंदी

ढाका में भी चीन अपनी पुरानी रणनीति पर ही काम कर रहा है और सीएचईसी और सीएससीईसी चीन की सरकारी कंपनियां हैं। ऐसे में चीन को पायरा पोर्ट का कंट्रोल अपने हाथ में लेने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बंगाल की खाड़ी में स्थितपायरा शिपिंग पोर्ट को सामरिक लिहाज से खासा अहम माना जाता है। इस पोर्ट के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में चीन की पहुंच बढ़ जाएगी। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट में भी वह ऐसा ही कर चुका है, जिससे उसकी पहुंच अरब सागर तक हो गई। 

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