Home » Economy » InternationalTrump and Jinping will discuss trade deal over G20 summit on 30 november

दुनिया के दाे दिग्गज 30 को होंगे आमने-सामने, लिख देंगे तिजारत की नई इबारत

ट्रम्प और जिनपिंग के बीच संभावित ट्रेड डील पर रहेगी दुनिया की नजर

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नई दिल्ली। ट्रेड वॉर शुरू करके दुनिया में हलचल मचा देने वाले दो दिग्गज नेता 30 नवंबर को आमने-सामने होंगे। अर्जेंटीना में होने वाली जी-20 समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 30 नवंबर और 1 दिसंबर को मिलेंगे। इस मुलाकात को लेकर ट्रम्प का कहना है कि वे चीन से ईमानदार ट्रेड डील की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि इस डील के न होने पर उन्होंने टैरिफ बढ़ाने की धमकी भी दी है।

 

व्यापार सौदे को लेकर आशावान हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है कि चीन अमेरिका के साथ यह ट्रेड डील करेगा। उन्होंने ये भी कहा कि जब से अमेरिका ने चीन के सामान पर प्रतिबंध लगाया है तब से चीनी अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि ये डील सभी के लिए अच्छी होगी, खासतौर से अमेरिका के लिए तो यह बहुत अच्छी होगी।

 

 

धमकी भी दे डाली ट्रम्प ने

ट्रेड डील को लेकर इतने आशावान होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना रवैया नहीं बदला है। उनका कहना है कि अगर चीन ने उनके मुताबिक व्यापार समझौता नहीं किया तो वे 267 अरब डॉलर मूल्य के अन्य चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। चीनी इकोनॉमी को पहली ही बहुत बुरी तरह नुकसान पहुंच चुका है।

 

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अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती है चीन

अमेरिका के सेक्रटरी ऑफ स्टेट माइक पॉम्पियो का कहना है कि चीन अमेरिका के लिए सबसे बड़ी सामरिक चुनौती है। एक तरफ हम आपस में व्यापार की बातें कर रहें हैंवहीं दूसरी तरफ हमने हाल ही में अमेरिका की बौद्धिक संपदा चुराने के आरोप में 10 चीनियों को हिरासत में लिया है। ऐसा कई दशकों से चला आ रहा है। ये अमेरिकी व्यापारराष्ट्रीय सुरक्षा और यहां के प्रतिभाशाली लाेगों के प्रति खतरनाक है।

 

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ट्रेड वॉर को लेकर IMF ने दी थी चेतावनी

पिछले महीने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका औ चीन की लड़ाई दुनिया को कंगाल बना देगी। IMF ने ग्लोबल इकोनॉमी रिपोर्ट में बताया था कि ट्रेड वॉर ग्लोबल इकोनॉमी के लिए खतरनाक है। IMF के मुताबिक अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार इकोनॉमिक रिकवरी में एक रुकावट पैदा करेगी। यह हाउसहोल्ड्सबिजनेस और व्यापक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। ट्रेड पॉलिसी राजनीति को दर्शाती है और कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता हैजो आगे के लिए जोखिम पैदा करती है।

 
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