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Modi Putin Meet: बदलते हालात ने कराई मोदी-पुतिन की मुलाकात, 6 प्‍वाइंट में समझें पीछे की कहानी

अमेरिका के कुछ बड़े कदमों ने दुनिया के जियो पॉलिटिकल हालात तेजी के साथ बदले हैं...

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नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपति ब्‍लादिमीर पुतिन के बीच सोमवार को हुई अनौपचारिक मुलाकात पर दुनियाभर की नजर रही। तेजी से बदल रहे ग्‍लोबल हालात में दो पुराने दोस्‍तों का इस तरह मिलना राजनीतिक, कूटनीतिक, सामरिक समेत कई लिहाज से अहम है। सोचि में पुतिन गर्मजोशी के साथ मोदी से मिले, वहीं मोदी ने मुलाकात के लिए न्योता देने पर पुतिन को धन्यवाद दिया। 

 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस को भारत का पुराना दोस्‍त करार दिया। दोनों नेताओं के बीच क्‍या बात हुई, इस बारे में बहुत खुलकर बातें सामने नहीं आ पाईं। डिप्‍लोमेसी से जुड़े जानकार मानते हैं कि वास्‍तव में अनौपचारिक मुलाकात का मतलब ही यही होता है। कई बार नेता भविष्‍य के साझा मुद्दों को तय करने के लिए भी इस तरह की मुलाकात करते हैं। 

 

नई दिल्‍ली स्थित रसियन स्‍टडी सेंटर के प्रोफेसर और रूस मामलों के जानकार राजन कुमा‍र इस अनौपचारिक मुलाकात के पीछे कई कारण देखते हैं। अमेरिका के कुछ बड़े कदमों ने दुनिया के जियोपॉलिटिकल हालात तेजी के साथ बदले हैं। खासकर अमेरिका की ओर से ईरान पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिकी संसद की ओर से काटसा कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद।  इसके अलावा घरेलू राजनीति में विपक्ष के साथ मीडिया का दबाव भी नेताओं को अनौपचारिक मुलाकात के लिए मजबूर कर रहा। यही कारण है कि मोदी को एक के बाद एक अनौपचारिक मुलाकातों के लिए मजबूर होना पड़ा है।आइए अनौपचारिक मुलाकात की इन्‍हीं मजबूरियों को 6 प्‍वाइंटस में समझते हैं.....  

 

 

1. काटसा कानून: पिछले साल अमेरिकी संसद ने काउंटरिंग अमेरिकन्‍स एडवर्सरीज थ्रू सेंक्‍शन्‍स (काटसा) को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून के तहत ईरान, नॉर्थ  कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। कानून के मुताबिक, इन तीनों देशों के साथ सौदा करने वाले देशों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। भारत-रूस से S-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है। ऐसे में दोनों देश इस पर बात करना चाहते हैं।    

 

2. ईरान पर प्रतिबंध: अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ दिया है। इसके बाद ईरान पर फिर से 2015 से पहले के प्रतिबंध लग जाएंगे। इससे एक तरफ भारत का पेट्रोलियम आयात प्रभावित होगा, तो दूसरी तरफ चाहबहार में उनकी ओर से किए गए करीब 50 अरब डॉलर के निवेश के डूबने का खतरा पैदा हो गया है। भारत चाबहार के जरिए अफगानिस्‍तान तक अपने प्रोडक्‍ट भेज रहा है। प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ा तो भारत को भारी नुकसान होगा। ईरान रूस का करीबी है। भारत रूस के जरिए उसे साधने की कोशिश कर सकता है।    

 

3. चीन-पाकिस्‍तान: हाल के दौर में रूस के सबंध चीन और पाकिस्‍तान दोनों के साथ सुधरे हैं। प्रोफेसर राजन के मुता‍बिक, बॉर्डर जुड़ा होने के चलते भारत को चीन और पाकिस्‍तान से डेली बेसिस पर डील करनी होती है। ऐसे में रूस इन दोनों से डील करने में बड़ा मददगार है। डोकलाम विवाद को रूस के सहयोग से ही भारत खत्‍म करवाने में कामयाब हो पाया था।  

 

4. आगे की मुला‍कातों के मुद्दे होंगे तय: आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच 2 बड़ी मुलाकातें होनी है। पहली मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन की अगले महीने होने वाली मीटिंग में होनी है। इसके एक माह बाद दोनों नेता द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे। राजन के मुताबिक, यह मुलाकात भविष्‍य में होने वाली दोनों मुलाकातों की भूमिका तैयार करेगी, खासकर तब जब अमेरिका के कुछ बड़े कदमों ने दुनिया के जियो पॉलिटिकल हालत तेजी के साथ बदले हैं।  

 

5. मीडिया का दवाब: सरकारें अब मुलाकात से पहले भी मीडिया का दबाव नहीं लेना चाहती हैं। कई बार एक-दो सेंसेटिव मुद्दों के चलते मीडिया का इतना दबाव पड़ जाता है कि आपसी हित के अन्‍य मुद्दे पीछे रह जाते हैं। प्रोफेसर राजन चीन का उदाहरण ही लेते हैं। उनके मुताबिक, जब भी दोनों देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्ष मिलते हैं तो सीमा विवाद का मुद्दा छाया रहता है। जबकि दोनों के बीच सीमा विवाद के अलावा भी बहुत से मसले नेगोसिएशन के लिए हैं। 

 

6. घरेलू राजनीति मौजूदा दौर में कूटनीतिक मसले घरेलू राजनीति पर हावी हो रहे हैं। सरकारें अब यह नहीं चाहती हैं कि किसी खास देश से मुलाकात से पहले वह किसी तरह  के राजनीतिक दबाव में हों। खासकर ऐसे देशों के साथ जिनसे उनका स्‍टेक लगा हो, या फिर रिश्‍ते फिर से डिफाइन हो रहे हैं। यही कारण है कि पहले चीन और फिर रूस के साथ मोदी ने अनौपचारिक मुलाकात का रास्‍ता चुना। मोदी रूस को अब भी यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका से नजदीकी जाने के बाद भी रूस भारत के लिए अहम है। 

 

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मौजूदा वक्त में सालाना 80 हजार करोड़ रु.का कारोबार 


भारत और रूस के बीच मौजूदा वक्त में सालाना 80 हजार करोड़ रु. से ज्यादा का द्विपक्षीय व्यापार हो रहा है। दोनों ने इसे 2025 तक 2 लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। इस पर भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। इनमें परमाणु, रक्षा, व्यापार और पर्यटन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 2012 में दोनों देशों के बीच कारोबार में 24% की वृद्धि हुई थी। 

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