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खास खबर: आखिर क्‍या है GDPR कानून, क्‍यों डरी हैं फेसबुक-गूगल जैसी कंपनियां

जनरल डाटा प्रोटेक्‍शन रेग्‍युलेशन यानी GDPR यूरोपीय यूनियन की ओर से पास किया गया डाटा प्राइवेसी से जुड़ा कानून है।

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नई दिल्‍ली. GDPR कानून इस समय साइबर वर्ल्‍ड में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। यूरोपीय यूनियन की ओर से लागू किए जाने के बाद फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस कानून के आ जाने से टेक कंपनियों को न सिर्फ 900 करोड़ डॉलर की पेनल्‍टी देनी पड़ सकती है, बल्कि उनका पूरा का पूरा तिलिस्‍म ही टूट सकता है। इस कानून का असर भारत समेत दुनिया के हर उस हिस्‍से में होगा, जहां लोग फेसबुक, गूगल, ट्वीटर, व्‍हाट्सएप या इंडस्‍टाग्राम जैसे सोशल और इंटरनेट प्‍लेटफॉर्म का यूज करते हैं। आइए जानते हैं इसी GDPR कानून के बारे में। साथ ही यह भी जानेंगे कि आखिर यह कानून हमपर, आपपर सीधा असर कैसे डालेगा...  

 

आखिर क्‍या है GDPR कानून? 

साइबर एक्‍सपर्ट पवन दुग्‍गल के मुताबिक,  जनरल डाटा प्रोटेक्‍शन रेग्‍युलेशन (GDPR) यूरोपीय यूनियन की ओर से पास किया गया डाटा प्राइवेसी से जुड़ा कानून है। यूरोपीय संसद ने इसे अप्रैल 2016 में पास किया था। 25 मई 2018 को यह प्रभाव में आ चुका है। यह कानून अब यूरोपीय यूनियन के सभी 28 देशों में लागू हो गया है। इसका अनुपालन नहीं करने वाली कंपनियों पर पेनल्‍टी का प्रावधान है। माना जा रहा है इस कानून के प्रभाव में आने के बाद टेक कंपनियों को डाटा कलेक्‍ट, स्‍टोर और प्रॉसेस करने के तरीके में बदलाव  करना पड़ेगा। एक तरीके से कहें तो इसके बाद उन्‍हें अपने यूजर्स के लिए पहले से ज्‍यादा अकाउंटेबल होना पड़ेगा। यूरोप में अकेले फेसबुक के 37 करोड़ यूजर हैं। वहीं, इंटरनेट यूजर्स की कुल संख्‍या करीब 65 करोड़ है। यह संख्‍या यूरोपीय यूनियन की कुल आबादी का करीब 80 फीसदी है। 


किस तरह का डाटा इस कानून के तहत सुरक्षित होगा?
लोगों की निजी जानकारी जैसे नाम, पता, फोन नंबर, सरकारी पहचानपत्र की जानकारी जैसी चीजों का इस कानून में ख्‍याल रखा गया है। लोगों के ऑनलाइन और रियल वर्ल्‍ड की एक्टिविटी को शो करना, उनकी लोकेशन बताना (अक्‍सर आप फेसबुक पर देखते हैं), आईपी एड्रेस की जानकारी देना, कूकीज और अन्‍य डाटा को शेयर करना भी इस कानून के दायरे में आएगा। ऐसे करने पर कंपनियों को पेनल्‍टी भुगतनी पड़ सकती है। 
 

इस कानून के कुछ खास फीचर:-  

  1. अगर यूजर्स की प्राइवेसी पॉलिसी का पालन नहीं किया तो कंपनी को पेनल्‍टी भुगतनी होगी।
  2. बिना यूजर की इजाजत उसका डाटा किसी के साथ शेयर करने की कंपनियों को इजाजत नहीं होगी। 
  3. यूजर्स का उनके अपने डाटा पर सीधा कंट्रोल होगा। 
  4. वह अपने डाटा के बारे में ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से कभी भी स्‍पष्‍टीकरण मांग सकता है। 
  5. यूजर अपना डाटा टेक कपंनी से डिलीट करने के लिए कह सकता है। 
  6. डाटा में सेंध लगी तो 72 घंटे के भीतर राष्‍ट्रीय एजेंसी को बताना होगा। 

 

इस कानून की जद में कौन-कौन आएगा ?
इस कानून के जद में फेसबुक, ट्वीटर, इंस्‍टाग्राम, लिंक्‍डइन और व्‍हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म सबसे ज्‍यादा आएंगे। इसके अलावा गूगल, याहू जैसी अन्‍य मेल सर्विस प्रोइवडर, ई-कॉमर्स या शॉपिंग कंपनियां तथा ऐसी कोई भी कंपनी जिसके पास आपकी जानकारी से जुड़ा डाटा है, वह इस कानून की जद में आएगी। यही कारण है कि साइबर वर्ल्‍ड इसे लेकर बेहद सतर्क हो गया है।  


क्‍यों डर रही है फेसबुक-गूगल जैसी कंपनियां?

 

1- दोषी साबित हुई तो बड़ी पेनल्‍टी देनी होगी 
पवन दुग्‍गल के मुताबिक, इस कानून के प्रभाव में आने के बाद इंटरनेट कंपनियों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ सका है। GDPR कानून के मुताबिक, कोई भी कंपनी अगर डाटा ब्रीच की दोषी पाई जाती है तो उसपर 2 करोड़ यूरो (156 करोड़ रुपए) या एक साल पहले के टोटल सालाना रेवेन्‍यू का 4 फीसदी पेनाल्‍टी के तौर पर देना पड़ेगा। अगर ऐसा होता है तो आर्थिक नुकसान के साथ ही सीधे तौर पर इन कंपनियों की छवि पर निगेटिव इम्‍पैक्‍ट पड़ेगा। 


2- ध्‍वस्‍त हो सकता है 13 लाख करोड़ का मार्केट 
दुग्‍गल के मुताबिक, इस कानून के बाद भारत समेत दुनिया भर के अन्‍य देशों ने अगर डाटा प्राइवेसी से जुड़े कानून बनाए तो आने वाले दिनों में फेसबुक-गूगल जैसी कंपनियों को डाटा का पूरा कारोबार चौपट हो सकता है। दुनि‍या भर में इस वक्‍त 4,000 से ज्‍यादा डाटा ब्रोकरिंग कंपनि‍यां है। इसमें Acxiom सबसे बड़ी कंपनी है, जि‍सके पास 23,000 सर्वर्स हैं जो कंज्‍यूमर डाटा को कलेक्‍ट करने और एनालाइज करने का काम करते है। यह कंपनी दुनि‍या भर के करीब 50 करोड़ कंज्‍यूमर्स के डाटा पर काम कर रही है। रि‍सर्च कंपनी Aranca के मुताबि‍क, ग्‍लोबली डाटा ब्रोकरिंग की इंडस्‍ट्री 200 अरब डॉलर (13 लाख करोड़ रु.) की है। इन कंपनियों के लिए प्राइमरी डाटा या कहें तो कच्‍चा माल प्रोवाइड कराने का काम फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां ही करती हैं। इस कानून के आने के बाद ये कंपनियां आसानी से प्राइमरी डाटा हासिल नहीं कर पाएंगी। सीधी भाषा में कहें तो यह 13 लाख करोड़ का मार्केट ध्‍वस्‍त हो सकता है। 

 

फेसबुक-गूगल को 900 करोड़ डॉलर का नुकसान 

माना जा रहा है कि यूरोपीय यूनियन में इस कानून के प्रभाव में आने के बाद फेसबुक, गूगल, व्‍हाट्सएप और इंस्‍टाग्राम को करीब 900 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यूरोपीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून के पास होने के बाद फ्रांस, बेल्जियम, हमबर्ग और ऑस्ट्रिया इन चारों कंपनियों पर उनके एनुअल रेवेन्‍यू का 4 फीसदी पेनल्‍टी लगा सकते हैं। अगर अगर जोड़ें तो करीब 900 करोड़ रुपए ठहरता है। 

 

 

आगे पढ़ें... इस कानून का भारत पर क्‍या असर होगा?

 

भारत पर इसका क्‍या असर होगा  ?

सामान्‍य तौर पर तो यह कानून यूरोपीय यूनियन के तहत आने वाले 28 देशों के नागरिकों की डाटा प्राइवेसी के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए लागू हुआ है। दुग्‍गल के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन में काम करने वाली फेसबुक, गूगल, इंस्‍टाग्राम, व्‍हाट्सएप जैसी टेक कंपनियां भारत में मौजूद हैं। माना जा रहा है कि अगर वो यूरोपीय यूनियन के यूजर्स के प्राइवेसी सेटिंग को जीडीपीआर के मुताबिक तैयार करती हैं, तो इसका लाभ इंडियन यूजर्स को भी हो सकता है। हालांकि कंपनियां अभी जो कदम उठाएंगी वह उनकी स्‍वेच्‍छा पर निर्भर करेगा। भारत में कानून नहीं होने की वजह से वो बाध्‍य नहीं हैं। साथ ही कोई भी भारतीय नागरिक  डाटा सुरक्षा का उलंघन होने पर इन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाएगा। हालांकि जानकार मान रहे हैं कि इस कानून के चलते टेक कंपनियों पर नैतिक दबाव जरूर पड़ेगा। 


सरकार बना रही है कानून 
दुग्‍गल के मुताबिक, डाटा सिक्‍युरिटी को लेकर भारत सरकार भी कानून बना रही है। इस कानून का ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में यह संसद में पेश हो सकता है। यह कानून पास हो गया, तो फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को भारतीय कानून के प्रति अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। इससे भारतीय नागरिकों के डाटा प्राइवेसी के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।   

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